अरे, पहले अपनी ब्याहता का तो उद्धार करो!

Om Thanvi : 2001, 2002, 2007 और 2012 के चार विधानसभा चुनावों के परचों में नरेंद्र मोदी इस तथ्य को छुपाते रहे कि शादीशुदा हैं। कल वड़ोदरा में लोकसभा की उम्मीदवारी का परचा भरते हुए उन्होंने घोषित कर दिया कि शादीशुदा हैं। पत्नी का नाम – जशोदाबेन। कानून के मुताबिक उम्मीदवार को पति-पत्नी दोनों की संपत्ति भी बतानी होती है। बरसों गुमनामी और अभावों भरी जिंदगी जीने वाली मोदी की ब्याहता जशोदाबेन चिमनलाल मोदी के पास होगा क्या?

मोदी ने नामांकन पत्र में कहा है कि उन्हें जशोदा की आय, आयकर या पैन के बारे में कोई जानकारी नहीं है। पता कैसे हो जब उसे साथ रखा नहीं, न उसकी परवाह की, बल्कि निरंतर विवाह के तथ्य तक को झुठलाते रहे। तो अब सच क्यों बोला गया है? सुनते हैं वकीलों की राय पर। दूसरे, शायद इसलिए कि "बहुत हो चुका अत्याचार, नारी का उद्धार, अबकी बार"! अरे, पहले अपनी ब्याहता का तो उद्धार करो! सौ रुपये महीने पर रजोसाणा गांव में ऐसे घर में किराए रहती थी जिसमें शौचालय तक नहीं था।

जनसत्ता के संपादक ओम थानवी के फेसबुक वॉल से.

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