आजतक से रिटायर होने के बाद फेसबुक के जरिए शुद्ध हिंदी-उर्दू सिखा रहे हैं नकवी

कहते हैं सीखने की उम्र नहीं होती. वरिष्ठ पत्रकार कमर वहीद नकवी को ही ले लीजिए. वैसे तो ये रिटायर हो गए हैं. पर आजकल ये छात्र और गुरु, दोनों भूमिकाओं में आ चुके हैं. छात्र इसलिए कि वे हिंदी में टाइपिंग सीख रहे हैं और काफी कुछ सीख चुके हैं. गुरु इसलिए कि वे फेसबुक के माध्यम से पत्रकारों व अन्य लोगों को शुद्ध हिंदी उर्दू लिखना सिखा-बता रहे हैं. उनकी इस पहल को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और संशय में पड़े लोग उनसे अपनी शंका का निराकरण भी करा रहे हैं.

दादा नाम से मशहूर कमर वहीद नकवी का फेसबुक पर दो एकाउंट है. एक तो उनका अपना एकाउंट है और दूसरा उनके नाम से एक पेज है. इन दोनों तक निम्न लिंक के जरिए जा सकते हैं और उनकी पाठशाला के छात्र बन सकते हैं.

http://www.facebook.com/qamarwaheed.naqvi

http://www.facebook.com/qwnaqvi

नीचे उनके वॉल से साभार लेकर कुछ पोस्ट प्रकाशित किए जा रहे हैं…

Qamar Waheed Naqvi : परसों एक हिन्दी चैनल पर महाराष्ट्र के शहर DHULIYA का नाम चल रहा था—"धुलिया". सही नाम "धुलै" है. ज़्यादातर हिन्दी चैनलों और अखबारों में "धुलै" को "धुलिया" या "धूलिया" लिखा जाता है, जो ग़लत है. इसी तरह महाराष्ट्र के दो और शहरों के नाम अकसर ग़लत लिखे जाते हैं. "सातारा" को प्रायः "सतारा" और "सोलापुर" को "शोलापुर" लिखा जाता है, जो ग़लत है. इनके सही नाम हैं — "सातारा" और "सोलापुर". यही नहीं, "आम्बेडकर", "गावसकर" और "तेंडुलकर" भी हिन्दी में ग़लत ढंग से क्रमशः "अम्बेडकर", "गावस्कर" और "तेन्दुलकर" लिखे जाते हैं. हमारे यहाँ अखबारों और टीवी चैनलों के न्यूज़ रूम की विडम्बना यह है कि जिन नामों के सही उच्चारण लोगों को पता नहीं हैं, उनके बारे में सही जानकारी हासिल करने का कष्ट कोई करता ही नहीं है. और अगर बता भी दिया जाय तो ग़लती सुधारने की तकलीफ़ भी कोई उठाना नहीं चाहता. और यह बात सिर्फ हिन्दी के पत्रकारों पर ही लागू नहीं होती. मैं आज से बत्तीस साल पहले जब १९८० में ट्रेनी हो कर नवभारत टाइम्स, मुंबई पहुंचा, तो कुछ महीनों बाद मेरी नज़र एक मराठी अखबार पर पड़ी, जिसमें एक शहर का नाम "मीरत" लिखा हुआ था. (अंग्रेजी में स्पेलिंग होती है: MEERUT). मुझे बड़ी हैरानी हुई. मैंने उनके एक वरिष्ठ सम्पादक से कहा कि यह खबर तो यू. पी. के मेरठ शहर की है लेकिन आप के अखबार में "मीरत" छपा है. इस ग़लती को सुधारा जाना चाहिए. मुझे जवाब मिला कि हम जानते हैं कि सही नाम मेरठ है लेकिन बरसों से हम इसे "मीरत" लिखते आ रहे हैं, इसलिए अब इसे नहीं बदला जा सकता. अजीब तर्क था. ग़लती का जब पता चल जाय, उसे सुधार लेने में क्या हर्ज है? वैसे ऐसी ज़्यादातर ग़लतियों का बड़ा कारण उनकी अंग्रेजी स्पेलिंग भी हैं. अंग्रेजी के टीवी चैनलों में होनेवाले ग़लत उच्चारण को प्रायः हिन्दीवाले आँख मूँद कर उठा लेते हैं. अब जैसे "कसाब" (KASAB) को ही लें. अंग्रेजी के लोग उसे "कसब" ही कह कर पुकारते हैं, जबकि सबको मालूम है कि सही उच्चारण "कसाब" है.

