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अनुराग कश्‍यप के निशाने पर पत्रकार पंकज शुक्‍ल

गैंग ऑफ वासेपुर से एक बार फिर चर्चा में आए अनुराग कश्‍यप का विवादों के साथ चोली और दामन का साथ है। हमेशा विवादों में रहने वाले अनुराग अपनी नकारात्‍मक खबरों पर पत्रकारों को गाली देने से भी बाज नहीं आते हैं। कुछ दिनों पहले वरिष्‍ठ पत्रकार सुभाष के झा को गधा तक कह चुके अनुराग के निशाने पर इनदिनों मुंबई के एक पत्रकार हैं।

गैंग ऑफ वासेपुर से एक बार फिर चर्चा में आए अनुराग कश्‍यप का विवादों के साथ चोली और दामन का साथ है। हमेशा विवादों में रहने वाले अनुराग अपनी नकारात्‍मक खबरों पर पत्रकारों को गाली देने से भी बाज नहीं आते हैं। कुछ दिनों पहले वरिष्‍ठ पत्रकार सुभाष के झा को गधा तक कह चुके अनुराग के निशाने पर इनदिनों मुंबई के एक पत्रकार हैं।

वरिष्‍ठ पत्रकार पंकज शुक्‍ल को लेकर अनुराग कहते हैं कि पंकज शुक्‍ल जी बहुत समय से मेरे और वासेपुर के खिलाफ लिख रहे हैं। उनकी राय उनकी अपनी है लेकिन उन्‍हें एक्‍सपोज करने का समय आ गया है। अनुराग यहां भी नहीं रुकते हैं और खुलकर कहते हैं कि पंकज फिल्‍ममेकर बनना चाहते हैं। इसलिए ऐसा कर रहे हैं। अनुराग के अनुसार, पंकज एक बकरा लेकर आए, बोले ये करोड़ लगाने को तैयार हैं अगर आप फिल्‍म में जुड़ें। लेकिन मैंने मना कर दिया।

अनुराग कश्‍यप के आरोपों पर पंकज कहते हैं कि अनुराग कश्यप एक संघर्षशील निर्देशक हैं और संघर्ष के जरिए अपनी पहचान बनाने वाले लोग अक्सर बातों में मुलायमियत नहीं रख पाते। मेरे ऊपर उन्होंने फिल्ममेकर बनने की चाहत रखने का आरोप लगाया है तो मैं तो पहले से ही फिल्ममेकर हूं। एक फीचर फिल्म, छह शॉर्ट फिल्में, चार डॉक्यूमेंट्री फिल्में बना चुका हूं। जो देश विदेश के फिल्म समारोहों में दिखाई जा चुकी हैं, प्रशंसा भी पा चुकी हैं।

पंकज का कहना  है कि मेरी अनुराग से कोई प्रतियोगिता नहीं है। मेरे एक निर्माता मित्र अनुराग कश्यप को बतौर निर्देशक लेकर मेरी एक कहानी पर फिल्म बनाना चाहते थे। अनुराग का प्रोडक्शन हाउस संभालने वाली गुनीत मोंगा का कहना था कि वो निर्माता बजाय नई फिल्म बनाने के अनुराग की बतौर निर्माता निर्माणाधीन फिल्म में पैसा लगाएं। बस इसी पर बात नहीं बनी। अनुराग ने मना किया हो ऐसी कोई बात ही नहीं है।

जानकारों का कहना है कि अनुराग ने फिल्म जगत में अपनी जो जगह बनाई है, उसके लिए वह लोगों से काफी लड़े भिड़े हैं। पांच, ब्लैक फ्राइडे और गुलाल जैसी फिल्में लोगों को अच्छी लगी पर ढंग से रिलीज नहीं हो पाईं तो अनुराग में सिस्टम को लेकर गुस्सा है। ऐसे में अनुराग के सामने जो भी कायदे या सिस्टम की बात करता है.वो अनुराग को सिस्टम का आदमी लगने लगता है।

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