अपने वेतन और कमीशन के लिए अमन ने भेजा अमर उजाला को नोटिस

यूपी के एटा जिले के कस्बा मारहरा में कार्यरत अमर उजाला के स्थानीय रिर्पोटर अमन पठान ने ब्यूरो चीफ पवन मित्तल, विज्ञापन प्रभारी राजीव शर्मा और दिनेश बाबू को तीन माह का वेतन और उनके द्वारा अखबार को दिए गए 2 लाख 40 हजार रुपये के विज्ञापन के कमीशन का भुगतान न किये जाने और बिना किसी कारण संस्थान से कार्यमुक्त किये जाने को लेकर नोटिस भेजा है। उनके वकील द्वारा भेजी गई नोटिस में चेतावनी दी गई है कि अगर 15 में वेतन व विज्ञापन कमीशन का भुगतान नहीं किया गया तो वह मामले में न्याय के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटायेंगे।

अमन का कहना है कि वे रिर्पोटर के रूप में काफी समय से अमर उजाला को अपनी सेवा दे रहे थे, इसी को देखते हुए 17 अगस्त 2011 को साक्षात्कार के बाद उप संपादक प्रदीप मिश्रा ने उन को स्थानीय रिर्पोटर के पद पर मारहरा में नियुक्त कर दिया और संस्थान को एक वर्ष में एक लाख रुपये का विज्ञापन देने की बात कही। अमन के अनुसार – वे उनके आदेश का पालन करते हुए संस्थान को तीन माह में चार लाख रुपये का विज्ञापन दिया। उन की मेहनत को संस्थान ने खूब सराहा और उन्‍हें लुभावने सपने भी दिखाए।

बताया जा रहा है कि अमन ने 21 दिसम्बर 2011 को डीएम के आदेश की अवेहलना कर रहे स्कूल संचालकों के खिलाफ एक खबर प्रकाशित की। खबर के प्रकाशित होने के बाद एक दबंग स्कूल संचालक ने अमन के साथ मारपीट की। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई, लेकिन अमर उजाला ने अपने रिर्पोटर को कोई सहयोग नहीं किया और स्कूल संचालक से मोटी रकम लेकर अमन पर फैसले का दबाव बनाने लगे, जब रिर्पोटर ने मामले में फैसला करने से मना कर दिया तो उसे बिना कोई कारण बताए 24 दिसम्बर 2011 को संस्थान से कार्यमुक्त कर दिया गया।

अमन का आरोप है कि मारहरा क्षेत्र से विज्ञापन लेने के लिए अमर उजाला लगातार उनका  नाम प्रकाशित करता रहा जिस पर उन्‍होंने एतराज किया और उसके द्वारा दिये गये विज्ञापन की कमीशन व वेतन की मांग की। अमर उजाला के प्रशासनिक अधिकारी पहले तो उनको आश्वासन देते रहे उसके बाद उन्होंने वेतन, कमीशन देने से साफ इनकार कर दिया और अभद्रता भी की। इसके बाद अमर पठान कानून का सहारा लेने की तैयारी में हैं। अमन पठान ने अपने वकील के माध्यम से पवन मित्तल, राजीव शर्मा और दिनेश बाबू को वेतन व विज्ञापन कमीशन के भुगतान के लिए नोटिस भेजा है।

इन आरोपों के संबंध में जब प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उसका कहना था कि अमन ने अमर उजाला में काम ही नहीं करते थे। उन्‍हें संस्‍थान ने कोई लेटर नहीं दिया था। वे रिपोर्टर के रूप में रखे ही नहीं गए थे। नोटिस मिला है। इसका जवाब दिया जाएगा। प्रबंधन का कहना है कि जब वो अमर उजाला में काम किया ही नहीं तो वेतन और कमीशन बकाया जैसी बात ही कहां रह जाती है। 

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