अब आप सीएम हैं, आयकर अधिकारी की मानसिकता से बाहर आइए

अरविन्द 'हलफनामा स्कैम' को डायवर्ट करने के लिए लोग अब अन्य मुख्यमंत्रियों के निवास की बात कर करके अरविन्द को क्लीन चिट देना चाहते हैं. 'आन्तरिक लोकपाल' मानो नए-नए रूपों में प्रकट हो रहा है. ऐसे आदेशपालों से साफ़ कहिये की शाखामृग की तरह इधर-उधर उछलने से नहीं काम चलेगा. यहाँ सवाल बंगले की भव्यता का नहीं बल्कि हलफनामे के उल्लंघन का है जो कानूनन भी दंडनीय है. कार्य की प्रकृति के अनुसार इमारतों में रहना कोई बुरी बात नहीं है. महात्मा गांधी दिल्ली के बिरला हाउस में रुकते थे. शायद वो दिल्ली की उस समय सबसे भव्य इमारत रही होगी. निधन भी उनका वहीं हुआ. तो क्या इससे गांधी की सादगी पर कभी सवाल पैदा हुआ? सवाल सादगी या भव्यता का नहीं बल्कि झूठ और धोखाधड़ी का है. गलत हलफनामा देकर लोगों को गुमराह करने का है.
 
जब आप सादगी जैसी पवित्र चीज़ को नगरवधू बना कर बेचने निकलेंगे. उसे स्वामी श्रद्धानन्द मार्ग पर सज़ा-सवांर कर खडा कर देंगे तो लोग 'छिद्रान्वेषण' करेंगे ही. मीडिया और जनता के दबाव में डुप्लेक्स वापस कर आप अपराध से मुक्त नहीं हो सकते. ऐसे तो राजा और कनिमोझी भी दूध के धुले माने जायेंगे क्यूंकि आपके सहयोगी कांग्रेस सरकार को टू जी के सभी 122 लाइसेंस केंसिल करने पड़े. ऐसे में तो मनमोहन सिंह भी इमानदार हो जायेंगे जिन्हें अंततः कई कोल ब्लोक्स के आवंटन रद्द कने पड़े हैं. ऐसे तो हर चोर मुक्त हो जायेगा अगर पकड़े जाने पर अपने चोरी का सामान छोड़ दे तो. ऐसा नहीं होता अरविन्द जी.
 
अब आप सीएम हैं. आयकर अधिकारी की मानसिकता से बाहर आइये. जिस तरह रिश्वत नहीं देने वाले सभी लोग आयकर वालों की नजर में चोर ही समझे जाते हैं वैसे ही आप भी वोट नहीं देने वाले हर व्यक्ति को बे-ईमान मान बैठे हैं. अपनी इस सोच पर लगाम लगाइए और अपनी नयी नौकरी बजाइए. बहुत हो गया ताम-झाम. कुछ काम भी कीजिये अब. आप कोई आसमान से नहीं टपक गए हैं. बड़ा देश है भारत. आप जैसे सैकड़ों आये और गए. मुगालता दूर कीजिये अपना.
 
पत्रकार और बीजेपी नेता पंकज झा के फेसबुक वाल से

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