आईपीएस अमिताभ ठाकुर की प्रेस वार्ता पर रोक क्यों? दस दिन में जवाब दें

आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर द्वारा उत्तर प्रदेश शासन और डीजीपी, यूपी द्वारा नियमों का उल्लंघन करते हुए उनके संवैधानिक अधिकार का हनन करने के खिलाफ दायर याचिका में कैट, लखनऊ ने 10 दिन में राज्य सरकार से जवाब तलब किया है. डीसी लाखा और नवनीत कुमार की बेंच ने ठाकुर और सरकार के वकील एस पी सिंह की दलील सुनने के बाद यह आदेश दिया. मामले में अगली सुनवाई 01 अगस्त को होगी.

याचिका के अनुसार आईपीएस अधिकारियों की आचरण नियमावली में अपनी सेवा सम्बंधित मामलों में किसी निंदात्मक प्रकरण पर अपना पक्ष रखने के पहले सरकार से अनुमति लेनी होती है पर 12 सप्ताह में निर्णय नहीं होने पर स्वतः अनुमति मान ली जाती है.  

ठाकुर ने गोंडा एसपी के रूप में शस्त्र जांच में फर्जी फंसाए जाने के मामले में 28 अक्टूबर 2012 को अनुमति मांगी और 12 सप्ताह बीतने के बाद 18 जनवरी 2013 को प्रेस वार्ता निश्चित किया लेकिन सरकार ने एक दिन पहले इस पर रोक लगा दी जिसके खिलाफ उन्होंने यह याचिका दायर किया.

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