        Nadim S. Akhter क्या बात है सर!! बहुतों को आइना दिखा दिया आज आपने…वैसे मुंबई के सम्पादक साहब का रवैया चौंकाने वाला है… ग़लती अगर पता चल जाए तो उसे सुधारने में क्या हर्ज है…ये तो वही बात हुई कि हम कसाब को कसब ही बोलेंगे क्योंकि वैसा बोलते आए हैं और 'राम' को 'रामा' (Rama) क्योंकि अंग्रज़ी बोलने वाले elite को रामा बोलने में अंग्रेजियत का एहसास ज्यादा होता है.
        आप से गुजारिश है कि एक दिन ये जरूर बताइएगा कि अंग्रेजी के शब्दों को जब हिंदी में लिखा जाता है, तो उसे कैसे लिखेंगे. अब नवभारत टाइम्स दिल्ली का ही उदाहरण लें. वहां ये तय पाया गया कि आक्सफोर्ड डिक्शनरी में जो उच्चारण है, उसी के हिसाब से लिखेंगे और ये उच्चारण क्या है, कैसे लिखा जाना है, इसे तय करने का अधिकार एक व्यक्ति विशेष को दे दिया गया.
        फिर देखिए क्या हुआ..अंग्रेजी का एक शब्द है 'guerilla'..इसे आमतौर पर हम हिन्दी में 'गुरिल्ला' लिखते हैं लेकिन नवभारत टाइम्स दिल्ली में तय किया गया कि इसे 'गरिल्ला' लिखा जाएगा..अंग्रेजी के शब्दों को हिन्दी में कैसे लिखा जाए, यह हमेशा एक चैलेंज रहता है क्योंकि oxford dictionary का उच्चारण सुनकर भी आप उसे हिन्दी में सही लिख दें, ये हमेशा मुमकिन नहीं…इस बारे में आप क्या सोचते हैं सर. सादर.
         
        Qamar Waheed Naqvi मैंने शिशिर सिंह के एक सवाल के जवाब में अंग्रेजी शब्दों के बारे में अभी-अभी लिखा है, कृपया देख लें.
         
        Rajeev Sharma सर, भारत सरकार को क्या कहना चाहिए- केन्द्रीय सरकार या संघीय सरकार
         
        Feroz Haider sir, main bhee newsroom me eis pareshani se rooz do char hota hoon. khaskar urdu ke words par lekin bada sawal ye hai ke system ko kaise sudhhara jai aur seniors ke ego ko bina hurt kiye kaise output sahi ho gaye.
         
        Zafar Abbas i feel worried wn the channels misuse the dot or "nukhta" of urdu..They dont refrain themselves from the use of the urdu words but wn it comes to using "Nukhta" they try to maintain their hindi stature…Khuda aur juda me bus ek nukhte ka hi farq hai…lekin na jane kyu kuch ek channels ko chodkar bechare nukhte ka koi istemaal nahi kar raha hai..
         
        Dhirendra Pandey बिलकुल सही बात उठाई है आपने | और इन्ही लोगों को पढ़ सुन कर के हम लोंग भी गलत बोलने लगतें है, और इस तरह भाषा का स्वरुप बदल जाता है | आज साहित्य और सिमेमा के अलावा मीडिया का बहुत बड़ा रोल है बल्कि सबसे बड़ा रोल है भाषा को समृद्ध या विकृत करने में पर ये लोंग आज सुविधा और जल्दबाज़ी के कारण इसको महत्वपूर्ण नहीं समझतें और इस पर ध्यान नहीं देतें है |
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Qamar Waheed Naqvi : किसी ने पूछा था कि "हालांकि" सही है या "हांलाकि". जवाब है, "हालांकि" सही है. मनीष झा ने पूछा है कि "शुद्ध" और "विशुद्ध" का अर्थ क्या एक-दूसरे से भिन्न है और क्या दोनों शब्द संस्कृत से आये हैं. जवाब है कि ये दोनों ही शब्द संस्कृत के हैं और एक ही अर्थ व्यक्त करते हैं. वरुण कुमार ने पूछा है कि सेमी फ़ाइनल अलग-अलग लिखा जाय या जोड़ कर. मेरे ख्याल से "सेमी फ़ाइनल" या " सेमीफ़ाइनल" लिखने में कोई बुराई नहीं है. बहुत शुद्ध लिखना चाहते हैं तो "सेमी-फ़ाइनल" लिखें. लेकिन "सेमि फ़ाइनल" या "सेमिफ़ाइनल" ग़लत है.

