अनिल त्रिपाठी चला रहे पत्‍नी के नाम पर करोड़ों का समाचार उद्योग

 

अनिल त्रिपाठी द्वारा अपनी पत्नी के नाम से अनेक समाचार पत्रों का प्रकाशन कर समाचार उद्योग चलाया जा रहा है। अनिल त्रिपाठी द्वारा सालाना लगभग चार से पांच करोड़ रुपया केवल कागजों, स्याही और समाचार पत्रों के संचालन पर व्यय किया जाता है जिसकी पुष्टि भारत सरकार के समाचार पत्र के पंजीयक कार्यालय में अनिता त्रिपाठी द्वारा प्रेषित वार्षिक विवरणी से की जा सकती है। 
 
अनिल त्रिपाठी द्वारा अपनी पत्‍नी के नाम से करोड़ों का समाचार उद्योग स्थपित कर कारोबार कर रहे हैं और पत्रकारिता का उददेश्य केवल अपने समाचार पत्रों में विज्ञापन लेना है, जिसके लिये दिन भर राजनीतिक पार्टियों के चक्कर लगाते रहते हैं और सचिवालय एनेक्सी में किसी न किसी अधिकारी के पास बैठे रहते हैं। सूत्रों से यह भी ज्ञात हुआ है कि अनिल त्रिपाठी के इस व्यवसाय में सतीश प्रधान की भी बराबर की हिस्सेदारी है और सतीश प्रधान द्वारा भी अनेक समाचार पत्रों के प्रकाशन किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव 2012 से पूर्व विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान ने मिलकर लाखों का विज्ञापन लिया है और अनेक सम्पितयों विभिन्न नामों से अर्जित की है।
 
अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान की साझेदारी में जहां एक बड़ा समाचार उद्योग चलाया जा रहा हैं वही समस्त सरकारी सुविधाओं को लेने में भी दोनों की हिस्सेदारी रहती है। सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी ने सरकारी आवास लेने की जुगत बैठा कर अपने अपने नाम सरकारी आवास आवंटन करा लिया, परन्तु दोनो धुरन्दरों ने अपने आवास आंवटन से पूर्व क्या श्रीधर अग्निहोत्री, योगेश श्रीवास्तव, जितेन्द्र शुक्ला, उमेश मिश्रा, प्रकाश चन्द्र अवस्थी, सुरेन्द्र अग्निहोत्री, 
ताविषी श्रीवास्तव, एस0पी0सिंह, राजेश कुमार सिंह, विवेक तिवारी, मोहसिन हैदर रिजवी, विपिन कुमार चौबे, अवनीश विद्यार्थी, अजीत कुमार खरे, सुरेन्द्र सिंह, अविनाश शुक्ल, राजेन्द्र कुमार गौतम, राज कुमार सिंह, शेखर श्रीवास्तव, शशिनाथ दुबे, जितेन्द्र यादव, मुकेश यादव, सुरेश यादव, केके सिंह, राजकुमार, जुरैर अहमद आजमी, महेन्द्र मोहन गुप्ता आदि की सिफारिश अथवा आवास दिये जाने में कोई मदद की।
 
अधिक से अधिक विज्ञापन की प्राप्ति ही आज अनिल त्रिपाठी और सतीश प्रधान का असल लक्ष्य हो चुका है। और इसके लिये यह दोनों किसी भी हद तक जाने को तैयार रहते हैं। इन दोनो की जुगल जोड़ी के किस्से विकास दीप में चर्चित है, जहां रात में दोनों बैठकर चियर्स करते हैं और आने वाले कल के शिकार की रणनीति बनाते हैं। अपनी इसी रणनीति के चलते आज सतीश प्रधान और अनिल त्रिपाठी पत्रकारिता की आड़ में प्रदेश में एक बड़े समाचार पत्र व्यवसायी बन गये है और सालाना करोड़ों का व्यवसाय कर रहे हैं।
 
अर्चना यादव
 
पत्रकार, लखनऊ 

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