अमरपाल सिंह वर्मा का राजस्थान पत्रिका से इस्तीफा

 

राजस्थान पत्रिका के जयपुर मुख्यालय में मुख्य उप संपादक अमरपाल सिंह वर्मा ने आज राजस्थान पत्रिका से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने पत्रिका के प्रबंध निदेशक नीहार कोठारी को भेजे त्यागपत्र में इस्तीफे के लिए डिप्टी एडिटर भुवनेश जैन को जिम्मेदार ठहराया है। वर्मा का कहना है कि अपने खिलाफ पत्रिका प्रबंधन तक पहुंचे किसी पत्र को लेकर भुवनेश जैन उनसे कई सालों से नाराज थे और परेशान कर रहे थे। 
 
वर्मा के आग्रह पर पत्रिका के प्रबंध निदेशक नीहार कोठारी ने उनका तबादला साल भर पहले नागौर से हनुमानगढ़ किया लेकिन फिर छह माह बीतने से पहले ही उन्हें हनुमानगढ़ से जयपुर में स्पेशल ब्यूरो में भेज दिया गया। वहां अभी छह महीने बीतते, इससे पहले वर्मा का तबादला चेन्नई कर दिया गया। वह भी तब, जब अमरपाल सिंह वर्मा अपने पारिवारिक कारणों से श्रीगंगानगर संस्करण में जाना चाह रहे थे। हालांकि चेन्नई में वर्मा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने की बात कही जा रही है, लेकिन वर्मा इसे परेशान करने की नीयत मानते हैं। जानकारों का कहना है कि वर्मा के चेन्नई तबादले के पीछे भुवनेश जैन की रणनीति है। इससे पहले उन्होंने २००७ में वर्मा को कोलकाता का प्रबंधक और संपादक बनाने के नाम पर निपटाने की ठान ली थी, लेकिन नीहार कोठारी के हस्तक्षेप से उन्हें जोधपुर ही बनाए रखा गया। 
 
राजस्थान पत्रिका की ओर से दिए जाने वाले करीब एक दर्जन संस्करण व राज्य स्तरीय पत्रकारिता पुरस्कार, पंचायती राज में महिलाओं की भूमिका पर बेस्ट रिपोर्टिंग के लिए दी हंगर प्रोजेक्ट संस्था की ओर से वर्ष 2009 में सरोजिनी नायडु पुरस्कार, वर्ष 2003 में दी स्टेट्समैन, कोलकाता की ओर से दी स्टेट्समैन अवार्ड फॉर रूरल रिपोर्टिंग, वर्ष 2009 में समान बचपन संस्था, उदयपुर की ओर से राज्य स्तरीय पत्रकारिता पुरस्कार, वर्ष 2001 में दी एटवरटाइजिंग क्लब  जयपुर की ओर से बेस्ट रिपोर्टिंग का प्रथम पुरस्कार, वर्ष 2004 में उदयन स्मृति राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान, वर्ष 2005 में ग्राम गदर ग्रामीण पत्रकारिता पुरस्कार, वर्ष 2005 में राजस्थान जनमंच, जयपुर की ओर समाज रत्न अवार्ड सहित कई अन्य पुरस्कार प्राप्त कर चुके अमरपाल सिंह वर्मा अब स्वतंत्र पत्रकार के रूप में विकास पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखने जा रहे हैं। वर्मा द्वारा नीहार कोठारी को लिखा गया पत्र इस प्रकार है:


आदरणीय महोदय,

 
सादर नमस्कार। मैं राजस्थान पत्रिका में कार्य करने में असमर्थ हूं। इसलिए त्यागपत्र दे रहा हूं। कृपया त्यागपत्र स्वीकार कर मेरा भुगतान कराने की व्यवस्था कराएं। मैं वैसे तो अक्टूबर, १९८८ से ३० जुलाई, २०१२ तक पत्रिका से जुड़ा रहा हूं लेकिन एक जनवरी, २००१ से ३० जुलाई, २०१२ तक मैनें नियमित वेतनभोगी के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। इसलिए अगर मेरी नियमित सेवा अवधि के दौरान की किसी तिथि से किसी भी वेतन आयोग की सिफारिशें भविष्य में संस्थान में लागू की जाती हैं तो मुझे उस अवधि के एरियर का भुगतान कराना सुनिश्चित कराएं। मेरें त्यागपत्र के पीछे की परिस्थितियों के लिए कौन जिम्मेदार है, यह आप बेहतर जानते हैं। डिप्टी एडिटर श्री भुवनेश जैन वर्ष २००७ से मुझे बार-बार व्यक्तिगत और टेलीफोन पर यह कहते रहे हैं कि तुमने मेरे खिलाफ नीहार जी को पत्र लिखा। मैं तुम्हें चैन से बैठने नहीं दूंगा। इस तथाकथित पत्र को लेकर वे मुझे परेशान करते रहे हैं। पता नहीं किसने कोई पत्र आपको लिख दिया, जिस आधार पर शायद प्रबंधन ने भुवनेश जी को खासी लताड़ पिला दी लगती है। किसी और के किए का खामियाजा मुझे भुगतना पड़ता रहा।
 
महोदय, पत्रिका में अकेला मैं ही नहीं हूं, पता नहीं कितने लोग हैं, जो इनकी मनमानी का शिकार हो रहे हैं। पत्रिका का प्रत्येक प्रतिभावान और समर्पित कर्मचारी इन लोगों के कारण परेशान है। ये अपने चहेते लोगों को पदोन्नति और वित्तीय लाभ देकर लाभान्वित करते हैं और दूसरों को प्रताड़ित करते हैं। आज भुवनेश जैन संस्थान के सबसे बड़े हितैषी बने हैं, अगर ऐसा था तो वे २००३ में दैनिक भास्कर की गोद में क्यों चले गए थे। आज इनके मुंह से पत्रिका के प्रति समर्पण की बातें सुन कर हर किसी को हंसी आती है। समर्पण की बातें भी तब, जब ये चर्चा जोरों पर है कि अब ये फिर पत्रिका छोड़ किसी इलेक्ट्रोनिक चैनल या किसी नए अखबार में जाने की तैयारी में हैं। खैर, इन जैसे लोग तो आनी-जानी माया हैं।
 
राजस्थान पत्रिका में कामकाज के दौरान मुझे अपार प्रतिष्ठा हासिल हुई है। श्रद्देय गुलाब जी साहब ने मुझे प्रदेश भर में काम करने का मौका दिया और उनकी प्रेरणा और आशीर्वाद से मुझे राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर के दर्जनों पुरस्कार भी मिले। उसके लिए मैं श्रद्देय गुलाब जी साहब और आपका शुक्रगुजार हूं। श्रीमान गोविंद जी चतुर्वेदी का भी मैं आभारी हूं, जिन्होंने मेरे द्वारा भेजी गई कार्य योजनाओं को संस्थान में क्रियान्वित करा कर सदैव मुझे प्रोत्साहन दिया। संस्थान निरंतर प्रगति करे, यह आपकी शुभ कामना है। सादर अभिवादन सहित।
 
अमरपाल सिंह वर्मा
 
मुख्य उप संपादक
 
राजस्थान पत्रिका।

 

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