अब तक पता नहीं कर पाई पुलिस, जेडे को किसने मारा और क्‍यों मारा?

 

मुंबई। मुंबई में मशहूर पत्रकार ज्योतिर्मय डे की एक साल पहले हत्या कर दी गई थी। उनकी हत्‍या हुए एक साल बीत चुका है। मगर अभी तक पुलिस कत्ल का मकसद तक पता नहीं कर पाई है। पुलिस सारे पहलू खंगाल चुकी है। एक दर्जन आरोपी गिरफ्त में हैं। अब नजर फॉरेंसिक रिपोर्ट पर है। पत्रकार जिग्ना वोरा के फोन और लैपटॉप की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। मगर मुंबई पुलिस को इस रिपोर्ट से कुछ खास मिलता नजर नहीं आ रहा है। वहीं गूगल ने भी जिग्ना के एकाउंट और डिलीट की गई ईमेल को खंगालने की इजाजत दे दी है।
 
मालूम हो कि 11 जून 2011 को करीब 3 बजे मशहूर पत्रकार जे डे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। तब से लेकर अब तक पुलिस इस मामले में कुल 12 लोगों को गिरफ्त में ले चुकी है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल कर चुकी है। पुलिस रिवॉल्वर बरामद कर चुकी है, जिससे कत्ल हुआ था। जे डे को मारी गई गोलियों के पांचों खोखे भी पुलिस के पास है। वो 20 गोलियां भी पुलिस के कब्जे में हैं जो इस्तेमाल नहीं की गई। गोलियां दागने वाला सतीश कालिया और उसके 6 साथी भी पुलिस की गिरफ्त में हैं। इसके अलावा पिछले साल 3 दिसंबर को पुलिस अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन समेत 9 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। मगर पुलिस आरोपों को साबित करने में फिलहाल नाकाम है।
 
मुंबई पुलिस अब तक हत्या का मकसद बता पाने में नाकाम है। पुलिस के मुताबिक जे डे मर्डर की सूत्रधार महिला पत्रकार जिग्ना वोरा है। जिग्ना पर आरोप है कि उसी ने अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के साथ मिलकर जे डे का कत्ल करवाया। जिग्ना फिलहाल मुंबई की बाइकुला जेल में बंद है। मगर जिग्ना ने ऐसा क्या किसी रंजिश के चलते किया या फिर वजह कुछ और है। इस बारे में पुलिस साफ नहीं है। लिहाजा पुलिस जिग्ना के 7 मोबाइल फोन, कुछ सिम कार्ड, एक लैपटॉप, कुछ मेमोरी कार्ड और वो कंप्यूटर जब्त कर चुकी है।
 
मुंबई पुलिस इस केस से जुड़े करीब-करीब हर पहलू और सबूतों को खंगाल चुकी है। अब मुंबई पुलिस की नजर टिकी है एफएसएल रिपोर्ट पर। ये पुलिस की आखिरी उम्मीद है। जिग्ना से बरामद किए गए मोबाइल फोन, सिमकार्ड, मैमोरी कार्ड और कंप्यूटर की जांच का जिम्मा कलिना फॉरेंसिक साइंस लैब के पास है तो क्या फॉरेंसिक लैब की इस रिपोर्ट के बाद जे डे के कत्ल का रहस्य खुल जाएगा?
 
इसी साल फरवरी में जब पुलिस ने जिग्ना के खिलाफ 1471 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी उस वक्त पुलिस को उम्मीद थी कि फॉरेंसिक रिपोर्ट से काफी नए सबूत मिलेंगे, लेकिन अब पुलिस को लगता है कि अगर जब्त किए गए फोन और कंप्यूटर के जरिए आरोपी ने किसी तरह का संपर्क किया भी होगा तो हो सकता है उसने वो सारे सबूत मिटा दिए होंगे। जिससे वो मुश्किल में पड़ती। इसके अलावा पुलिस के पास छोटा राजन और बाकि आरोपियों के बीच हुई बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट तो है। मगर राजन और जिग्ना के बीच बातचीत की ट्रांसक्रिप्ट नहीं है।
 
नाउम्मीद मुंबई पुलिस में गूगल ने नई उम्मीद जगाई है। गूगल क्राइम ब्रांच को जिग्ना के उन जीमेल अकाउंट और ईमेल खंगालने देने के लिए राजी हो चुकी है जो डिलीट की जा चुकी थी। इससे पहले दिसंबर में जब मुंबई पुलिस ने गूगल से इसके लिए इजाजत मांगी थी तो कंपनी ने अमेरिकी कानूनों का हवाला देते हुए इनकार कर दिया था। गूगल के इनकार के बाद पुलिस ने लेटर रेगोटरी यानी आईआर दाखिल किया था। जिसके बाद कंपनी जानकारी देने के लिए राजी हुई है, छोटा राजन और जिग्ना के बीच हुई बातचीत हत्या के मकसद के लिए काफी अहम है। लिहाजा गूगल की ये सहमति पुलिस के लिए अहम साबित हो सकती है।
 
मालूम हो कि जिग्ना वोरा कभी जे डे के साथ काम करती थी। बताया जाता है कि जे डे ने ही जिग्ना को पत्रकारिता के हर पहलू से रूबरू कराया था। क्योंकि जे डे क्राइम के मशहूर पत्रकार थे लिहाजा अंडरवर्ल्ड की अहम जानकारियां उनके पास रहती थी। ऐसे में उन्होंने अपने ये गुर जिग्ना को भी बताए। मगर अब इस कत्ल के सिलसिले में मुंबई पुलिस के रडार पर जिग्ना है। वो उसे इस कत्ल की सूत्रधार मानती है। साभार : आईबीएन

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