        Padampati Sharma jari rakhana Dada is Pathshala ko. Hindi par yah aapka bahut bada upkaar hoga\
 
        Viplava Awasthi Sir 'corruption' word ka hindi translation kaise likha jaye??
 
        Rajan Prakash धन्यवाद सर, मेरा एक प्रश्न है… सही क्या है सांवैधानिक या संवैधानिक ?
   
        Mrityunjay Kumar sir राजनैतिक या राजनितिक जीवन में कौन सही है
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Qamar Waheed Naqvi : बेअसर, प्रभावहीन और "असरहीन" और "हैवीपन से भारीनेस" तक : १९९०-९१ में जब मैं नवभारत टाइम्स, लखनऊ में था, एक दिन एक सहयोगी ने शीर्षक लगाया, "अमुक का असरहीन अभिनय." मैंने पूछा, भई, यह "असरहीन" क्या होता है? "असर" अरबी का और "हीन" हिन्दी का. आप इसकी जगह प्रभावहीन या बेअसर नहीं लिख सकते थे. जवाब था ज़रूर लिख सकते थे, लेकिन दिमाग़ में ऐसा कुछ खटका ही नहीं कि इसमें कुछ गड़बड़ है. अभी पिछले दिनों एक अखबार के शीर्षक में फिर "असरहीन" दिख गया. ज़ाहिर है कि बीस-बाईस साल पहले शुरू हुई "असरहीन" की यात्रा काफी प्रभावशाली तरीक़े से जारी है. दरअसल, हिन्दी लिखने में ज़्यादातर ग़लतियाँ ऐसी ही होती हैं जो बस बे-ध्यानी में हो जाती हैं. थोड़ा-सा ठहर कर सोचें तो ऐसी बहुत-सी ग़लतियों से बचा जा सकता है. दुनिया की तमाम भाषाओं के शब्दों का आप हिन्दी में बेहिचक इस्तेमाल करें, लेकिन बेहतर होगा कि दो भाषाओं के शब्दों का आधा-आधा हिस्सा जोड़ कर एक शब्द न बनायें. वर्ना तो हम एक दिन ऐसे भी प्रयोग देखेंगे : आज बहुत "हैवीपन" महसूस हो रहा है या सिर में "भारीनेस" लग रही है.

        Dhirendra Pandey बड़ी खतरेबुल बात है
 
        Satya Prakash Yes, you are right sir. People are also frequently using 'nuksandayak' and 'afsosjanak'. Correct words are 'nuksandeh' and afsosnak'. This trend needs to be arrested.
 
        Rajesh Priyadarshi नुक़सानदायक भी ऐसा ही है, नुक़सादेह की जगह
   
        Shishir Singh मुझे नहीं लगता कि अन्तिम लाइन जैसी नौबत आएगी, करने को कोई करना चाहे तो कर दे, पर वो खटकेगा। असरहीन की तरह नहीं कि आज तक मुझे मालूम ही नहीं था। हिन्दी और उर्दू का मेल ऐसा है कि ऐसी गलतियाँ बार-बार होंगी ही। (ये मेरा निजी विचार था)। फिर भी अच्छा है कि आप के बहाने काफी कुछ गलतियाँ समझ आयेंगी।
    
        Rahul Tripathi ‎"हैवीपन" तो सुनने में आ जाता है, और कई बार सुना भी है !लेकिन,खबरों में नहीं देखा हा ये जरुर है की आने वाले समय में "भारीनेस" से ग्रसित हो अगर कही छप गया तो ये प्रमाणिक हो सकता है …. राजस्थान में तो हम अखबारों में इस तरह के कई शब्द देखते ही रहते है जैसे "घरबदर" किया " "धूजनी" छूटी ( कंपकपी )"मोयला" (सरसों की फसल काटने बाद उड़ने वाल एक कीट) सही शब्द तो मुझे भी नहीं मालुम और एक "रायला " ( राई ) ये शब्द अक्सर अखबारमे छपते है !
     
