अबू आज़मी पर एफआइआर दर्ज करने और चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग

 सामाजिक कार्यकर्त्ता डॉ नूतन ठाकुर ने समाजवादी पार्टी नेता अबू आज़मी  द्वारा बलात्कार और महिला के निजी शारीरिक संबंधों पर आपतिजनक और आपराधिक टिप्पणी के सम्बन्ध में आज राष्ट्रीय महिला आयोग और चुनाव आयोग को शिकायत भेजी है.

सुश्री नूतन ने कहा है कि स्पष्ट है कि ये टिप्पणियाँ आपत्तिजनक होने के साथ-साथ आपराधिक भी हैं जो एक नारी के रूप में उन्हें विधि-प्रदत्त अधिकारों को छीन रहा है और जो लोगों को उनके साथ व्यक्तिगत स्तर पर आपराधिक कृत्य करने को भड़काने वाला है.

अतः उन्होंने तत्काल श्री आज़मी पर एफआइआर दर्ज कराये जाने और उन्हें चुनाव से प्रतिबंधित किये जाने की मांग की है. साथ ही कहा है कि यदि 15 अप्रैल तक इसमें कार्यवाही नहीं हुई तो वे अपने विधिक अधिकारों के लिए कोर्ट जायेंगी.

सेवा में,
अध्यक्ष,
राष्ट्रीय महिला आयोग,
भारत सरकार,
नयी दिल्ली
विषय- मुंबई के समाजवादी पार्टी नेता श्री अबू आज़मी द्वारा की गयी घोर आपतिजनक और आपराधिक टिप्पणी विषयक
महोदया,

कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर, एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो प्रशासन में पारदर्शिता, मानवाधिकार तथा नारी अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करती हूँ. मैं आपके सम्मुख मुंबई के समाजवादी पार्टी नेता श्री अबू आज़मी द्वारा पूरे महिला समाज के प्रति दिए गए अत्यंत ही अमर्यादित, अनुचित और आपराधिक टिप्पणियों के सम्बन्ध में तत्काल जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही किये जाने हेतु एक गंभीर प्रकरण प्रस्तुत कर रही हूँ.

प्राप्त जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी नेता श्री मुलायम सिंह यादव के बलात्कार के विषय में अत्यंत आपत्तिजनक और विवादित बयान पर समाचार पत्र 'मिड डे' से बातचीत में श्री अबू आज़मी ने कहा, “इस्लाम के अनुसार बलात्कार के दोषी को फांसी की सज़ा दी जानी चाहिए लेकिन इसके लिए महिलाओं को कुछ नहीं होता, सिर्फ़ पुरुषों को सज़ा दी जाती है. महिलाएं भी दोषी हैं”, साथ ही यह भी कहा कि- “भारत में अगर कोई मर्ज़ी से यौन संबंध बनाता है तो वो सही है. लेकिन अगर वही व्यक्ति आपकी शिकायत कर देता है तो वो एक समस्या है. आजकल ऐसे बहुत सारे मामले देखने में आ रहे हैं. जब कोई किसी लड़की को छूता है तो लड़कियां शिकायत कर देती हैं. अगर नहीं छूता तब भी शिकायत कर देती हैं. ये एक समस्या हो जाती है और पुरुष की इज्ज़त मिट्टी में मिल जाती है. इच्छा या अनिच्छा से, अगर बलात्कार होता है तो इस्लाम के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए.” अख़बार के अनुसार अबू आज़मी ने कहा, “इसका हल है कि अगर कोई महिला, चाहे वो शादीशुदा हो या नहीं, अगर किसी दूसरे पुरुष के कहे अनुसार चलती है तो उसे फांसी दे देनी चाहिए, चाहे इसमें उसकी मर्ज़ी शामिल हो या नहीं. दोनो को फांसी दे देनी चाहिए.”

स्पष्ट है कि श्री आज़मी की ये टिप्पणियाँ ना सिर्फ अत्यंत आपत्तिजनक हैं बल्कि सम्पूर्ण महिला समाज के प्रति एक राजनैतिक व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से किया गया आपराधिक कृत्य भी है. मैं स्वयं अपने व्यक्तिगत स्तर पर इससे प्रभावित हुई हूँ क्योंकि यद्यपि मेरे इस प्रकार के कोई विवाहेतर सम्बन्ध नहीं हैं पर यह एक नारी के रूप में मेरी व्यक्तिगत निजता का मामला है जिस पर श्री आज़मी अथवा किसी भी व्यक्ति को कुछ भी कहने, उस सम्बन्ध में लोगों को आपराधिक कार्य के लिए उत्प्रेरित करने, विधि के विरुद्ध लोगों की भावनाएं भड़काने और मेरी तथा सभी हिन्दुस्तानी औरतों की निजता को सार्वजनिक रूप से हरने, मेरे सहित हम सभी महिलाओं को व्यक्तिगत मामलों, व्यक्तिगत फैसलों और व्यक्तिगत अभिरुचि के विरुद्ध बलात एक ख़ास प्रकार से आचरण करने को मजबूर करने और ऐसा नहीं करने पर हमें हिंसा और मृत्यु की सीधी धमकी देने का यह अत्यंत ही निंदनीय और स्पष्टतया आपराधिक कार्य है जिस के सम्बन्ध में मैं एक नारी के रूप में कभी भी चुपचाप नहीं रह सकती.

