: बरसात में भी डंटे हुए हैं अनशनकारी : इलाहाबाद। झारखंड में नक्सलियों के हाथों शहीद हुए बाबूलाल पटेल के परिजनों की भूख हड़ताल तीसरे दिन शनिवार को भी जारी रही। कल देर शाम बरसात होने के बाद भी शहीद के परिजन सैकड़ों लोगों के साथ बरसात के पानी में भीगते हुए लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग के किनारे धरने पर डंटे रहे। शहीद के पिता मुन्नी लाल ने साफ शब्दों में कहा है कि जान दे देंगे पर मांग पूरी न होने पर अनशनस्थल से नहीं हटेंगे। उधर, अपनादल की नेता अनुप्रिया पटेल ने कहा है कि शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे धरने की तरफ शासन ध्यान नहीं दे रहा है। अगर हालत बिगड़ती है तो इसके लिए प्रदेश और केंद्र सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार माना जाएगा।
याद दिला दें कि नवाबगंज क्षेत्र के शिवलाल का पूरा के किसान मुन्नीलाल पटेल का इकलौता बेटा बाबूलाल सीआरपीएफ में भर्ती हुआ। इन दिनों बाबूलाल की पोस्टिंग झारखंड के नक्सलाइट क्षेत्र लातेहार जिला में हुई थी। सात जनवरी को नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबल के कई जवान शहीद हुए थे। उन शहीदों में बाबूलाल पटेल भी शामिल था। नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में बाबूलाल का शरीर गोलियों से छलनी कर दिया गया। बाद में बाबूलाल के पेट को फाड़कर उसके भीतर ढाई किलो का प्रेशर बम प्लांट कर दिया गया था। रांची में पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सकों की टीम की जांच में जब इसका खुलासा हुआ तो सुरक्षाबल के जवानों के पैर तले से जमीन खिसक गई। गृह मंत्रालय तक हिल गया। शहीद हुए किसी जवान का पेट फाड़कर उसके भीतर विस्फोटक सामग्री प्लांट करने की देश के भीतर नक्सलवादियों की यह पहली वारदात है।

शहीद के परिजनों से लेकर आसपास के दर्जनभर से ज्यादा गांव के लोगों को मलाल है कि अभी तक केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार का कोई प्रतिनिधि भी शहीद के दरवाजे आकर सांत्वना के दो शब्द भी नहीं बोल सका। आधा किमी दूर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वागत समारोह करा सकते हैं, फूल-माला पहनकर लच्छेदार भाषण देकर तालियां बजवा सकते हैं पर लखनऊ राजमार्ग से दो सौ मीटर शहीद के बूढ़े माता-पिता, सालभर पहले ब्याह कर आई नवयौवना रेखा, जिसके पेट में चार माह का बच्चा पल रहा हो, असमय विधवा हुई नवयुवती के सिर पर सद्भाव से हाथ नहीं रख सकते। सांत्वना के दो शब्द भी नहीं बोल सकते?
