”आखिर फंसा ही दिया पुलिस ने मुझे और मेरे पत्रकार साथियों को”

यशवंतजी, नमस्कार. पिछली बार मैंने आपको बताया था कि किस तरह नरसिंहपुर पुलिस ने पत्रकारों पर फर्जी मामला दर्ज किया है. इस बात को लेकर मैं व मेरे पत्रकार साथी प्रदेश के गृह मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी बात पंहुचा चुके हैं. स्‍वयं गृहमंत्री एवं मुख्यमंत्री से बात कर चुके हैं और सारे सबूत उन्हें दे चुके हैं, पर कोई हल नहीं निकला. एक दिन पुलिस ने थाना कोतवाली में एक मामले में कवरेज के दौरान धोखे से मुझे इस वजह से गिरफ्तार कर लिया कि मैं जिस मामले में कवरेज कर रहा था यदि वहां मीडिया न होती तो पुलिस के वारे न्यारे हो जाते.

पर काम बिगड़ता देख पुलिस ने सारी खुन्नस हम पर उतार दी. मुझे गिरफ्तार कर लिया. इस बात से मुझे बड़ा ही आघात लगा और मुझे चेस्ट पेन होने लगा. मुझे थाने में मानसिक यातनाये दी गईं, धमकाया गया. वो तो शुक्र है कि नरसिंहपुर के सारे पत्रकार साथी थाने आ गए और पुलिस कस्टडी में मुझे तुरंत जिला अस्पताल ले जाता गया और तुरंत ईसीजी की गई और मुझे भर्ती किया गया.  मेरे इसी मामले मुझे और मेरे जिन साथियों को पुलिस द्वारा फंसाया गया था वे भी बेचारे पत्रकारिता के धर्म व मित्रता को निभाते हुए स्वयं ही पुलिस को सरेंडर कर दिया.

मेरी हालत लगातार ख़राब हो रही थी तो मुझे जबलपुर मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया, जहां मुझे तीन-चार दिन आईसीयू में रखा गया. हालांकि दूसरे दिन ही सेशन कोर्ट से बेल मिल गई थी, जबकि प्रदेश के जनसंपर्क आयुक्त ने सारे मामले को समझते हुए प्रदेश के डीजीपी को एक पत्र भी लिखा और फर्जी मामले के तत्काल निवारण को कहा गया था, पर लगता है प्रदेश का कानून अंधा ही नहीं बहरा भी हो गया है. आपको मैं मामले के सारे दस्तावेज मेल कर रहा हूं और आपसे सहयोग चाहता हूं. और निवेदन है कि इसे भड़ास में भी स्थान दें.

धन्यवाद.

पंकज गुप्‍ता

pankajbansalnews@gmail.com


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