अलीगढ़ में हुए विराट पत्रकार सम्मेलन और पत्रकार सम्मान समारोह को लेकर कुछ बातें

यशवन्त भाई नमस्कार, गत 15 सितम्बर को अलीगढ़ के खैरेश्वर धाम स्थित स्वामी हरिदास नाट्यशाला परिसर में चल रहे विराट देवछठ मेले में एक विराट पत्रकार सम्मेलन और पत्रकार सम्मान समारोह का आयोजन किया गया था. मंडलीय स्तर पर हुये इस आयोजन में हाथरस, मथुरा, एटा और अलीगढ़ के पत्रकारों का सम्मान किया गया. इस समाराह के आयोजक के रूप में अलीगढ़ में पंजाब केसरी समाचार पत्र के मंडल प्रभारी पंकज धीरज और दैनिक जागरण अलीगढ़ के वरिष्ठ पत्रकार सुरेन्द्र मोहन जी का बोलबाला रहा. इस समारोह के दौरान हुई 2 -3 चीजें मैं आपसे बताना चाहता हूँ, आप चाहें तो अपने स्तर से इसे प्रकाशित भी कर सकते हैं.

1. समारोह के दौरान जहाँ इसे ग्रामीण पत्रकारों की हौसलाअफजाई के उद्देश्य से कराया जाना बताया गया वहीं इसमें सबसे ज्यादा सम्मान और प्रतीक चिह्न सिटी रिपोर्टर को दिये गये जिन्हें अपने आप में पूरी तरह ख्याति प्राप्त है. बमुश्किल 3 या 4 ग्रामीण पत्रकारों को सम्मानित किया गया जबकि कुल 25 लोगो को सम्मानित किया गया ऐसे मे इसे ग्रामीणों के लिए कहा जाना कहाँ तक उचित है.

2. समारोह के दौरान ना तो ग्रामीण पत्रकारों को ना तो मंच पर बोलने का मौका दिया गया और ना ही उनके दर्द को बयान करने का अवसर दिया गया, तो इसे में ऐसे में ग्रामीण पत्रकार सम्मेलन कैसे कहा जा सकता है.

3. सम्मेलन के दौरान जो भी ग्रामीण पत्रकार सम्मानित हुए वे केवल दैनिक जागरण के ही थे. तो क्या दैनिक जागरण मे ही अच्छे ग्रामीण पत्रकार हैं, अन्य अखबारों में सब घसियारे ही भरे हुए हैं.

4. सम्मान समारोह के दौरान ग्रामीण पत्रकार कमेटी के जिलाध्यक्ष को मंच पर स्थान तक नहीं दिया गया.

5. ग्रामीण पत्रकारों के सम्मान हेतु तैयार की गयी सूची में कुछ अन्य समाचार पत्रों से जुड़े पत्रकारों के नाम भी थे, जिन्हे जागरण के पत्रकार महोदय के कहने पर सभी नाम जागरण ग्रामीण पत्रकारों के कर दिये गये. ऐसे में यह सम्मेलन तो दैनिक जागरण का हुआ ना कि विराट सम्मेलन.

6. पिछले साल 2012 में भी इसी स्थान पर इसी मौके पर इसी प्रकार पत्रकार सम्मेलन आयोजित किया गया था जिसमें दैनिक जागरण के दिवंगत ग्रामीण पत्रकार स्व श्री सुनील भारद्वाज, छर्रा के नाम पर एक पुरस्कार शुरू करने की घोषणा की गयी थी. मगर इस पुरस्कार के शुरू करने से पहले ना तो स्व. सुनील भारद्वाज के परिवार वालों से इजाजत ली गयी और ना ही उन्हें कोई सूचना दी गई.

7. 2012 में स्व सुनील भारद्वाज के नाम पर शुरू किये गये पुरस्कार को 2013 में भुला दिया गया. क्या यह एक दिवंगत ग्रामीण पत्रकार का अपमान नही है.

स्व. श्री सुनाल भारद्वाज अपने समय में बहुचर्चित नागला परसी भट्टा रेप कांड का अपनी कलम के माध्यम से खुलासा करके समूचे प्रदेश में हड़कम्प मचा दिया था. उनके नाम के साथ हूआ ये मजाक आहत कर गया. मुझे लगा कि आपके माध्यम से मैं अपनी वेदना व्यक्त कर सकता हूँ तो मैने ऐसा किया.

एक पत्रकार

अलीगढ़

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