आखिर उत्‍तराखंड के सीएम खंडूड़ी इतने संवेदनहीन कैसे हो सकते हैं!

दिल्ली में उत्तराखंड की एक बेटी के साथ एक ऐसा हादसा हुआ जो अपनी जमीन से उखड़े लोगों की त्रासदी है. कुछ दिन पूर्व 18 साल की किरण नेगी को उसके आफिस से लौटते समय  कुछ गुंडों ने अगवा कर लिया और चार दिन बाद उसकी लाश पड़ी मिली. किरण का दोष सिर्फ इतना था कि उसने मोहल्ले के एक गुंडे को कुछ दिन पूर्व उस पर फब्ती कसने पर डपट दिया था. बस गुंडे ने यही गांठ बाँध लिया और होनहार किरण की दुराचार के बाद हत्या कर डाली.

इस घटना से दिल्ली का पूरा उत्तराखंड समाज हिल गया. किरण अपने परिवार की एक मात्र कमाऊ सदस्य थी और उसी पर पूरा परिवार निर्भर था. उत्तराखंड के तमाम प्रवासी संगठनों ने इस घटना का अपने-अपने स्तर से विरोध किया और पीड़ित परिवार के साथ अपनी हमदर्दी दिखाई. दो दिन पूर्व किरण के दुखी पिता को उत्तराखंड के कुछ सामाजिक संगठनों से जुड़े़ लोग उत्तराखंड के मुख्यमंत्री खंडूड़ी के पास ले गए. वे चाहते थे कि वे अपना एक पत्र दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को लिखें ताकि गरीब पीड़ित परिवार को कुछ मदद मिल सके, पर उन लोगों को तब बेहद धक्का लगा जब खंडूड़ी ने शीला को इस प्रकार का पत्र लिखने से साफ़ इनकार कर लिया. आखिर इस इनकार के पीछे खंडूड़ी की क्या सोच रही होगी. यह समझ परे है?

वैसे देखा जाए तो इन सारी बातों के लिए राज नेता ही परोक्ष रूप से जिम्मेदार हैं, क्योकि वे लोगों के लिए उनके घर में रोजगार की व्यवस्था नहीं कर पाते जिसके लिए लोगों को रोजी- रोटी के लिए पहाड़ से उखड़ना पड़ता है. खैर.. उत्तराखंड की सडकों में… राज्य के लिए खंडूड़ी है.. जरूरी…. के बैनरों पर लाखों खर्च करने वाले खंडूड़ी यदि थोड़े भी संवेदनशील होते तो उन्हें तुरंत मुख्यमंत्री राहत कोष से नेगी परिवार को मदद कर देनी चाहिए थी. पर मदद तो दूर वे कागज़ के एक टुकडे पर दो शब्द शीला दीक्षित को भी नहीं लिख सके.

दूसरी ओर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चेन्नई में बैंक डकैती मामले में मारे गए बिहारी युवकों की सही जांच के लिए पूरा अभियान छेड़ दिया था. वैसे भी गत वर्ष पंजाब में भी कुछ बिहारी मजदूरों के खिलाफ हुए अत्याचार के खिलाफ नीतीश ने अपने आला अधिकारी पंजाब में तैनात कर दिए थे. खंडूड़ी की ईमानदारी के हम भी समर्थक हैं, पर उनका यह कृत्य एक संवेदनशील मुख्यमंत्री वाला कभी नहीं कहा जा सकता. वह एक अच्छे फ़ौजी अफसर रहे हैं, पर उत्तराखंड को एक ऐसे संवेदनशील मुख्यमंत्री की जरूरत है जिसकी आँखों में गरीब की परेशानी को देखकर आंसू आये.. न कि ऐसा मुख्यमंत्री हो जो सभी को एक ही डंडे से हांकने का प्रयास करे.

लेखक विजेंद्र रावत उत्‍तराखंड के वरिष्‍ठ पत्रकार हैं.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *