अम्‍बेडकरनगर में बूंद-बूंद पानी को तरस रहा है वरिष्‍ठ पत्रकार एवं उनका परिवार

: समस्या निवारण के बजाय चौड़े पाइप और टुल्लू लगवाने की दी जाती है सलाह : मैं भारत, हिन्दुस्तान, आयावर्त, इण्डिया के बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के अम्बेडकरनगर जनपद का निवासी हूँ। पेशे से कलमकार (पत्रकार) हूँ और अम्बेडकरनगर जनपद के मुख्यालयी शहर अकबरपुर की मलिन बस्ती नं0 1 उसरहवा की नई बस्ती में रहता हूँ। मैं सीनियर सिटिजेन की श्रेणी में आ गया हूँ, लेकिन नगरीय सुविधाओं से ‘महरूम’ हूँ। पिछले वर्ष 2011 के दशहरा (अक्टूबर) से मेरे वैध कनेक्शन की वाटर सप्लाई पाइप लाइन में नगर पालिका अकबरपुर की पटेलनगर पानी की टंकी से पानी न आने से मेरा और मेरे परिवार का जीवन जल संकटग्रस्त हो गया है। हम सब बूँद-बूँद पानी को तरस रहे हैं। हालाँकि मेरी इस समस्या को निवर्तमान चेयरमैन, जलकल प्रभारी, ई.ओ. और नगर पालिका के अन्य कर्मी बखूबी जानते हैं, लेकिन वह लोग अपने में ही मस्त हैं।

चूँकि जल ही जीवन है- इसलिए नगर पालिका अकबरपुर का जलकल विभाग मेरा और मेरे परिवार का जीवन नष्ट करने पर उतारू है। मानव जीवन के लिए 70 से 80 फीसदी पानी की आवश्‍यकता होती है, शेष 20-30 प्रतिशत सॉलिड आहार- प्राणवायु आक्सीजन 100 फीसदी। भाइयों, बहनों आप को यह सब बताने का यह मतलब नहीं कि इसके बारे में आप नहीं जानते हैं। बहरहाल मुझे आभास हो रहा है कि मेरे दुश्मनों की यह चाल है और उनके इस षडयन्त्र में नगर पालिका, अकबरपुर के जलकल विभाग के लोग पूर्णतया सहभागी हैं। अकबरपुर नगर पालिका क्षेत्र के लोगों को सुबह-दोपहर शाम जलापूर्ति कराई जाती है। एक वर्ष पूर्व तो हम भी अपने भूतलीय आवास पर पानी की आपूर्ति का लाभ उठाते थे, परन्तु गत वर्ष से बूँद-बूँद पानी को तरस रहे हैं। 16वीं विधान सभा चुनाव के परिणाम के पूर्व हमारा जिला बसपा दुर्ग कहलाता था, दुर्ग तो ढह गया अब तो साइकिल चल रही है। हाथी ‘पीलखाने’ में आराम फरमा रहा है। हमने महसूस किया है कि हमारी हालत बसपा या फिर वर्तमान सपा शासन में एक समान ही है। त्रेतायुग में कैकेयी की निजी दासी मंथरा ने जो कहा था, वह अक्षरशः हम पर लागू हो रहा है। वही- ‘‘कोउ नृप होइ हमैं का हानी, चेरि छाँड़ि होबै ना रानी।’’

कहने को हम नगर में रहते हैं, लेकिन नगरीय सुविधाओं से वंचित हैं। हमारे शहर अकबरपुर की यह हालत है कि अजनबी लोग शहर की सड़क और गलियों में चल नहीं सकते हैं, हम लोग हैं तो हमारी मजबूरी है यहाँ रहना। नगर पालिका परिषद जब भंग नहीं थी, तब और अब प्रशासक के हाथों में नगरवासियों की डोर है तब भी नगरीय सुविधाओं के लिए जूझना पड़ रहा है हमें। नगरवासियों को चाहिए क्या- शुद्ध हवा, पानी और स्वच्छता (प्रमुख रूप से)। अकबरपुर में एक हम हैं हमें तीनों में से एक भी मयस्सर नहीं है। पहले से ही गन्दगी एवं सड़ान्ध में हमारा दम घुट रहा था, और मरने के कगार पर आ गये थे, इधर अक्टूबर 2011 से जलापूर्ति बाधा ने रही सही कसर पूरी कर दी। अब जल्द ही हमारा ‘रामनाम’ सत्य होने वाला है।