साथ ही इच्छा अथवा अनिच्छा के बाद भी किसी महिला से बलात्कार होने के बाद उस महिला को ही फांसी दिए जाने का उनका बयान भी उतना ही आपत्तिजनक है और सीधे-सीधे एक महिला के रूप में मेरे अधिकारों, मेरी स्थिति और मेरे जीवन और सुरक्षा पर खतरा है जिससे प्रभावित हो कर कोई भी व्यक्ति मेरे अथवा किसी भी महिला के साथ कोई भी अवांछनीय हरकत कर सकता है और बाद में लोगों को उन्मादित कर के इस बयान का गलत उपयोग कर सकता है.

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री आज़मी के बयान मात्र आपत्तिजनक नहीं हैं, ये मुझे एक नारी के रूप में क़ानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हनन करते हुए एक नारी के रूप में मुझे जीवन का खतरा उत्पन्न करने और मेरे प्रति हिंसक आपराधिक कृत्य हेतु लोगों को उकसाने का सीधा-सीधा आपराधिक कार्य है. अतः मैं व्यक्तिगत रूप से इस प्रभावित होने के कारण, एक नारी होने के कारण और एक प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण आपसे यह निवेदन करती हूँ कि राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा तत्काल इस प्रकरण में एफआइआर दर्ज किये जाने के आदेश दिए जाएँ तथा अन्य सभी आवश्यक विधिक कदम उठाये जाएँ.

यह भी निवेदन करती हूँ कि यदि तीन दिन में आपके स्तर से अपेक्षित कार्यवाही नहीं होती है तो मैं दिनांक 15/04/2014 को इस सम्बन्ध में मा० न्यायालय का शरण लूंगी और श्री आज़मी के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक विधिक और आपराधिक कार्यवाही किये जाने की मांग के अतिरिक्त स्वयं राष्ट्रीय महिला आयोग की भूमिका के सम्बन्ध में भी प्रश्न उठाऊंगी.

पत्र संख्या-  NT/NCW/Abu/01                                                                                                       
भवदीय,
डॉ नूतन ठाकुर
लखनऊ
                                                                                                                                                            

सेवा में,
भारत निर्वाचन आयोग,
नयी दिल्ली
विषय- मुंबई के समाजवादी पार्टी नेता श्री अबू आज़मी द्वारा की गयी घोर आपतिजनक और आपराधिक टिप्पणी विषयक
महोदया,

कृपया निवेदन है कि मैं डॉ नूतन ठाकुर, एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ जो प्रशासन में पारदर्शिता, मानवाधिकार तथा नारी अधिकारों के क्षेत्र में कार्य करती हूँ. मैं आपके सम्मुख मुंबई के समाजवादी पार्टी नेता श्री अबू आज़मी द्वारा पूरे महिला समाज के प्रति दिए गए अत्यंत ही अमर्यादित, अनुचित और आपराधिक टिप्पणियों के सम्बन्ध में तत्काल जांच कर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही किये जाने हेतु एक गंभीर प्रकरण प्रस्तुत कर रही हूँ.

प्राप्त जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी नेता श्री मुलायम सिंह यादव के बलात्कार के विषय में अत्यंत आपत्तिजनक और विवादित बयान पर समाचार पत्र 'मिड डे' से बातचीत में श्री अबू आज़मी ने कहा, “इस्लाम के अनुसार बलात्कार के दोषी को फांसी की सज़ा दी जानी चाहिए लेकिन इसके लिए महिलाओं को कुछ नहीं होता, सिर्फ़ पुरुषों को सज़ा दी जाती है. महिलाएं भी दोषी हैं”, साथ ही यह भी कहा कि- “भारत में अगर कोई मर्ज़ी से यौन संबंध बनाता है तो वो सही है. लेकिन अगर वही व्यक्ति आपकी शिकायत कर देता है तो वो एक समस्या है. आजकल ऐसे बहुत सारे मामले देखने में आ रहे हैं. जब कोई किसी लड़की को छूता है तो लड़कियां शिकायत कर देती हैं. अगर नहीं छूता तब भी शिकायत कर देती हैं. ये एक समस्या हो जाती है और पुरुष की इज्ज़त मिट्टी में मिल जाती है. इच्छा या अनिच्छा से, अगर बलात्कार होता है तो इस्लाम के अनुसार सज़ा मिलनी चाहिए.” अख़बार के अनुसार अबू आज़मी ने कहा, “इसका हल है कि अगर कोई महिला, चाहे वो शादीशुदा हो या नहीं, अगर किसी दूसरे पुरुष के कहे अनुसार चलती है तो उसे फांसी दे देनी चाहिए, चाहे इसमें उसकी मर्ज़ी शामिल हो या नहीं. दोनो को फांसी दे देनी चाहिए.”

