असमय मौत मरने के कगार पर हिंदी दैनिक स्‍वतंत्र वार्ता

आंध्र प्रदेश का सर्वाधिक प्रसार वाला हिन्दी दैनिक स्वतंत्र वार्ता कर्मचारियों को वेतन न दे पाने की वजह से आईसीयू में जाता नजर आ रहा है। सूरते हाल यह है कि विगत 03 मार्च को संपादक मण्डल समेत समस्त कर्मचारियों के सामूहिक इस्तीफे के बाद स्टाफ की कमी से जूझता अखबार तालाबन्दी का शिकार हो गया। आनन-फानन में अखबार के मालिक गिरिश संघी ने पुणे से प्रकाशित दैनिक ‘आज का आनन्द’ के मालिक श्‍याम अग्रवाल से विशेष आग्रह कर चीफ रिपोर्टर ओमकारमणि त्रिपाठी को दस-पन्द्रह दिनों के लिए विगत 5 मार्च को बुलाया।

चूंकि श्री त्रिपाठी ने स्वतंत्र वार्ता में तकरीबन नौ साल तक बतौर न्यूज एडिटर काम किया था इसलिए कुछ सब एडिटर व डीटीपी वालों के साथ मिलकर उन्‍होंने दो दिन के अथक प्रयास के बाद अखबार को पटरी पर ला दिया। श्री त्रिपाठी ने 07 से 19 मार्च तक दैनिक स्वतंत्र वार्ता का प्रकाशन बहाल रखा मगर इनके जाते ही अखबार फिर लड़खड़ा गया। स्टाफ की तंगी झेलता अखबार अपना बजूद बचा पाने में कहां तक कामयाब हो पायेगा यह कहना काफी मुश्किल है। इस बाबत ओमकारमणि त्रिपाठी से जब फोन पर सम्पर्क स्थापित किया गया तो उन्होंने बताया कि ‘‘मैं अपने प्रबन्धन की तरफ से सिर्फ दस-पन्द्रह दिनों के लिए यहां आया था विपरीत हालात में भी अखबार को फिर से चालू करा दिया। अखबार को आगे चलाते रहना प्रबन्धन की जिम्मेदारी है।‘‘

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

 

 
 

 

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