अपडेट… दैनिक जागरण गोरखपुर के संपादकीय विभाग के कर्मियों से दुर्व्‍यवहार का‍ सिलसिला जारी

: कानाफूसी : इनपुट हेड केके शुक्‍ला के ताजा निशाने पर डा. विवेकानंद मिश्र : गोरखपुर। दैनिक जागरण गोरखपुर का न्‍यूज रूम जंग का मैदान बन गया है। रोज कोई न कोई संपादकीय कर्मी इनपुट हेड केके शुक्‍ला के दुर्व्‍यवहार का शिकार हो रहा है। ताजा शिकार जनरल डेस्‍क इंचार्ज डा. विवेकानंद मिश्र हैं। मृदुभाषी और काम से काम रखने वाले श्री मिश्र से दुर्व्‍यवहार की घटना ने सबको हतप्रभ कर दिया। केके शुक्‍ला ने न सिर्फ उनसे बदजुबानी की बल्कि उनके खिलाफ अभद्र भाषा का प्रयोग किया। मामला सिर्फ एक खबर का था। बताते हैं कि केके शुक्‍ला ऐसे ही मौके की तलाश में रहते हैं और फिर इसी के बहाने अगले की ऐसी तैसी कर डालते है।

विवेकानंद मिश्र ने अपनी 15 साल की नौकरी में खुद को कभी इतना अपमानित नहीं महसूस किया था। जागरण के वरिष्‍ठ उप संपादक और चुनाव डेस्‍क प्रभारी विरेन्‍द्र मिश्र दीपक तो केके शुक्‍ला के स्‍थायी निशाना हैं। दीपक का कोई दिन ऐसा नहीं बीतता जिसमें कई बार केके शुक्‍ला के सामने तलब होकर गालियां न सुननी पड़ती हो। मालूम हो श्री दीपक जागरण से लगभग 23 साल पुराने संपादकीयकर्मी हैं। वे मंचों के लोकप्रिय और सम्‍मानित कवि भी हैं। शहर में उनकी साहित्यिक हलके में अच्‍छी पहचान है। केके शुक्‍ला की बदतमीजियों से ही क्षुब्‍ध होकर कुछ दिनों पहले एक दर्जन से ज्‍यादा संपा‍दकीय कर्मियों ने जागरण से इस्‍तीफा देकर जनसंदेश टाइम्‍स ज्‍वाइन कर लिया था। इन्‍होंने अपने इस्‍तीफों में भी केके शुक्‍ला के उत्‍पीड़न को कारण बताया था। 

मुख्‍य महाप्रबंधक सीकेटी ने इसके लिए केके शुक्‍ला को ठीक से समझाया भी था कि वे संपादकीय कर्मियों से तमीज से पेश आएं। पर स्‍टेटहेड रामेश्‍वर पांडेय से सीधे जुड़े होने के चलते के के शुक्‍ला का रवैया नहीं बदला। बताया जाता है कि जागरण गोरखपुर में संपादकीय प्रभारी पद के लिए बाहर के कुछ लोगों का नाम चर्चा में आने के बाद केके शुक्‍ला की चिड़चिड़ाहट और बढ गई हैं। यह अब अपने ही सहकर्मियों से दुर्व्‍यवहार में फूट रही है। उन्‍हे पिछले 6 माह से संपादकीय का प्रभार मिला हुआ था और स्‍टेट हेड ने स्‍थाई तौर पर संपादकीय प्रभारी बनाने के लिए एडी चोटी का जोर लगा रखा था। इस बीच जागरण में भर्ती का खेल भी चालू है। केके शुक्‍ला ने इसका भरपूर लाभ उठाया है तीन संपादकीय कर्मियों को जम्‍मू कश्‍मीर से बुलाकर ज्‍वाइन कराया गया है। केके शुक्‍ला चाहते हैं जागरण के बचे खुचे पुराने कर्मचारी उत्‍पीड़न से आजिज होकर इस्‍तीफा दे दें जिससे उनके खुला खेल फर्रुखाबादी के लिए राह निष्‍कंट हो जाए।

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