अगर राजनीति का चोला पहन लेने से कोई इतना निरंकुश व असंवेदनशील हो सकता है तो लानत है ऐसी राजनीति पर। भगवान न करे दुश्मन भी नेतागीरी के पेशे में न जाए। सपा के प्रो. रामगोपाल सिंह यादव, धर्मेंद्र यादव, पशुधन मंत्री पारसनाथ यादव आसपास स्वागत समारोह आयोजित करा के फूल-माला से लदे-फदे मुस्कराते, हाथ हिलाते निकल जाते हैं और यहां आना मुनासिब तक नहीं समझते। न वे खुद समझ पाते हैं और ना ही जिले में ‘तैनात’ पार्टी के दर्जनों पदाधिकारी उन नेताओं को मशवरा ही दे पाते हैं। केंद्र में सत्तासीन कांग्रेस पार्टी के नेताओं की भी मति मारी गई है। यहां आना तो दूर, दिल्ली, लखनऊ में बैठे कांग्रेसियों को सांप क्यों सूंघ गया है, यह लोगों के समझ से परे है। कांग्रेस के बबुआ व कांग्रेसियों के राजकुमार राहुल बाबा यहां से सत्तर किमी दूर रायबरेली आकर इलाके का दौरा करते हैं पर यहां नहीं आ सकते। क्या बात है, उन्हें जानकारी नहीं है तो उनके ‘सिपहसालार’ उन्हें जानकारी क्यों नहीं दे पाए। ऐसा परहेज क्यो? क्या इसमें भी राजनैतिक नजरिया हावी हो गया है।
उपेक्षा से बढ़ी नाराजगी : उपेक्षा के चलते यहां लोगों की नाराजगी बढ़ी है। पांच दिन गुजर जाने के बाद परिजनों ने प्रदेश, केंद्र सरकार के रवैए पर मलाल जाहिर किया। मौके पर आए डीएम से अवगत कराया। इसके दूसरे दिन आंदोलन की चेतावनी दे दी। शहीद के परिजनों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ अपनादल की राष्ट्रीय महासचिव व वाराणसी के रोहनिया क्षेत्र की विधायक अनुप्रिया पटेल की अगुवाई में गुरुवार को दोपहर के बाद धरना और भूख हड़ताल शुरू कर दिया। शनिवार को अनशन का तीसरा दिन रहा। दोपहर बाद भाजपा के पूर्व विधायक प्रभाशंकर पांडेय, बसपा नेता व जिलापंचायत सदस्य दूधनाथ पटेल दूसरे दिन भी अनशन स्थल पर पहुंचे। वे दोनों थोड़ी देर अनशन पर बैठे। उन्होंने शहीद के परिजनों की मांग का समर्थन किया।
शुक्रवार की दोपहर बाद शहीद बाबूलाल की मां जगपति देवी की हालत बिगड़ने लगी। शाम करीब पांच बजे सीएचसी प्रभारी डॉ. शिवपूजन के साथ डॉ. नवीन गिरि मौके पर पहुंचे। चिकित्सकों की टीम ने अनशनकारियों के स्वास्थ्य का परीक्षण किया। शाम को छह बजे अचानक बरसात होने लगी। पर अनशनकारी पानी में भीगते हुए भी मौके पर जमे रहे। देर शाम आठ बजे एसडीएम विवेक श्रीवास्तव और सीओ राहुल मिश्रा मौके पर पहुंचे। अनशनकारियों को काफी देर तक समझाने का प्रयास किया पर अनशनकारी नहीं माने। अनशनकारियों में प्रदेश और केंद्र सरकार की तरफ से कोई मदद न मिलने पर नाराजगी है। धरने में शामिल अपनादल की नेता अनुप्रिया पटेल ने कहा कि शांतिपूर्ण ढंग से चल रहे धरने पर अगर सरकार ने ध्यान न दिया तो हालत बिगड़ भी सकते हैं। उन्होंने पत्रकारों से कहा, शहीद के परिजनों की मांग जायज है। वे मामले को विधानसभा में भी उठाएगीं।
शहीद के पिता मुन्नी लाल पटेल ने कहा कि शहीद स्थल बनाने, थाने का नाम शहीद बाबूलाल के नाम करने, मुख्यमंत्री को घर बुलाने की मांग की जा रही है। अभी तक शासन के किसी भी प्रतिनिधि ने इस बारे में कोई बात तक नहीं की है। अपनादल के जिलाध्यक्ष जवाहर लाल पटेल, प्रदेश अध्यक्ष साजिद अली, प्रदेश सचिव बालम द्विवेदी, प्रवक्ता आरबी सिंह पटेल, ग्रामप्रधान संजय तिवारी, मानिकचंद्र पटेल, ब्रम्हदीन पांडेय, उमेश शुक्ल चंदन आदि उपस्थित रहे। उधर, युवा विकास पार्टी के अध्यक्ष संजीव कुमार मिश्र भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने इस मामले में केंद्र और प्रदेश सरकार के उपेक्षात्मक रवैए की निंदा की है।
इलाहाबाद से शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.