मुंबई प्रेस क्लब की ओर से 22 सदस्यों की एक टीम पाकिस्तान के ऐतिहासिक दौरे से सोमवार, 21 नवंबर, 2011 को दोनों देशों के बीच अमन व शांति का पैगाम देकर मुंबई वापस लौट आई है। इस दौरान मुंबई के पत्रकारों ने पाकिस्तान के पत्रकारों, राजनीतिज्ञों, समाजसेवकों, शिक्षिविदों, आदि के बीच परस्पर संवाद किए और भारत पाकिस्तान के बीच किस प्रकार अमन व शांति स्थापित हो, किस प्रकार शिक्षा पद्ध्ति में बदलाव लाया जाए, दोनों देशों के बीच उत्पन्न होने वाले भ्रम को कैसे दूर किया जाए और दोनों देशों के बीच वीजा की संख्या बढ़ाकर आवाजाही को सामान्य बनाया जाए, इन सारे मुद्दों पर चर्चा हुई। करांची प्रेस क्लब और मुंबई प्रेस क्लब के बीच वार्ता के दौरान इस बात पर सहमति हुई कि दोनों देशों की मीडिया की भाषा शालीन हो और बढ़ाचढ़ाकर हिंसात्मक रिपोर्ट प्रकाशित न किया जाए।
पत्रकारों का मत था कि दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते को मधुर बनाने में मीडिया महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। पाकिस्तान में इस समय भारत के मात्र दो ही पत्रकारों (दि हिन्दु और पीटीआई) को रिपोर्टिंग करने के लिए अनुमति है जिसकी संख्या बढ़ाए जाने पर भी जोर दिया गया। ऐसा माना जा रहा है कि जब खबरें इकट्ठा नहीं होंगी तब विविधता कहां देखने को मिलेगी। दौरे से लौटे क्लब के एक सदस्य का मानना है कि दोनों देश के आम आदमी में खासकर युवा पीढ़ी में एक दूसरे की सामाजिक, सांस्कृतिक, शैक्षिक, आर्थिक, राजनीतिक जानकारियों का अभाव है इस कारण दोनों देश के नागरिकों में तरह तरह के भ्रम फैल रहे हैं।
गौरतलब है कि मुंबई प्रेस क्लब के 22 सदस्यों की एक टीम भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जयंती के अवसर पर सोमवार, 14 नवंबर, 2011 को पाकिस्तान के लिए रवाना हुई थी जिसमें मुंबई से प्रकाशित विविध भाषाओं के दैनिक समाचारपत्र व टीवी समाचार चैनलों के वरिष्ठ पत्रकार और फोटो पत्रकार शामिल थे। कई महीने पहले करांची प्रेस क्लब की ओर से मुंबई प्रेस क्लब के सदस्यों को आमंत्रित किया गया था जिसके तहत यह संभव हो पाया।
यह पहला अवसर था जब मुंबई ही नहीं बल्कि भारत से पत्रकारों की टीम पाकिस्तान के करांची और हैदराबाद के दौरे पर गई थी। जिस प्रकार मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है उसी प्रकार करांची भी पाकिस्तान का आर्थिक गढ़ है। मुंबई और करांची में कई प्रकार की समानताएं हैं, ऐसे में दोनों देशों के पत्रकारों के बीच मेल-मिलाप और शांति स्थापित करने का एक सार्थक पहल संभव हो पाया। पत्रकारों ने दक्षिण एशिया के लोगों के साथ प्रेम बढ़ाने के लिए सार्क के मुद्दे पर एक राउंड टेबल वार्ता भी की जिसमें सिंध के राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री उपस्थित थे। टीम ने विभिन्न मीडिया हाउसों जैसे दैनिक जंग, द न्यूज, जीओ टीवी, अवामी आवाज, डेली बिजनेस रिकार्डर और डॉन के कार्यालय में जाकर पत्रकारों के साथ विचार विमर्श किया। साथ ही, करांची चेंबर ऑफ कामर्स एण्ड इंडस्ट्री, करांची यूनिवर्सिटी, नेशनल म्युजियम मोहत्ता पैलेस सहित सामाजिक कार्यकर्ताओं, व्यवसाइयों, प्रकाशकों, आदि से मिले। दौरे में पाकिस्तान के विभिन्न स्थलों के साथ-साथ, करांची प्रेस क्लब और हैदराबाद प्रेस क्लब का दौरा भी शामिल था।
मुंबई प्रेस क्लब के अध्यक्ष गुरबीर सिंह के मुताबिक पत्रकारों का यह दौरा अपने आप में अनोखा और ऐतिहासिक था। इस दौरे से मुंबई के पत्रकारों को पाकिस्तान के बारे में जानने और समझने का अवसर मिला। क्लब के सचिव सुनील शिवदासानी के मुताबिक कई महीने के प्रयास के बाद यह सफलता मिली और इसके जरिए दोनों देश के पत्रकारों को एक दूसरे के बीच संवाद करने का मौका मिला। बहुत जल्द करांची प्रेस क्लब के सदस्यों को भी मुंबई में आमंत्रित किए जाने की योजना है।
पत्रकारों की टीम में प्रेस क्लब के चेअरमैन प्रकाश आकोलकर(राजनीतिक संपादक, सकाल ग्रुप), वरिष्ठ पत्रकार जतिन देसाई, मृत्युंजय बोस (सहायक संपादक, सकाल टाइम्स), ओम प्रकाश तिवारी (विशेष संवाददाता, दैनिक जागरण), सारंग दर्शने (सहायक संपादक, महाराष्ट्र टाइम्स), नरेश कामथ (विशेष संवाददाता, हिन्दुस्तान टाइम्स), फौजान हुसैन (स्वतंत्र फोटोग्राफर), धवल कुलकर्णी (विशेष संवाददाता, इंडियन एक्सप्रेस), हरीश नाम्बियार (फाइलर, रायटर्स), ज्योति शेलार(प्रधान संवाददाता, मुंबई मिरर), सुरेंद्र गंगण(विशेष संवाददाता, डीएनए), विनोद महंत(वरिष्ठ संपादक, इकॉनॉमिक टाइम्स), डी.के. रायकर(ग्रुप संपादक, लोकमत), नरेश फर्नांडिस(संपादक, टाइम आऊट), योगेश नाईक (विशेष संवाददाता, मुंबई मिरर), लीला पी सोलोमन (सहायक संपादक, इकॉनॉमिक एण्ड पॉलिटिकल वीकली), अनाहिता मुखर्जी (विशेष संवाददाता, टाइम्स ऑफ इंडिया), बंदा एन कुमार (सीईओ, काँसेप्ट पीआर), कमलेश सुतार (विशेष संवाददाता, हेडलाइंस टुडे/आजतक), शालिनी नायर (विशेष संवाददाता, इंडियन एक्सप्रेस), चारुहास साटम (निदेशक-कार्पोरेट अफेयर्स, वेल्यूएबल ग्रुप ऑफ कंपनीज), मीना मेनन (उपसंपादक, दि हिन्दू) शामिल थे।
मुंबई से आफताब आलम की रिपोर्ट





