अमर उजाला वालों ने गंगा की सफाई के लिए श्रमदान किया, संपादक ने माफी मांगी

'चले थे हरि भजन को ओटन लगे कपास' रविवार को ऐसा ही कुछ अमर उजाला के कर्मचारियों के साथ हुआ. अमर उजाला का सर्कुलेशन पिछले कुछ दिनों में काफी गिर गया है. इसी का असर है कि अमर उजाला ने अपने अखबार की कीमत कुछ दिनों को दो रुपये कर दी है. इसका कारण माना जा रहा है कि अमर उजाला में ऐसे हालात  जानबूझकर पैदा किए जा रहे हैं ताकि ये लगे कि डा. तीरविजय सिंह के कार्यकाल में अखबार ने काफी तरक्‍की की परन्‍तु अब उनके तबादले के बाद से अखबार के दिन खराब हो चले हैं.

वैसे भी गंगा अभियान को लेकर बनारस में पिछले काफी समय से गहमागहमी है. दैनिक जागरण ने गंगा अभियान को लेकर कई खबरें प्रकाशित कीं, जिसका उसको फायदा मिला. इसके बाद हिंदुस्‍तान भी जागरण की बनाई लकीर पर चला और गंगा अभियान से जुड़ी कई खबरें प्रकाशित कीं. इन दोनों अखबारों को इसका फायदा मिला तथा सर्कुलेशन में भी आंशिक बढ़ोत्‍तरी हुई. परन्‍तु इस मामले में अमर उजाला पिछड़ गया था. लिहाजा अमर उजाला सोची समझी रणनीति के तहत श्रमदान करने की योजना तैयार की.

इसके लिए अमर उजाला के सभी कर्मचारियों को सख्‍त हिदायत दी गई थी कि सभी लोग सुबह दशाश्‍वमेध घाट पहुंच जाएंगे. अमर उजाला का कार्यक्रम था तो कुछ अधिकारी भी आमंत्रित किए गए थे. इसी बीच जब स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी मौके पर पहुंचे तो कुछ लोग उनका विरोध करने लगे तथा गंगा के किनारे पड़े माला पहनाने लगे. तब अमर उजाला के पत्रकार राजेश यादव एवं जनार्दन सिंह ने लोगों को हटाने बढ़ाने लगे.

इसी बीच गंगा को लेकर लम्‍बे समय से आंदोलन कर रहे अविमुक्‍तेश्‍वरानंद जनार्दन सिंह पर भड़क गए और कहने लगे कि अमर उजाला के लोग यहां आकर नाटक कर रहे हैं. अगर नाटक करना हो तो यहां से जाइए. खैर, इसके बाद संपादक डा. तीर विजय सिंह ने मंच से लोगों से माफी मांगी. हालांकि बताया जा रहा है कि बाबाजी के भड़कने का कारण कुछ और था. गंगा सफाई अभियान को लेकर भविष्‍य में आने वाले फंड को लेकर एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ है. यानी गंगा की सफाई से ज्‍यादा धन की सफाई की योजना एनजीओ के माध्‍यमों से तैयार की जा रही है. जय हो गंगा मइया.

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