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आओ मिल कर जश्न मनायें, समाजवाद मजबूत हो रहा है

देश के मालिक के नाम से प्रख्यात आम आदमी की दशा चरित्र-चित्रण करने लायक भी नहीं बची है। गांव का राशन डीलर पंक्तिबद्ध खड़ा कर नागरिकों के नाम ऐसे पुकारता है, जैसे खैरात बांट रहा हो। अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर डाक्टर के पास जाने तक दस से ज्यादा बार झिडक़ दिया जाता है इसी आम आदमी को। रेलवे स्टेशन पर टिकट लेते समय बीस हजार का नौकर इसी आम आदमी से गुलाम से भी बदतर व्यवहार करता देखा जा सकता है।

देश के मालिक के नाम से प्रख्यात आम आदमी की दशा चरित्र-चित्रण करने लायक भी नहीं बची है। गांव का राशन डीलर पंक्तिबद्ध खड़ा कर नागरिकों के नाम ऐसे पुकारता है, जैसे खैरात बांट रहा हो। अस्पताल में पर्ची बनाने से लेकर डाक्टर के पास जाने तक दस से ज्यादा बार झिडक़ दिया जाता है इसी आम आदमी को। रेलवे स्टेशन पर टिकट लेते समय बीस हजार का नौकर इसी आम आदमी से गुलाम से भी बदतर व्यवहार करता देखा जा सकता है।

डीएम से मिलने आये एक बुजुर्ग आम आदमी को खांसी आ गयी, तो सरकार का सफेद टोपा धारण किये साहब ने उस आम आदमी को ऐसे डांटा कि उसे फिर खांसी नहीं आई, जबकि खांसी की बीमारी भगाने के लिए वह तमाम तरह के नुस्खों का प्रयोग कर चुका था। यही आम आदमी एसपी साहब से मिलने पहुँचा, तो लाल आंखों को और बड़ा कर दुत्कारते हुए लाल टोपी वाला सिपाही बोला कि घर में काम धंधा नहीं है, जो सुबह-सुबह ही आ धमकते हो। आम आदमी गिड़गिड़ाया कि साहब, बहुत परेशान हैं, मिला दो। पुन: झिडक़ता हुए सिपाही बोला- उधर बैठ जाओ और बात मत करना, अंदर विधायक जी बैठे हैं, उन्हें निकल आने दो बाहर, चालीस-पचास लोग इकटठे हो जायेंगे, तो एक साथ मिला देंगे। करीब एक घंटे बाद विधायक जी निकले, तो आम आदमी की आंखों में चमक आ गयी कि अब उसकी मुलाकात हो जायेगी, तभी सत्ताधारी पार्टी का एक खास आदमी आ गया और वह साहब के साथ एसी रूम में बैठ कर ऐसा व्यस्त हुआ कि पता ही नहीं चला कि कब एक घंटा गुजर गया?

उस खास आदमी के निकलने से पहले बाहर पचास से अधिक आम आदमी जमा हो चुके थे, सभी मिलने को आतुर थे, लेकिन तभी चौथे स्तंभ के कुछ ठेकेदार आ धमके और एसी रूम में बैठ कर साहब की कार्यप्रणाली को विश्व स्तरीय बताते हुए ठंडे के साथ पकौड़े खाते रहे, पर आम आदमी की बात किसी ने नहीं की। साहब और पत्रकार साथ-साथ बाहर निकले। बाहर पचास-साठ लोगों की भीड़ देख कर साहब का सिर भन्ना गया। सिपाही की ओर इशारा करते हुए साहब ने कहा कि सबसे प्रार्थना पत्र लेकर जमा कर लो। सिपाही ने दौड़ कर सभी के हाथों से कागज के टुकड़े झपट लिये और पूरी की पूरी गड्डी स्टेनो के पास पटक दी। स्टेनो को समय मिलेगा, तो आम आदमी को न्याय मिल जायेगा, पर पता नहीं कि कब मिले समय। उत्तर प्रदेश के हर हिस्से की लगभग यही

बीपी गौतम

कहानी है। आम आदमी कांग्रेस से तंग है, बसपा के कुशासन से आजिज आ ही चुका था, सांप्रदायिक भाजपा से तो पहले से ही नाराज है, तभी तो उसने समाजवाद को चुना है और जब चुन लिया है, तो सर्वश्रेष्ठ ही है। समाजवाद निरंतर आगे बढ़ रहा है, इसलिए समाजवादी शासन की आलोचना करने वाले हम कौन होते हैं? जय समाजवाद।

लेखक बीपी गौतम स्‍वतंत्र पत्रकार हैं. इनसे संपर्क 8979019871 के जरिए किया जा सकता है.

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