अमर उजाला से इस्‍तीफा देकर जागरण पहुंचे रमाशरण

अमर उजाला, लखनऊ में उत्‍पीड़न के चलते कर्मचारियों का संस्‍थान से मोहभंग हो रहा है. लखनऊ यूनिट तथा स्‍टेट ब्‍यूरो में काम कर रहे लोग यहां की परिस्थितियों से परेशान होकर दूसरे अखबारों में कम पैसों पर भी जाने को तैयार हैं. अमर उजाला की सबसे फिसड्डी यूनिट की रेटिंग पा चुके लखनऊ एडिशन का ग्राफ लगातार नीचे की तरफ गिरता चला जा रहा है. कुछ समय पहले जहां जहां बदलाव किए गए वहां का सर्कुलेशन प्रभावित हुआ है. वहीं फैजाबाद से लखनऊ अटैच किए गए रमाशरण ने भी इस्‍तीफा दे दिया है.

कुछ समय पहले बहराइच से अशोक उपाध्‍याय को हटाकर सेकेंड मैन अतुल पांडेय को जिले की जिम्‍मेदारी सौंपी गई. अशोक के आने के बाद बहराइच में सर्कुलेशन प्रभावित होता जा रहा है. इसी तरह केपी तिवारी को बाराबंकी से हटाकर लखनऊ अटैच कर दिया गया. उनकी जगह इंदुभूषण पांडेय को बाराबंकी भेजा गया, अब हाल यह है कि अमर उजाला इस जिले में पिछड़ता जा रहा है. लगातार इसका सर्कुलेशन कम हो रहा है. जागरण और हिंदुस्‍तान जैसे प्रतिद्वंद्वी अखबार अमर उजाला से काफी आगे निकल गए हैं.

ऐसा ही हाल फैजाबाद का है. लेकिन फैजाबाद में हालात अन्‍य जिलों से थोड़े बेहतर हैं. रमाशरण को हटाकर सेकेंडमैन रहे राजेंद्र पांडेय को जिले का प्रभार सौंपा गया. रमाशरण को लखनऊ से अटैच कर दिया गया. इस बदलाव से रमाशरण काफी आहत थे. उन्‍हें बिना कारण ही फैजाबाद से लखनऊ अटैच कर दिया गया था. तीन दिनों पूर्व ही रमाशरण ने अमर उजाला से इस्‍तीफा देकर लखनऊ में ही दैनिक जागरण ज्‍वाइन कर लिया है. संभावना है कि अमर उजाला के कुछ और कर्मचारी भी दूसरे अखबारों के प्रबंधन के संपर्क में हैं तथा अपने लिए नए ठिकाने तलाश रहे हैं.

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