स्पष्ट है कि श्री आज़मी की ये टिप्पणियाँ ना सिर्फ अत्यंत आपत्तिजनक हैं बल्कि सम्पूर्ण महिला समाज के प्रति एक राजनैतिक व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से किया गया आपराधिक कृत्य भी है. मैं स्वयं अपने व्यक्तिगत स्तर पर इससे प्रभावित हुई हूँ क्योंकि यद्यपि मेरे इस प्रकार के कोई विवाहेतर सम्बन्ध नहीं हैं पर यह एक नारी के रूप में मेरी व्यक्तिगत निजता का मामला है जिस पर श्री आज़मी अथवा किसी भी व्यक्ति को कुछ भी कहने, उस सम्बन्ध में लोगों को आपराधिक कार्य के लिए उत्प्रेरित करने, विधि के विरुद्ध लोगों की भावनाएं भड़काने और मेरी तथा सभी हिन्दुस्तानी औरतों की निजता को सार्वजनिक रूप से हरने, मेरे सहित हम सभी महिलाओं को व्यक्तिगत मामलों, व्यक्तिगत फैसलों और व्यक्तिगत अभिरुचि के विरुद्ध बलात एक ख़ास प्रकार से आचरण करने को मजबूर करने और ऐसा नहीं करने पर हमें हिंसा और मृत्यु की सीधी धमकी देने का यह अत्यंत ही निंदनीय और स्पष्टतया आपराधिक कार्य है जिस के सम्बन्ध में मैं एक नारी के रूप में कभी भी चुपचाप नहीं रह सकती.

साथ ही इच्छा अथवा अनिच्छा के बाद भी किसी महिला से बलात्कार होने के बाद उस महिला को ही फांसी दिए जाने का उनका बयान भी उतना ही आपत्तिजनक है और सीधे-सीधे एक महिला के रूप में मेरे अधिकारों, मेरी स्थिति और मेरे जीवन और सुरक्षा पर खतरा है जिससे प्रभावित हो कर कोई भी व्यक्ति मेरे अथवा किसी भी महिला के साथ कोई भी अवांछनीय हरकत कर सकता है और बाद में लोगों को उन्मादित कर के इस बयान का गलत उपयोग कर सकता है.

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि श्री आज़मी के बयान मात्र आपत्तिजनक नहीं हैं, ये मुझे एक नारी के रूप में क़ानून द्वारा प्रदत्त अधिकारों का हनन करते हुए एक नारी के रूप में मुझे जीवन का खतरा उत्पन्न करने और मेरे प्रति हिंसक आपराधिक कृत्य हेतु लोगों को उकसाने का सीधा-सीधा आपराधिक कार्य है.

कृपया ज्ञातव्य हो कि श्री आज़मी ने यह बयान निर्वाचन के दौरान दिया है. अतः मैं व्यक्तिगत रूप से इस प्रभावित होने के कारण, एक नारी होने के कारण और एक प्रबुद्ध सामाजिक कार्यकर्ता होने के कारण आपसे यह निवेदन करती हूँ निर्वाचन आयोग द्वारा तत्काल इस प्रकरण में एफआइआर दर्ज किये जाने के आदेश दिए जाएँ. साथ ही श्री आज़मी को इस प्रकार देश के क़ानून का खुला माखौल उड़ाने और सरेआम आपराधिक कार्यों के लिए लोगों को उकसाने के लिए चुनाव लड़ने से भी तत्काल रोका जाए.

यह भी निवेदन करती हूँ कि यदि तीन दिन में आपके स्तर से अपेक्षित कार्यवाही नहीं होती है तो मैं दिनांक 15/04/2014 को इस सम्बन्ध में मा० न्यायालय का शरण लूंगी और श्री आज़मी के विरुद्ध नियमानुसार आवश्यक विधिक और आपराधिक कार्यवाही किये जाने की मांग के अतिरिक्त स्वयं आयोग की भूमिका के सम्बन्ध में भी प्रश्न उठाऊंगी.

पत्र संख्या-  NT/NCW/Abu/01
दिनांक-  12/04/2014               
डॉ नूतन ठाकुर
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525

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