        Abhishek Priydarshi sir.. ab hindi ki atma bachi hai kaha…
      
        Subhash Neerav कुछ गलतियाँ अनजाने में हो जाती हैं, लेकिन पता चलने पर भी उसे दोहराएं तो यह गलत है… मुझे भी आज आपने एक नई चीज़ सिखाई…मैं ऐसी गलती करने से सर्तक रहूँगा…
      
        Suman Bajpai ab vakt kahan logon ke pass ki hindi ke marm ko samjhe, aajkal to her koi hindi ko ek majak samajhta hai, typist bhi apni chalata hai
        
        Aditya Pujan Thanx sir…really eyeopening…
         
        Rudrashiv Mishra Sir, kya beasr likh sakte hain
         
        Rakesh Rakesh Ranjan kya bariki hai sir…
         
        Sandeep Bundela Great sir!
         
        Qamar Waheed Naqvi रुद्रशिव जी, आपके प्रश्न का उत्तर तो मैंने अपनी मूल पोस्ट में दिया ही है. "बेअसर" बिलकुल सही है.
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Qamar Waheed Naqvi : त्रिवेणी प्रसाद पाण्डेय ने पूछा है: "उंगली" सही है या "अँगुली?" जवाब है: मूल संस्कृत शब्द है "अंगुलि", जिससे बिगड़ कर "अँगुली" बना. ये दोनों ही सही हैं लेकिन हिन्दी के आम इस्तेमाल में "उंगली" लिखना ही उचित रहेगा. क्योंकि अब "उंगली" ही सब जगह प्रचलन में है.

        Charan Singh Qamar saheb, that good. Every progressive language changes with time and usage.
 
        Sharad Mishra sir aapka jawab nahi……..
 
        Praveesh KT you are great
   
        Sharad Mishra sir, aapse aisa hi vayvharik gyaan milta rahe……
    
        Dhirendra Pandey नहीं अगर सही मालूम है तो सही ही लिखना चाहिए | मै तो अँगुली ही लिखूंगा
     
        Mohammad Anas बारीकियों से वाकिफ़ कराने हेतु धन्यवाद सर !
      
        Pankaj Mishra sir, daaku aangulimaal tha ya unglimaal!!!!!! mujhe lagta hai aangulimaal tha aur jo galat likhte hai vo likhen. sahi shabd aanguli hi hona chahiye. hamare haath me anguliyan hoti hai ungliyan nahin.
       
        Triveni Prasad Pandey शुक्रिया सर
        
        Shyam Parmar अर्तार्थ वास्तविक जानकारी के साथ साथ प्रचलन का भी ख्याल रखा जाए ?
         
        Manish Jha तो फिर उस डाकू का नाम ''अंगुलिमाल'' था कि ''उंगलीमाल'' ?
         
        Qamar Waheed Naqvi डाकू अंगुलिमाल था.
         
        Amit Bhatt एक देसी तरीके से नापने के लिए भी तो 'अंगुल' इकाई का इस्तेमाल होता है। सो अंगुलि ही सही है। हां, उस डाकू का नाम भी अंगुलिमाल ही तो पढ़ा है अब तक।
         
        Dhananjay Singh अँगुलि से बना अँगुल अभी भी नाप के लिए कई जगहों पर बोला जाता है ।
        काश फ़ारसी और सँस्कृत को स्कूलों में अनिवार्य किया जाता; भाषा सुधर जाती ।
         
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Leena Kumar : सर, क्या बताएंगे कि अंशकालिक और अंशकालीन में कोई फर्क है क्या ? part time (जैसे part time job ) की हिन्दी क्या होगी?

Qamar Waheed Naqvi : यहाँ "अंशकालिक" सही है, लेकिन मेरे ख्याल से "पार्ट टाइम नौकरी" लिखना ज्यादा बेहतर होगा. कारण यह कि आम बोलचाल में कोई "अंशकालिक" नहीं बोलता. बोलचाल की भाषा हमेशा सहज होती है, क्योंकि हम बोलते समय आमतौर पर ऐसे शब्द चुनते हैं, जिन्हें बोलने में कम से कम प्रयास करना पड़े.

