आईएएस अनुराग को कमिश्नर पद से हटवाने के बाद भी शांत नहीं है आईपीएस एसोसिएशन

वैसे तो आईएएस आईपीएस समेत नौकरशाही के सभी पदों के लिए कहा जाता है कि ये लोग अपनी और आपसी बात पब्लिक में नहीं ले जाते लेकिन आईपीएस मोहित गुप्ता ने अपने साथ जो कुछ हुआ उसे सार्वजनिक करके पब्लिक को आईएएस-आईपीएस के सुख दुख बतियाने बहसियाने का नया मुद्दा दे दिया. कौन सही कौन गलत जैसी बातें होने लगीं. दुर्व्यवहार करने वाले आईएएस अनुराग को कमिश्नर पद से हटवाने के बाद भी आईपीएस एसोसिएशन सक्रिय है. अपने संगठन के बैनर तले आईपीएस अफसर आईएएस अफसरों की दादागिरी को लेकर आरपार की लड़ाई के मूड में हैं.

बस्ती प्रकरण में चुनाव आयोग की कार्रवाई से खफा आईपीएस अधिकारियों के बगावती तेवर को देखते हुए चुनाव आयोग ने रविवार रात बस्ती के मंडलायुक्त अनुराग श्रीवास्तव को हटा कर उन्हें प्रतीक्षा सूची में रख दिया है. उनके स्थान पर ग्राम्य विकास आयुक्त संजीव कुमार की नियुक्ति कर दी गई है.  इससे पहले आयोग ने शनिवार रात सिद्धार्थनगर के एसपी मोहित गुप्ता और डीएम चैत्रा को हटा दिया था जिसको लेकर आईपीएस एसोसिएशन के तेवर गरम थे और प्रतिक्रिया में दो दर्जन युवा पुलिस अफसरों ने इस्तीफे की धमकी दी थी. अनुराग श्रीवास्तव ने गुरुवार को कुछ अपशब्द कहते हुए मोहित गुप्ता को बैठक से बाहर निकाल दिया था.

आईपीएस एसोसिएशन की शिकायत के बाद आयोग ने डीएम और एसपी को हटा दिया था, लेकिन अनुराग श्रीवास्तव के खिलाफ कार्रवाई नहीं की. इससे नाराज 2004 से 2007 बैच के दो दर्जन से अधिक अफसरों ने आइपीएस एसोसिएशन के सचिव अरुण कुमार को इस्तीफा भेजकर कहा कि यदि अनुराग श्रीवास्तव के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती तो वे लोग नौकरी छोड़ना पसंद करेंगे पर दबाव में काम नहीं करेंगे. आईपीएस अफसरों के इस्तीफे की पेशकश के बाद प्रदेश सरकार और मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय हरकत में आ गए. सरकार ने देर शाम आईपीएस एसोसिएशन की मागों पर विचार करने के लिए दो सदस्यीय समिति बना दी. समिति में औद्योगिक विकास आयुक्त वीएन गर्ग व डीजी भ्रष्टाचार निवारण संगठन अरुण कुमार गुप्ता हैं. उनसे तीन दिनों में शासन, प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के संबंध में संस्तुतिया एवं सुझाव देने को कहा गया है. रात करीब नौ बजे आयोग ने अनुराग श्रीवास्तव को बस्ती के मंडलायुक्त पद से हटाने का फैसला लिया.

अनुराग को ऐसे पद पर रखा जाएगा जो चुनावी कार्यों से न जुड़ा हो. आईपीएस अफसरों ने पहले मामले में सरकार से हस्तक्षेप चाहा था लेकिन आश्वासन न मिलने पर उन्होंने सीधा कदम उठाने का फैसला किया. कोई हल न निकलने पर जिलों में तैनात कई युवा आईपीएस अफसरों ने ई-मेल व फैक्स के जरिये आईपीएस एसोसिएशन को सशर्त इस्तीफा भेज दिया. इन अधिकारियों ने लिखा कि वे गाली खाने के लिए नौकरी नहीं कर रहे हैं. ताजी जानकारी है कि आज आईपीएस एसोसिएशन के पदाधिकारी यूपी के मुख्य सचिव अनूप मिश्रा से मिलेंगे. आईपीएस एसोसिएशन का कहना है कि वो सरकार के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं. उनके साथ इनसाफ नहीं हुआ है.

उत्तर प्रदेश के इतिहास में शायद यह पहला मौका है जब आईपीएस अधिकारी अपने किसी साथी के पक्ष में पूरी तरह से लामबन्द हुए हैं. इस लामबन्दी में युवा पुलिस अधिकारी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. पता चला है कि जिन आईपीएस अधिकारियों ने इस्तीफे की पेशकश की है उनमें सन्तकबीरनगर के पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र कुमार, बलरामपुर के पुलिस अधीक्षक आकाश कुलहरी, ललितपुर के पुलिस अधीक्षक एलआर कुमार, चन्दौली के पुलिस अधीक्षक शलभ माथुर, गाजीपुर के पुलिस अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार और लखनऊ में तैनात हैप्पी गुप्तन एवं विनोद कुमार शामिल हैं. इनके अलावा 2007 बैच के अमित पाठक, नितिन तिवारी, जोगिन्दर, प्रतिभा अम्बेडकर, दीपिका गर्ग व रविशंकर छवि ने भी आईपीएस एसोसिएशन को पत्र भेजकर अपने इस्तीफे की पेशकश की है. इन अधिकारियों ने एसोसिएशन के सचिव अरुण कुमार को भेजे पत्र में प्रदेश के आईएएस अधिकारियों पर सीधे हमला बोला. इस्तीफे की पेशकश करने वाले अफसरों के समर्थन में 2005 व 2006 बैच के अधिकारी भी आ गये हैं.

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