आईबीएन7 प्री-पोल सर्वे : अंबानी पोषित न्यूज चैनलों की भाजपा के पक्ष में लाबिंग के निहितार्थ

Yashwant Singh : असल में सब कुछ अंबानी के आदेश के तहत हो रहा है. बहुत पहले यह तय किया जा चुका है कि अंबानी समूह अबकी मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है. इस बारे में एक शीर्ष स्तरीय बैठक विदेश में हुई थी. चर्चा तो यहां तक है कि मोदी को पीएम बनाने के एजेंडे पर काम करने के मुकेश अंबानी के फरमान पर राजदीप सरदेसाई ने अपनी असहमति जताते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया था. लेकिन बाद में उन्हें ढर्रे पर यानी पटरी पर यानि सब कुछ बुझे मन से मान लेना पड़ा.

मीडिया घरानों को कारपोरेट घरानों ने इसीलिए कब्जाना शुरू किया ताकि वे देश की राजनीति की दशा-दिशा तय करने में खुलकर खेल सकें और देश के जन-मानस को अपने हिसाब से बदलने में कामयाब हो सकें. अभी तक वो लोग ये काम पर्दे के पीछे से करते थे, यानि पार्टीज को फंडिंग के जरिए करते थे. पर अब कारपोरेट घराने कोई मोर्चा छोड़ना नहीं चाहते. उन्हें अब ऐसा पीएम चाहिए जो आम जनता को भरमा सके, बांध सके, जरूरत पड़ने पर सेना-पुलिस से विरोधियों को कुचलवा सके, कारपोरेट घरानों के तेज विकास के लिए रास्ता-माहौल बना सके और देश के संसाधनों के कारपोरेट्स के बीच भरपूर बंटवारे व उपभोग की प्रक्रिया को तेज कर सके…

कांग्रेस राज में पग-पग पर मौजूद करप्शन के दैत्य से खफा और जनता में लोकतांत्रिक प्रणाली (जो कि अंततः पूंजीपतियों, कारपोरेट घरानों, बड़े लोगों, प्रभावशाली लोगों, एलीट लोगों को लगातार विकास कराते रहने वाली प्रणाली है) के प्रति बढ़ते विरोध व मोहभंग को ध्यान में रखकर कारपोरेट घरानों ने इस बार बदलाव कराने के लिए अपने स्तर पर खूब तैयारियां कर ली हैं. इसी दिशा में मीडिया का एजेंडा सेट कर दिया गया है. जाने कब से मोदी को मीडिया राष्ट्रीय हीरो और संभावित पीएम की तरह ही पेश कर रहा है. यहां तक कि अगर राहुल व मोदी अलग अलग जगहों पर एक साथ भाषण देते हैं तो मोदी सबसे ज्यादा भाव, स्क्रीन, कवरेज पाते हैं…

बात हो रही थी अंबानी के मीडिया घराने यानि नेटवर्क18 की. अंबानी के जो न्यूज चैनल है, आईबीएन7, सीएनएन-आईबीएन, ईटीवी आदि को यह कह दिया गया है कि इस बार हर हाल में बीजेपी को प्रमोट करना है. इसी एजेंडे के तहत देश के जनमानस को बदलने का काम शुरू कर दिया गया है. छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में भारी बहुमत से भाजपा सरकार की वापसी का ऐलान इन अंबानी पोषित न्यूज चैनलों ने कर दिया है… इसी लाइन पर अन्य प्रदेशों और लोकसभा चुनावों से संबंधित प्री-पोल सर्वे आप देखने-सुनने-पढ़ने वाले हैं…

मुझे बिलकुल आश्चर्य नहीं हुआ कि आखिर ये अंबानी पोषित न्यूज चैनल क्यों बीजेपी के पक्ष में जोरदार तरीके से दांव लगा रहे हैं.. सारा कुछ पहले से तय था… अब उसे एक्जीक्यूट किया जा रहा है और इस एक्जीक्यूशन के दौर में राजदीप सरदेसाई, आशुतोष आदि जैसे एक्जीक्यूटिव जोरशोर से लगे हुए हैं… आईबीएन7 पर शिवराज सिंह खूब प्रसन्न दिखे … ये होना ही था, क्योंकि उनके पीछे बड़े बड़ों का हाथ हैं… जब अंबानी हों साथ तो फिर क्यों न बने बात…

(भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.)