राम नाम सत्य पर याद आया, इस नगर पालिका के ई.ओ. प्रशासन श्री सीताराम जी हैं, जो ऐसे स्वभाव के हैं जैसे… क्या कहूँ बस इतना समझ लीजिए कि निवर्तमान चेयरमैन बसपा लीडर चन्द्रप्रकाश वर्मा तक श्री सीताराम जी से भय खाते रहे हैं। लोगों का कहना है कि श्री सीताराम जी की पहुँच बसपा सुप्रीमो तक होने की वजह से सपा सरकार के गठन के पूर्व तक नगर पालिका परिषद के चेयरमैन, सभासद और अन्य कर्मचारीगण ई.ओ. के नाम से काँप उठते थे। बहरहाल इनके बारे में क्या लिखूं, मुझसे भी फोन पर झड़पें कर चुके हैं, जिसे लिखना मेरी तौहीन होगी। इसलिए अपनी इज्जत अपने हाथ के दृष्टिगत सीताराम जी के बारे में कुछ नहीं लिखूँगा।

मैं जब भी पानी की किल्लत, जलापूर्ति बाधा के बारे में कहता तब-तब सीताराम जी यही कहते कि यह ‘प्रॉब्लम’ सिर्फ तुम्हारे यहाँ ही है, हम तो नित्य, नियमित जलापूर्ति करा रहे हैं, इस उत्तर के अलावा ई.ओ. जैसे जिम्मेदार नगर पालिका अधिकारी ने मेरी कथित व्यक्तिगत समस्या के समाधान के प्रति रूचि नहीं दिखाई। मैं कसम तो नहीं खाऊँगा, लेकिन ऊपर वाला गवाह है कि मैंने कभी भी नगर पालिका अकबरपुर के किसी अधिकारी/कर्मचारी के बारे में नकारात्मक लिखा हो, हालाँकि डीजल चोरी, सामानों, उपकरणों की खरीद में हेरा-फेरी, नॉन पापुलर समाचार-पत्रों में गोपनीय ढंग से लाखों करोड़ों का टेण्डर प्रकाशित कराकर ई.ओ. एण्ड कम्पनी मालामाल हो रही है, फिर भी सीताराम को दया तक नहीं आई कि एक वरिष्ठ कलमकार की समस्या का समाधान कराने के प्रति रूचि लें।

अकबरपुर नगर पालिका में लिपिक पद पर तैनात श्री रमाकान्त वर्मा अभियन्ता का पद रिक्त होने की वजह से जलकल प्रभारी हैं, जिनसे फोन पर सम्पर्क करने पर दो टूक जवाब मिलता है, देख नहीं रहे हो बिजली नहीं है, डीजल महँगा हो गया है, ऐसे में नगर में पानी की सप्लाई कैसे सम्भव है। जो मिल रहा है उसी में सन्तोष करो इसके आगे बात करने की सोचने वाले मूर्खता कर सकते हैं, क्योंकि अंगूर की बेटी के आगोश में पड़े वह कुछ भी अनाप-शनाप कह सकते हैं। वह निवर्तमान चेयरमैन के स्वजातीय होने का भरपूर लाभ उठाते रहे हैं।

अब आइए पटेलनगर/महानगर स्थित ओवर हेड टैंक एवं प्रेशर पम्प पर कार्यरत ऑपरेटर्स के बारे में भी कुछ बता दूँ। सर्वश्री इन्द्रजीत, राम अशीष वर्मा एवं दो आपातकालीन सेवा के लिए आपरेटर संजय एवं संदीप पटेलनगर की टंकी से सम्बद्ध इलाकों को जलापूर्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं। पहली बार जब पानी न मिलने की शिकायत किया तो श्री इन्द्रजीत आपरेटर ने अपने सहयोगी संदीप सिंह के साथ मेरे घर का मुआयना किया, पानी की एक बूँद तक नहीं टपक रही थी, अगल-बगल पता किया, अन्त में वह बोले कि देखो तुम्हारे मुहल्ले में टुल्लू पम्प से लोग पानी खींच ले रहे हैं, ऐसा करो तुम भी टुल्लू लगवा लो, और झंझट से मुक्ति पा जाओ, या फिर रमाकान्त वर्मा प्रभारी जलकल विभाग से कहकर अपने घर के वाटर सप्लाई का कनेक्शन मेन पाइप लाइन से ले लो। आधा इंच के स्थान पर पौन या एक इंच चौड़ी डायमीटर की पाइप लगवा लो।