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Shishir Singh : सर मेरे शहर के एक बड़े अखबार के स्थानीय संस्करणों में ' कॉलोनी' की जगह कॉलनि प्रयोग होता है, क्या ये सही है? कॉलोनी की सही वर्तनी भी बताइगा। इसके अलावा अन्य भाषा के शब्दों को देवनागरी में लिखते वक्त किस तरह की सावधानी बरतनी चाहिए कि उनकी शुद्ध वर्तनी लिखी जा सके। ( कमेटी और कमिटि इस पर भी प्रकाश डालिएगा।

Qamar Waheed Naqvi : अंग्रेजी में सही उच्चारण "कॉलनि" के ही निकट है, लेकिन हिन्दी में आमतौर पर "कालोनी" ही प्रचलित है. इसी तरह COMMITTEE का सही उच्चारण "कमिटी" है, लेकिन ज़्यादातर "कमेटी" ही लिखा जाता है. अंग्रेजी के शब्दों को हिन्दी में किस रूप में लिखा जाय, इस विषय पर काफी मतभेद है. विद्वानों का एक वर्ग मानता है कि अंग्रेजी के शब्दों को हिन्दी के स्वभाव के अनुसार ढाल कर इस्तेमाल करना चाहिए, लेकिन आजकल दूसरा एक बड़ा वर्ग इस बात का पक्षधर है कि अंग्रेजी शब्दों को ठीक वैसे ही लिखा जाना चाहिए, जैसा कि अंग्रेजी में उनका मूल उच्चारण होता है. अगर दूसरे वर्ग के तर्क को माना जाय तो "कॉलनि" और "कमिटी" ही सही बैठेंगे.

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Shishir Singh : ‎'असरहीन' के बहाने आपने अपने एक पोस्ट में बताया था कि किस तरह एक गलत संधि का प्रयोग होता है। एक और जिज्ञासा है सर। अखबारों में लिखा जाता है कि 'भारी संख्या में भीड़ जुटी' यहाँ ज्यादा या बड़ी के स्थान पर भारी को प्रयोग करना क्या उचित है? (अगर कारण हो तो कारण भी बताने की कृपा करें।)

Qamar Waheed Naqvi : सही है— "बड़ी संख्या में भीड़ जुटी". "संख्या" भारी कैसे होगी? तकनीकी रूप से भारी वह चीज़ होगी, जिसमें भार या वज़न होगा. संख्या ज्यादा या कम होगी, इसलिए ज्यादा संख्या को "बड़ी संख्या" कहना ही उचित होगा.

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Harishankar Shahi : सर, लेख में "किन्तु" "परन्तु" "आखिर" "फिर" इन जैसे शब्दों का प्रयोग कम से कम होना चाहिए, या इनके प्रयोग को लेकर कोई ऐसा आदर्श प्रतिबंध बनाने की आवश्यकता नही होती है. सर वाक्य की शुरुआत इन शब्दों से करना उचित होता है या नहीं.

Qamar Waheed Naqvi : इस विषय में यह आप पर निर्भर है कि आप इन शब्दों का कितना प्रयोग करना चाहते हैं. इन शब्दों से वाक्य शुरू करने में कुछ भी ग़लत नहीं है.

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Akhilesh Sharma : दादा। एक शब्द बहुत चल निकला है। बवाल। मुझे किसी ने बताया कि इसका शाब्दिक अर्थ अलग है, लेकिन चैनलों पर इसका प्रयोग विवाद, मतभेद या हंगामे के लिए होने लगा है। कृपया प्रकाश डालें। दूसरा है कहीं न कहीं। जब रिपोर्टरों को कुछ नहीं सूझता तो इसका इस्तेमाल एक ही वाक्य में दो-तीन बार कर डालते हैं। जैसे अंग्रेजी के रिपोर्टर यू नो, यू नो करते हैं।