Vikram Singh Chauhan : मुझे बिलकुल आश्चर्य नहीं हुआ कि आखिर ये अंबानी पोषित न्यूज चैनल क्यों बीजेपी के पक्ष में जोरदार तरीके से दांव लगा रहे हैं.. सारा कुछ पहले से तय था… अब उसे एक्जीक्यूट किया जा रहा है और इस एक्जीक्यूशन के दौर में राजदीप सरदेसाई, आशुतोष आदि जैसे एक्जीक्यूटिव जोरशोर से लगे हुए हैं… आईबीएन7 पर शिवराज सिंह खूब प्रसन्न दिखे … ये होना ही था, क्योंकि उनके पीछे बड़े बड़ों का हाथ हैं… जब अंबानी हों साथ तो फिर क्यों न बने बात…

आईबीएन ,द वीक और सीएसडीएस का मिला -जुला चुनाव पूर्व सर्वेक्षण आया जिसमें बताया जा रहा है कि मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में भाजपा तीसरी बार चुनाव जीत रही है .यह पूरा सर्वेक्षण एकपक्षीय ,पूर्वाग्रह से प्रेरित ,गलत तथ्यों व पैरामीटर (पैमाने ) पर आधारित हैं . कोई भी निष्पक्ष प्रेक्षक ,समीक्षक और सर्वेक्षक के साथ ही छत्तीसगढ़ में स्व्यमं सत्ता में बैठे शीर्ष राजनेताओं को अपनी जीत पर विश्वास नहीं है .सीएम से लेकर नीचे स्तर तक के मंत्रियों पर खुलेआम भ्रष्टाचार का आरोप है ऐसे में यह सर्वेक्षण विचलित करता है .आईबीएन में राजदीप सरदेसाई से लेकर कई बड़े नाम है ! लेकिन उनका यह सर्वे सर के ऊपर से निकल रहा है .भाजपा व कांग्रेस ने सभी 90 प्रत्याशियों की अभी घोषणा भी नहीं की और यह सर्वे गुमराह करके एंटी इन्कमबैंसी फैक्टर को नज़रअंदाज़ कर रहा है .कांग्रेस व भाजपा के बीच मतों का अंतर 2008 में डेढ़ फीसदी से कम था उस अंतर को यह सर्वेक्षण 14 फीसदी तक ले जा रहा हैं .

हम नहीं कहेंगे यह प्लांटेड व टेन्टेड ,पेड़ खबर है पर 8 दिसंबर को यह साबित हो जायेगा कि भाजपा की हैट्रिक इस बार तो नहीं ! मोदी फैक्टर का स्थानीय लोगों पर उतना असर नहीं है जितना मेट्रो शहरों में हो सकता है .प्रायोजित भीड़ जुटाने में भगवाई हमेशा आगे रहते है .आईबीएन के साथ सर्वेक्षण में एक रीज़नल चैनल भी जुड़ा है इसलिए निष्पक्ष सर्वेक्षण पर ऊँगली उठना स्वाभाविक है ,क्योकिं रीज़नल चैनल थोक में इनसे अर्थ लेते रहे है ? .वैसे हमें 2004 में एनडीए का ''फीलगुड '' याद है . मुगालते में रहकर जीना भाजपा ने सीख लिया है .भाजपा को इस सर्वे से खुश होना चाहिए लगता है राजदीप सरदेसाई का 52 करोड़ का बंगला बनाने में रमन और शिवराज का बड़ा हाथ है !

विक्रम सिंह चौहान के फेसबुक वॉल से.

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