अलीगढ़ में ‘के. न्यूज’ संवाददाता का आपराधिक इतिहास बता रहे हैं पत्रकार प्रवीण कुमार

सेवा में, संपादक महोदय भड़ास ४ मीडिया, आज मीडिया में अपराधीकरण खूब हो रहा है. अपराधी पत्रकार का चोल ओढ़ कर और पत्रकारिता की आड़ में पुलिस को ही धोंस दे रहे है. साथ ही इलाके में खूब वसूली कर रहे हैं. इसकी एक बानगी देखने को मिलेगी अलीगढ जिले में.

यहां तो मीडिया का कैमरा तोड़ने वाला व्यक्ति आज खुद कानपुर से प्रसारित  K न्यूज़, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड चैनल का संवाददाता बना हुआ है. इस युवक का नाम है अर्जुन देव वाश्न्ये। गांधीपार्क इलाके के दुवे पड़ाव निवासी अर्जुन देव पुत्र सहदेव नाम के व्यक्ति पर दिनाक १० अप्रैल  २००६ में देहली गेट थाने में मीडिया पर हमला करने, दंगा करने का नामजद आईपीसी १४७ / ४२७ / ३२३ जैसे संगीन धाराओ मुकदमा दर्ज है (arjun FIR 3  THANA DELAHIGET).

अर्जुन देव पुत्र सहदेव निवासी दुवे पड़ाव अलीगढ पर एक मात्र यही मुक़दमा नहीं है. बल्कि दिनाकं ६ अगस्त २००४ को गांधीपार्क थाने में आईपीसी १४७ / १४८/ ३२३/ ३३६/ ३०७/ ५०६ एससी एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज है (arjun FIR 2 GANDHIPARK THANA).

२३ मार्च २०११ में गांधीपार्क थाने में इनके खिलाफ आईपीसी की धारा 452, 323, 504, 506, 352 जैसी संगीन धाराओ में मुक़दमा दर्ज हुआ (arjun FIR 1 GANDHIPARK THANA). इसमें पुलिस ने आरोपी माना और आरोप पत्र (CHARJ SEET THANAGANDHI PARK) के आधार पर ये जेल गए. हालांकि कोर्ट ने इन्हें बीस हजार रुपये मुचलके पर जमानत पर इन्हें रिहा कर दिया गया ( COURT JAMANAT). यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है.

इतना ही नहीं अर्जुन के खिलाफ दर्जनों मामले लंबित हैं. बाबजूद इससे K न्यूज़  जैसे मीडिया संस्थान ने विवादित अर्जुन देव को अलीगढ का संवाददाता बना दिया।

हालांकि इससे पहले एक-दो माह ईटीवी उत्तर प्रदेश के अलीगढ संवाददाता अलोक सिंह ने इसे ईटीवी की माईक आईडी देकर अपना कैमरा मैन बनाये रखा. ईटीवी का खुद को पत्रकार बताकर अर्जुन देव ने  जमकर तांडव काटा , जिसकी शिकायत लोगों ने आलोक सिंह के साथ साथ एसएसपी अलीगढ और सूचना निदेशक तक से की . लेकिन आलोक सिंह की शह पर इन शिकायतों का कोई असर नहीं हुया बल्कि आलोक सिंह की शह पर प्रशासनिक अधिकारिओ  में भी अपना रुतबा जमाया जिससे इसकी शिकायतों पर कानूनी शिकंजा नहीं कस सके.

हाल ही में अर्जुन देव को K न्यूज़ ने अपना संवाददाता बना दिया है. के न्यूज़ की  माईक आईडी हाथ में आने के बाद तो इन दागी पत्रकार की दबंगई के चर्चे पूरे शहर में जोरो पर हैं. हालांकि इन चर्चो के बीच भी  खुद को शान से यह ईटीवी का पत्रकार बताने से नहीं चूकते।

…एक नजर अलीगढ में के. न्यूज़ के पत्रकार का आपराधिक इतिहास …।    

1. CJM CORT-2 me case no. 858/2011 ,mukadama 644/2011 IPC-452/323/504/506,thana Gandhipark aligarh.

2. CJM cort case no 685/2006 ,mukadama IPC 147/427/323 ,Thana dehaliget aligarh.

3. NCR no.58 date 18/6/2000, thana gandhipark IPC-323/504.

4. acm-2 case779/2011.

5. EK BANDOOK DBBL-69198-98

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इतने अपराधिक रिकार्ड के  बाद भी जिलाधिकारी महोदय को शास्त्र लाईसेंस के लिए आवेदन किया है, और पत्रकारिता की धोंस से पुलिस से भी सभी रिपोर्ट लगवा  ली गयी है. अब सवाल सही है कि क्या यही है मीडिया का असली चेहरा? क्या किसी को भी यूं पत्रकार बनाकर दूसरों के गिरेबान में झांकने का अधिकार दिया जा सकता है? क्या मीडिया संस्थान भी राजनीतिक दलों  की तरह अपराधी छवि के लोगों को अपनी माईक आईडी दे देगी? अब इसे मीडिया का चौथा स्तम्भ कहें या अपराध का खुला लाईसेंस.. (संपादक महोदय जन हित में उक्त्त प्रकरण को भड़ास पर जरूर जगह दे ताकि लोगो का उत्पीडन न हो).

कुमार प्रवीण

KUMAR PRAVIN

ALIGARH

prlovealigarh@gmail.com

 

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