आंतरिक राजनीति से त्रस्त कमलेश सिंह ने भास्कर मैनेजमेंट को अपना इस्तीफा सौंपा

दैनिक भास्कर में चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के एडिटर पद पर चार साल तक कार्य कर चुके और पिछले कुछ समय से भोपाल में वनवास काट रहे कमलेश सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. भरोसेमंद सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कमलेश सिंह ने भास्कर की अंदरुनी राजनीति से परेशान होकर इस्तीफा दिया है. उनका इस्तीफा स्वीकार किया गया है या नहीं, यह नहीं पता चल पाया है.

माना जा रहा है कि भास्कर में कल्पेश याज्ञनिक और नवनीत गुर्जर के मजबूत गुट के 'बिहार-यूपी वालों को भगाओ' अभियान के तहत बिहार और यूपी से जुड़े पत्रकारों को खबू परेशान किया जा रहा है और इन्हें टारगेट कर के इतना त्रस्त किया जा रहा है कि वे खुद इस्तीफा दे दें. ऐसी ही राजनीति को झेल रहे कमलेश ने इस्तीफा देने में ही भलाई समझा. तेजतर्रार और प्रोफेशनल जर्नलिस्ट कमलेश सिंह हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, भोजपुरी, पंजाबी भाषाओं में प्रवीण हैं. वे दिल्ली के

कमलेश सिंह
कमलेश सिंह
मेट्रो नाऊ अखबार में उन दिनों संपादक थे जब उन्हें सुधीर अग्रवाल ढेर सारे सपने दिखाकर भास्कर ले आए.

जब तक कमलेश चंडीगढ़, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश के संपादक रहे, उन्होंने अपने कार्य व शैली से काफी कुछ बदल दिया. पर कल्पेश याज्ञनिक गुट के हावी होने के बाद उन्हें परेशान किया जाने लगा. हालांकि चर्चा कमलेश सिंह के नेशनल एडिटर और कल्पेश याज्ञनिक के ग्रुप एडिटर बनने की थी लेकिन कल्पेश याज्ञनिक ने अपने आसपास किसी मजबूत आदमी को न रहने देने और यूपी-बिहार के पत्रकारों को भगाने की रणनीति के तहत कमलेश सिंह को तरह-तरह से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया.

कमलेश भोपाल में भी रहकर काम करना चाहते थे लेकिन उनको काम नहीं करने दिया जा रहा था. उन्हें गैर-जरूरी चीजों में इस कदर उलझा दिया गया था कि वे काम न कर सकें. चरम गुटबाजी और चरम आंतरिक राजनीति के कारण कमलेश ने भास्कर को अलविदा कह दिया है. भागलपुर के रहने वाले कमलेश निजी तौर पर इंटरनल पालिटिक्स पसंद नहीं करते. वे जुगाड़ और गुटबाजी से परे केवल काम को पैमाना मानते हैं. इसी सोच के तहत उन्होंने अंग्रेजी अखबार छोड़कर हिंदी अखबार में काम करना शुरू किया लेकिन हिंदी अखबारों के संपादकों की सामंती मानसिकता के कारण कमलेश घिरते चले गए और अब उन्हें इस्तीफा देना पड़ा है.

इससे पहले कानपुर के रहने वाले राजीव सिंह ने दैनिक भास्कर, छत्तीसगढ़ स्टेट हेड के पद से इस्तीफा दे दिया. उन्हें भी कल्पेश याज्ञनिक और नवीनत गुर्जर गुट ने परेशान करना शुरू कर दिया था और कई तरह के अनाप-शनाप आरोप व अफवाह राजीव सिंह के खिलाफ लगाए जाने लगे थे. इन स्थितियों से आजिज राजीव ने भोपाल तबादला स्वीकार करने की जगह अमर उजाला प्रबंधन से बात की और मेरठ में सीनियर रेजीडेंट एडिटर के रूप में काम करना शुरू कर दिया. देखना है कि बिहार-यूपी के पत्रकारों को भगाओ अभियान के तहत भास्कर में अब किस पर गाज गिरती है या फिर कौन पत्रकार राजनीति व टांग खिंचाई से त्रस्त होकर खुद इस्तीफा देता है.

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