अपनी ही कौम के कुछ लोग नौकरी बचाने के चक्कर में चुप हैं

Romel Bhavsar  : पत्रकारिता जगत के लिए ये काला दिन है…..एक साथ करीब 500 पत्रकार बेरोजगार हो गए…ऐसा लगता है कि न्यूज चैनल से लोगों को निकालना अब फैशन बन गया है…..NETWORK 18 ग्रुप के चैनल IBN-7 और CNN-IBN ने छटनी के नाम पर कई पत्रकारों की नौकरी छीन ली…दुख इस बात का है कि अपनी ही कौम के कुछ लोग नौकरी बचाने के चक्कर में चुप हैं….दीपावली के पहले कई पत्रकारों के घर के चूल्हे जलना बंद हो जाएंगे….मेरे सबसे पसंदीदा पत्रकारों में एक राजदीप सरदेसाई जी है….पर पता नहीं क्यों वो भी चुप हैं….

हम पत्रकारों को भी ये समझना होगा कि जब तक हम एक नहीं होंगे ये होता रहेगा..नरेंद्र मोदी से लेकर राहुल गांधी तक को लेकर हल्ला मचाने वाले देश के सभी न्यूज चैनल आज चुप है…क्यों कि बोले तो बोले कौन ? …जो पत्रकार और न्यूज चैनल अपने लोगों की हित की बात नहीं कर सकता वो देश के हित की बात क्या करेगा…ऐसा नहीं है पहली बार पत्रकार बेरोजगार हो रहे हैं…कई बार कई चैनलों में छटनी हुई है…कई बार पत्रकार बेरोजगार हुएहैं…पर किसी न्यूज चैनल के स्टॉफ में इतनी ताकत नहीं थी को वो इसका विरोध करे….मैं अब तक 6 न्यूज चैनल में काम कर चुका हूं….इसमे तीन न्यूज चैनलों में छटनी के नाम पर लोगों को निकाला गया था…मैंने लोगों को निकलता देखा है रोता देखा हूं…पर उनके दर्द को तब तक नहीं समझ पाया जबतक मैं खुद एक बार बेरोजगार नहीं हो गया….समय है सारे न्यूज चैनल से जुड़े लोग एक बार आवाज उठाए ताकी भविष्य में कोई चैनल किसी को निकाले की हिम्मत न कर सके…पर अफसोस ऐसी हिम्मत दिख नहीं रही….इतना तय कि

दूसरे के घर की आग से हाथ सेकने वालों…..
कल तुम्हारे घर में भी आग लग सकती है…..
आज इनको निकाले जाने पर सब चुप बैठो….
कल जब तुमको निकाला जाएगा तो हम भी मजे लेंगे —

Romel Bhavsar के फेसबुक वॉल से.

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