एक बात और हम सब आपरेटर हैं, तुम्हे पानी मिले या न मिले हमारा काम नलकूप चलाकर टंकी भरना और निर्धारित समयानुसार पानी खोल देना है। श्री इन्द्रजीत नलकूप चालक (पटेलनगर टंकी) अकबरपुर ने मुझसे कहा कि तुम हम लोगों से शिकायत मत किया करो, अन्य सम्बन्धित नपाप कर्मचारियों/अधि0 से अपनी समस्या कहो। मैं कैसे मान लूँ कि तुम्हें पानी नहीं मिल रहा है, जबकि हम नियमित निर्धारित समय पर टंकी भरकर पूरे प्रेशर से वाटर सप्लाई देते हैं, टंकी के निकटवर्ती तीन मंजिला भवनों पर पानी पहुँच रहा है। दूसरी बात यह कि इस पटेलनगर टंकी से फैजाबाद रोड लाल ब्रदर्स तीन किमी दूरस्थ इलाकों में सप्लाई जाती है, वहाँ किसी को पानी न मिलने की शिकायत नहीं है। पता नहीं तुम ही बार-बार शिकायत करते हो। जाओ जैसा कहा है वैसा करवा लो समस्या का समाधान हो जाएगा। मैंने कहा भाई जी स्टेयरिंग की कुछ चूड़ियाँ थोड़ा खोल दिया करो तो हमें भी पानी मिल जाया करेगा, वह बोले तुम इतने बेवकूफ हो यह नहीं जानते कि ‘स्टियरिंग’ की चूड़ियाँ ज्यादा खुल जाएँगी तो इस टंकी से सम्बद्ध इलाकों की सभी पाइपें फट जाएँगी। जाओ भेजा मत चाटो जैसा कहा है वैसा करो।

यह नगर पालिका है, यहाँ तुम्हारे जैसों की कौन कहे अधिकारियों, माननीयों और गणमान्य लोगों की दर्जनों शिकायतें प्रतिदिन मिलती हैं, जलकल विभाग में शिकायतें अटेण्ड करने के लिए किसी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं हुई है। शिवलाल, हुबराज पुराने मिस्त्री हैं, उनसे हाथ-पैर जोड़ो देखो वो लोग जाएँ तो अपने घर के ‘कनेक्शन’ को ठीक करवा लो क्या समझे? बेहतर होगा कि टुल्लू तुम भी लगवा लो। आपरेटर की बात सुनकर मैं अपना सा मुँह लेकर रह गया..। श्री इन्द्रजीत नलकूप चालक पटेलनगर की स्पष्ट बातें सुनकर मैं एक तरह से संतुष्ट भी हो गया, फिर अपने और परिवार को पानी न मिलने को नियति मान बैठा। बीच-बीच में दूसरे नलकूप चालक श्री राम अशीष वर्मा जी से भी वार्ता करने पर कमोवेश इन्द्रजीत जैसी राय वह भी देते रहे।

अब कभी पटेलनगर ओवरहेड टैंक के स्टियरिंग, महानगर प्रेशर पम्प के मोटर र्स्टाटर में आई गड़बड़ियाँ भी ठीक कराने में हफ्ता-पन्द्रह दिन लग जा रहे हैं, तब ऐसे में वहाँ तैनात आपरेटर्स स्थानीय लोगों को जलापूर्ति करके अन्य सामान्य नागरिकों के विरोधी स्वरों को उठाने के पूर्व ही दबा लेते हैं। टुल्लू पम्प लगाकर नगर पालिका के जलकल विभाग का पानी खींच लेना, वाटर सप्लाई पाइप का निर्धारित मानक से अधिक चौड़ा लगवाना कहाँ तक जायज है। वैध-अवैध मुझ जैसे ‘डरपोक’ के लिए होता है। अब मैंने भी थक हार कर इन्द्रजीत एवं राम अशीष वर्मा (आपरेटर द्वय) की सलाह मानकर वैध-अवैध में बिना भेद किए टुल्लू पम्प लगवाने, चौड़ी पाइप से घर के वाटर कनेक्शन को मेन सप्लाई लाइन से जुड़वाने का मन बना लिया है।

अन्त में मुझे ई.ओ. सीताराम, जलकल प्रभारी रमाकान्त वर्मा, पटेलनगर टंकी पर तैनात आपरेटर्स इन्द्रजीत, राम आशीष, सन्दीप सिंह, और मिस्त्री शिवलाल, हुबराज से कोई शिकायत नहीं है। दोष तो हमारा है, जो अकबरपुर नगर क्षेत्र में विगत 40 वर्षों

भूपेंद्र सिंह
से आशियाना बना कर रह रहे हैं, और उसरहवा मोहसिनपुर, मंसूरपुर गाँव की मलिन बस्ती को नगर पालिका क्षेत्र में वर्ष 1975 में समाहित कराया। मैं अन्ना हजारे नहीं बन सकता वर्ना लाखों/करोड़ों डकारने वालों का वही हश्र होता, जो सरकारी योजनाओं में घपले-घोटाले करने वालों का हो रहा है। शेष फिर कभी..।

लेखक भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी अकबरपुर, अम्‍बेडकरनगर के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं. उनसे संपर्क मोबाइल नम्‍बर 09454908400 के जरिए किया जा सकता है.

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