Qamar Waheed Naqvi : अखिलेश जी, सही शब्द वबाल है, बवाल नहीं. यह अरबी भाषा का शब्द है, लेकिन आजकल "बवाल" शब्द ही प्रचलन में है, इसलिए इसी को सही मानिए. बवाल (सही शब्द : वबाल) का अर्थ है: बखेड़ा, फसाद, झंझट, मुसीबत, विपत्ति, आपदा आदि. मेरे ख्याल से टीवी चैनलों में यह प्रायः इसी अर्थ में इस्तेमाल होता है. "बवालेजान" (सही है वबालेजान या वबालेजां) का अर्थ है : जान का जंजाल, प्राणों के लिए मुसीबत. टीवी पत्रकार अकसर "कहीं न कहीं" का इस्तेमाल करते हैं तो इसमें कोई ख़ास बुराई नहीं है. ज्यादा समस्या है बार-बार उनके "जी बिलकुल" बोलने पर, जो न सिर्फ बेकार में बिना किसी मतलब के बोला जाता है, बल्कि कई बार एंकर जो सवाल पूछता है, रिपोर्टर "जी बिलकुल" कह कर केवल उसकी पुष्टि करता है, चाहे वहां ऐसा करने की कोई ज़रुरत न हो. जैसे, एंकर ने पूछा, "क्या आपको लगता है कि दुर्घटनास्थल दूर होने कारण राहत पहुंचाने में देर हुई?" और रिपोर्टर ने जवाब शुरू किया, "जी बिलकुल….."

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Qamar Waheed Naqvi : हिन्दी में हजारों शब्दों को लेकर विवाद कई दशकों से चल रहा है कि वे पुल्लिंग हैं या स्त्रीलिंग. "सोच" और "आत्मा" दो ऐसे शब्द हैं जो मूल संस्कृत में पुल्लिंग हैं, लेकिन हिन्दी में जनसामान्य वर्ग इन्हें प्रायः स्त्रीलिंग के तौर पर इस्तेमाल करता है. इसी तरह संस्कृत में "गरिमा", "लघिमा", "अग्नि" आदि शब्दों को पुल्लिंग माना गया है, लेकिन हिन्दी में ये सभी शब्द स्त्रीलिंग में ही प्रयोग में लाये जाते हैं. फिर कुछ ऐसे हिन्दी के शब्द हैं, जिन्हें लेकर खुद हिन्दी के बड़े कोशकार एकमत नहीं हो पाये हैं, जैसे "झंझट" शब्द को नागरी प्रचारिणी सभा के कोशकार स्त्रीलिंग मानते हैं, तो अन्य बहुत से कोशकार इसे पुल्लिंग मानते हैं. (स्रोत: ज्ञानमंडल कोश की भूमिका) और फिर हिन्दी और उर्दू में आपस में इतना घालमेल है कि कई बार भ्रम पैदा होता है. जैसे प्याज़. बात १९८४ की है. उन दिनों मैं नवभारत टाइम्स, लखनऊ में उप-सम्पादक था. एक दिन एक खबर बनाते हुए मैंने शीर्षक लगाया, "प्याज़ महँगी हुई", तभी हमारे स्थानीय सम्पादक श्री रामपाल सिंह की नज़र उस पर पड़ गयी. वह बोले, "पंडित जी, प्याज़ महँगी नहीं, महंगा होता है." मुझे आश्चर्य हुआ. बचपन से मैं प्याज़ को स्त्रीलिंग मानता आ रहा था. मैंने फ़ौरन उर्दू-हिन्दी कोश (उन दिनों प्रायः सभी अच्छे अख़बारों के न्यूज़ रूम में उर्दू-हिन्दी, अंग्रेजी-हिन्दी और एक अच्छा हिन्दी कोश ज़रूर होता था) उठाया और रामपाल जी को दिखाया कि इसमें तो प्याज़ को स्त्रीलिंग लिखा गया है. उनहोंने कहा कि उर्दू में होता होगा, हिन्दी में तो यह पुल्लिंग ही है. फिर हिन्दी कोश देखा गया. उसमें प्याज़ को पुल्लिंग लिखा गया था. इसलिए, यह विवाद इतना आसान नहीं कि हम-आप इसे चुटकियों में सुलझा लें. जब तक भाषा रहेगी, इस तरह के विवाद चलते रहेंगे और इन्हीं के बीच से समाधान भी निकलता रहेगा.

        Salma Zaidi इसी तरह चर्चा को लेकर भी भ्रम है. उर्दू में चर्चा होता है और हिंदी में होती है.
 
