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अमर उजाला से रिटायर हुए वरिष्‍ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्‍ल

वरिष्‍ठ पत्रकार तथा अमर उजाला, मेरठ के संपादक रहे शंभूनाथ शुक्‍ला गुरुवार को रिटायर हो गए. उन्‍हें नोएडा स्थित कार्यालय में धूमधाम से विदाई दी गई. कुछ समय पहले ही प्रबंधन ने उन्‍हें मेरठ से नोएडा बुलाया था. वे पूरे साढ़े तीन दशक तक पत्रकारिता करते रहे और युवाओं के सामने हर रोज नई मिसाल पेश करते रहे. उन्‍होंने अपना करियर कानपुर में दैनिक जागरण से की. वे 19 साल तक जनसत्‍ता में कार्यरत रहे. चंडीगढ़ एवं कोलकाता के संपादक रहे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद पिछले 11 सालों से अमर उजाला को अपनी सेवाएं दे रहे थे. उन्‍होंने अपने विदाई समारोह तथा जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को फेसबुक पर लोगों से शेयर किया है.

वरिष्‍ठ पत्रकार तथा अमर उजाला, मेरठ के संपादक रहे शंभूनाथ शुक्‍ला गुरुवार को रिटायर हो गए. उन्‍हें नोएडा स्थित कार्यालय में धूमधाम से विदाई दी गई. कुछ समय पहले ही प्रबंधन ने उन्‍हें मेरठ से नोएडा बुलाया था. वे पूरे साढ़े तीन दशक तक पत्रकारिता करते रहे और युवाओं के सामने हर रोज नई मिसाल पेश करते रहे. उन्‍होंने अपना करियर कानपुर में दैनिक जागरण से की. वे 19 साल तक जनसत्‍ता में कार्यरत रहे. चंडीगढ़ एवं कोलकाता के संपादक रहे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद पिछले 11 सालों से अमर उजाला को अपनी सेवाएं दे रहे थे. उन्‍होंने अपने विदाई समारोह तथा जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं को फेसबुक पर लोगों से शेयर किया है.

Shambhunath Shukla : आज जीवन के ५८ साल पूरे कर लिए। पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है कि हर समय कल से आज बेहतर रहा और आज से आने वाला कल। अतीत को ढोना गधे की तरह बोझ ढोना ही है। अतीत सिर्फ सबक लेने के लिए होता है। जिस घर और परिवार में पैदा हुआ वहां यह भरोसा तक नहीं था कि कल खाना भी बन पाएगा या नहीं। कहीं कोई सिफारिश नहीं, कहीं कोई कुछ बताने वाला नहीं। पूरे परिवार अथवा जानने वालों में कोई भी बड़ा आदमी नहीं। हर जगह लाइन लगाओ और नंबर आने पर पीछे धकेले जाओ। इसी माहौल ने लिखने और सोचने को विवश किया। अपनी हर पीड़ा को लिपिबद्ध किया और उससे सबक लिया। सीखने की इसी ललक के चलते मैं पत्रकार बन गया। पूरे ३५ साल तक अखबारों से जुड़ा रहा। शुरुआत कानपुर में दैनिक जागरण से की। तब वहां खुद नरेंद्र मोहन जी पत्रकारों की भर्तियां किया करते थे भले प्रशिक्षु के लिए हो या बड़े पदों के लिए। उन्होंने चयन किया और पूरे पांच साल वहां गुजारे। इसके बाद प्रभाष जी जनसत्ता में ले आए। १९ साल तक वहां रहा। जनसत्ता के कार्यकारी संपादक श्री ओम थानवी ने पहले चंडीगढ़ और फिर कोलकाता संस्करण का संपादक भी बनाया। इसके बाद के करीब ११ साल अमर उजाला में बिताए। यहां कानपुर, दिल्ली, लखनऊ के बाद मेरठ का संपादक रहा। आज वहां से अवकाश लिया तो विदाई समारोह में काफी भावुक हो गया। अमर उजाला में पहले स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी और उनके बाद मौजूदा प्रबंध निदेशक श्री राजुल माहेश्वरी से जो आत्मीयता और स्नेह मिला उन यादों ने मन भिगो दिया। खुद राजुल जी भी भावुक हो गए। अमर उजाला इसीलिए हिंदी पट्टी का सबसे सम्मानित और प्रतिष्ठित अखबार है क्योंकि वहां मालिक स्टाफ के लोगों का पूरा ख्याल रखते हैं।

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