आजतक के दीपक शर्मा पर इंडिया टीवी के अभिषेक उपाध्याय ने किया कटाक्ष

Abhishek Upadhyay :  कांग्रेस के नेता अरविंदर सिंह लवली के स्टिंग पर कुछ क्यूं लिखा जाए? ये स्वायत्ता है किसी भी न्यूज़ चैनल या अख़बार की कि वो अगर किसी खबर को तथ्यों की कसौटी पर खरा पाता है, तो उसे चलाए या छापे। किसी के पेट में क्यूं दर्द हो? मगर फिर भी लिखूंगा और इसलिए लिखूंगा कि आज 1965 में बनी सुपरहिट फिल्म वक्त का एक बेहद ही सुपरहिट डायलॉग बहुत याद आ रहा है कि – “ चिनॉय सेठ, जिनके मकान शीशे के होते हैं, वो दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंका करते !" :):) …अब इस स्टिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि भाई, ये क्या एक नेता और पत्रकार के बीच की "ऑफ द रिकार्ड" बातचीत को स्टिंग करके दिखा रहे हो और बता रहे हो कि ये खुलासा है:):)

इस स्टिंग ऑपरेशन के कर्ताधर्ता या यूं कह लें कि निर्देशक साहब खुर्शीद अनवर मामले को लेकर फेसबुक पर पानीपत की लड़ाई लड़ रहे थे। पानीपत की तीनो लड़ाइयां एक साथ। 1526, 1556 और 1761 में हुई पानीपत की तीनो लड़ाइयां एक साथ ही लड़े जा रहे थे। फेसबुक पर। जिस मामले में एफआईआर दर्ज हो चुकी थी, जिस मामले में खुद खुर्शीद अनवर के एनजीओ की ओर से शुरू हो चुकी जांच थी, जिस मामले में कविता कृष्णनन और कल्याणी मेनन सेन जैसी देश की जानी मानी नारीवादियों की ओर से जांच के उठाए गए अहम सवाल थे, जिस मामले में राष्ट्रीय महिला आयोग का हस्तक्षेप था, जिस मामले में पीड़िता का इंटरव्यू था, जिस मामले में आरोपी का भी इंटरव्यू लिया गया था, जिस मामले में अनवर के एनजीओ की तीन महिला सदस्यों का अनवर के खिलाफ दिया गया इस्तीफा था, उस मामले में ये महाशय नैतिकता के सवाल उठा रहे थे। इंडिया टीवी पर सवाल खड़े कर रहे थे। खबर की हवा तक न लगने की घटना से इस कदर क्षुब्ध थे कि खुलेआम पीड़िता का चरित्र हनन तक कर रहे थे, अपनी वाल पर लिख लिखकर। यहां तक कि हथकड़ियां कलाई बदल लेंगी जैसे वाक्य लिखकर धमका रहे थे, खबर दिखाने वालों और पीड़िता के साथ खड़े होने वालों को।

हालांकि जब से पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के आगे दफा 164 के तहत बयान देकर कहा है कि उसके साथ न सिर्फ बलात्कार हुआ बल्कि उसे "सोडोमाइज" भी किया गया, उसके बाद से ही ये महाशय उड़ीसा की चिल्का झील की तरह शांत हैं, मानो किसी ने कनपटी पर 375 बोर की राइफल रख दी हो। (अभी हाल ही में मुरादाबाद-बिजनौर में आदमखोर बाघिन पर रपट करने गया था। वहां शिकारियों ने एक 375 बोर की राइफल दिखाई थी, जो खासतौर पर आदमखोर बाघ-बाघिन के लिए इस्तेमाल की जाती है:)

अब कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि अगर किसी नेता और पत्रकार के बीच हुई "ऑफ द रिकार्ड" बातचीत को स्टिंग कर दिखाना ही ख़बर या खुलासा है तो फिर तो इस देश के कोने कोने में बैठे स्ट्रिंगरों से बेहतर कौन ख़बरची होगा। मैने हमेशा ये पाया है कि आप कितने ही बड़े पत्रकार, कितने ही बड़े तोप क्यों न हो जाएं, या खुद को मान बैठें, स्ट्रिंगर नेटवर्क का मुकाबला नहीं कर सकते। अदभुत खबरें होती हैं, उनके पास। गजब का नेटवर्क होता है। बड़ा से बड़ा नेता उनसे "ऑफ द रिकार्ड" बातचीत में ऐसी ऐसी बातें बता जाता है कि आप सुनेंगे तो होश चकरा जाएंगे। मगर स्ट्रिंगर भी इस बात को जानते हैं कि जो व्यक्ति आपकी पहचान से वाकिफ होने के बावजूद आप पर भरोसा करके कुछ कह रहा हो, उसका स्टिंग करके खबर "क्रिएट" नहीं की जाती है। इसलिए क्यूंकि अगर आपसी भरोसे में होने वाली "ऑफ द रिकार्ड" बातचीत का स्टिंग करके ही खबर "क्रिएट" करने का पैमाना बना लिया जाए तो फिर तो पत्रकार खुद अपने भरोसे वालों से ऑफ द रिकार्ड बातचीत में क्या क्या कुछ नहीं कहते हैं…तो कर लिया जाए उनका भी स्टिंग। दिखा दी जाए खबर। फिर तो कितने बचेंगे और कितने जाएंगे…..!

तो साहब, कीचड़ उछालने से पहले अपने पैरों का आकलन कर लीजिए..जमीन बहुत छिछली है…बारिश बहुत तेज़ है और वैसे भी आप "स्काय फाल" फिल्म के बांड यानि डेनियल क्रेग तो हैं नहीं कि "एम" यानि जूडी डेंच की नज़रों से भी तेज़ निकल जाएं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में रंगमंच के दिनो में "अब्सर्ड थियेटर" के पितामह कहे जाने वाले सैम्युएल बैकेट के नोबेल प्राइज विनिंग प्ले "वेटिंग फार गोदो" में कई बार अभिनय किया है। एस्ट्रागन और व्लादिमीर के बीच पोजो को झेलते "लकी" के तौर पर। इस नाटक में एक जगह पर एस्ट्रागन व्लादिमीर से कहता है– I'm like that. Either I forget right away or I never forget. उसी ज़माने से इस डायलाग का मुरीद हूं कि Either I forget right away or I never forget….:):)

इंडिया टीवी में कार्यरत अभिषेक उपाध्याय के फेसबुक वॉल से.


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