आईआईएमसी फर्स्ट बैच के दो छात्रों की पच्चीस साल बाद हुई यशवंत के घर पर मुलाकात

Yashwant Singh : आईआईएमसी के पहले बैच के दो विद्यार्थी करीब पच्चीस साल बाद आज मिले.. वो भी मेरे घर पर… मुंबई से सीनियर बिजनेस जर्नलिस्ट कमल शर्मा दिल्ली आए हुए हैं. उनसे परिचय, जान-पहचान हिंदी ब्लागिंग के शुरुआती दौर से है. तब उनका एक ब्लाग 'वाह मनी' हुआ करता था. अपन लोग 'भड़ास' ब्लाग चलाते थे. हम सारे हिंदी ब्लागरों की फीड 'ब्लागवाणी' डाट काम पर आया करती और वहां हम सब अपने अपने ब्लाग की रेटिंग, हिट्स आदि देख-देख कर खुश हुआ करते.

हिंदी ब्लागिंग के शुरुआती काल के घोर लड़ाकू, असभ्य और अराजक लोगों में मैं शुमार रहा तो शरीफ, सरल और सुसंस्कृत लोगों में कमल शर्मा, बालेंदु दधीच आदि ब्लागरों का नाम लिया जा सकता है. उन्हीं कमल शर्मा जी ने दिल्ली आने पर फोन किया तो उनको मैंने घर बुला लिया. तब तक अनामी शरण बबल जी का फोन आया तो उनको भी घर बुला लिया. और, पता चला कि ये दोनों तो इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन के पहले बैच के स्टूडेंट हैं और आज पच्चीस साल बाद मिल रहे हैं.. दोनों देर तक गले मिले और मिलन का साक्षी मुझे बनाने के लिए बीच में बिठाकर फोटो खिंचाये.. अपनी स्थिति बीच वाली कुछ वैसी नहीं लग रही कि .. दाल भात में मूसलचंद…

तस्वीर में दाएं कमल शर्मा जी हैं और बाएं अनामी शरण बबल.

और हां, एक बात तो बताना भूल ही गया.. वो ये कि कमल शर्मा जी प्याज लहसुन तक नहीं खाते. और, अपन का दिल होता है कि कोई मेहमान आ जाए तो उसे मुर्गा पकाकर खिलाऊं. सो सोच में पड़ गया कि बिना लहसुन प्याज का भला क्या पक सकता है? ऐसे में अपने साथी राजीव शर्मा जी लंबे दाढ़ी बाल वाले को याद किया. वो भी प्याज लहसुन नहीं खाते और बाबा नीम करोली जी के अनन्य भक्त हैं. फेसबुक पर वो जितने देर बैठे रहेंगे, सिर्फ नीम करोली बाबा की फोटो शेयर करते रहेंगे, राम राम लिखते हुए..

एक बार तो राजीव की इस अंधभक्ति से उबकर उन्हें अनफ्रेंड कर दिया फेसबुक पर. जब उन्हें कई दिनों बाद पता चला कि वे हम अब एफबी पर फ्रेंड नहीं रहे तो उनका फोन आया.. तब मैंने बहाना मारा कि यार नशे कि अवस्था में कर्सर जाने कैसे कहां कहां हिल उड़ चल जाता है और उसी प्रक्रिया में डिलीट, अनफ्रेंड, ब्लाक टाइप के कुकृत्य हो जाया करते हैं.. खैर, उन्हें दोबारा फ्रेंड बनाया और जब जब वे बाबा नीम करोली महाराज के फोटो शेयर करते हैं, तब तब मजबूरी में मैं भी जय हो जय हो टाइप करता रहता हूं…

तो, बात कर रहा था कि बिना प्याज लहसुन के खाना कैसे बने, इस समस्या के हल के लिए राजीव शर्मा जी को बुलाया. उनके नेतृत्व में जो पंचमेल दाल बनी और खड़े मसालों को पीस कर फ्राई की गई, वह लाजवाब रहा… मैंने आलू मिर्च की सूखी सब्जी बना दी. फटाफट चावल पकाया. पत्नी ने मदद करते हुए रोटी बना दिया. खाना रेडी. सारे भाइयों ने जी भर खाया, देर तक गपियाये और सब अपने अपने राह चलते बने… तो, इस तरह एक अदभुत दिन बीता आज.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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