        Girijesh Vashistha सर दही के लिंग को लेकर भी काफी विवाद है । कहीं ये खाई जाती है तो कहीं खाया जाता है ।

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Qamar Waheed Naqvi : "कार्रवाई" और "कार्यवाही" — देखने में इन दोनों शब्दों में ज्यादा फ़र्क समझ में नहीं आता, लेकिन इनके अर्थ बिलकुल अलग-अलग हैं.  "कार्रवाई" कहते हैं "एक्शन" (ACTION) को और "कार्यवाही" कहते हैं "प्रोसीडिंग"(PROCEEDINGS) को. उदाहरण के तौर पर संसद या विधानसभा के सदनों में जो कामकाज हुआ, उसे कहेंगे "कार्यवाही". और सरकार ने जो कदम उठाये, किसी मामले में जो 'एक्शन' लिया, उसे कहेंगे "कार्रवाई".

    कुछ उदाहरण:

    १. दवाओं में मिलावट रोकने के लिए सरकार ने अफसरों को कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिये हैं.
    २. पुलिस ने बदमाशों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में ढिलाई बरती.
    ३. सरकार ने एलान किया कि टैक्स चोरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई तेज़ की जायेगी.

    ऊपर के तीनों उदाहरण "एक्शन" (ACTION) को बता रहे हैं. अब ये उदाहरण देखें:

    १. विपक्ष के शोर-शराबे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दो घंटे ठप्प रही.
    २. सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकारों से कहा है कि वे अदालती कार्यवाही की रिपोर्टिंग करते समय ध्यान रखें कि तथ्यों को सही तरह से पेश किया जाये.
    ३. जांच आयोग ने मामले की सुनवाई की अपनी कार्यवाही पूरी कर ली है.

    ऊपर के सभी उदाहरणों में "प्रोसीडिंग" (PROCEEDING) की बात हो रही है. यानी विधानसभा, अदालत और जांच आयोग में जो कामकाज हुआ, वह है "प्रोसीडिंग" और उसे कहा जायेगा "कार्यवाही".

    अब एक और उदाहरण देखें:
    अदालती कार्यवाही में बाधा डालने कोशिश कर रहे एक युवक के ख़िलाफ़ अदालत ने पुलिस को तुरंत कार्रवाई करने के निर्देश दिये.

    इस उदाहरण से साफ़ हो जायेगा कि "कार्यवाही" और "कार्रवाई" में क्या फ़र्क है.

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Qamar Waheed Naqvi : उर्दू के कुछ शब्द बहुत ज्यादा इस्तेमाल होते हैं. जैसे मुहम्मद, मुहल्ला, मुहताज, मुहब्बत आदि. अक्सर लोग इन्हें "मोहम्मद", "मोहल्ला", "मोहताज", "मोहब्बत" लिखते हैं जो ग़लत है.

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Qamar Waheed Naqvi : नयी दिल्ली सही है या नई दिल्ली? हुए सही है या हुये? लिए सही है या लिये? स्थायी सही है या स्थाई? उत्तर है: हिंदी के जो शब्द 'आ' पर समाप्त होते हैं, वे 'ए' और 'ई' के द्वारा अपना रूप बदलेंगे. जैसे 'हुआ' में बदलाव होगा : 'हुए' और 'हुई.' और जो शब्द 'या' पर ख़त्म होते हैं उन्हें 'य' पर ही पूरा किया जाएगा. जैसे 'नया' को 'नये' और 'नयी' में ही बदला जाना चाहिए. इसी तरह रूपये लिखना सही है, रुपए ग़लत है क्योंकि 'रुपया' का अंत 'या' पर होता है, 'आ' पर नहीं. उम्मीद है ये आसान सा नियम समझ में आ गया होगा. इसी तरह अंग्रेजी के फॉर शब्द के लिए लिखा जाएगा 'लिए', लेकिन अंग्रेजी के टेक शब्द के लिए लिखा जाएगा 'लिये.' एक उदहारण देखें : दर्जी ने कमीज़ सीने के लिए सौ रूपये लिये. हिंदी में 'स्थाई' कोई शब्द नहीं होता , ये लिखना ग़लत है. सही है 'स्थायी' और इससे बनता है 'स्थायित्व.' अक्सर मैं देखता हूँ कि लोग 'स्थाई' और 'स्थाईत्व' लिखते हैं, ये दोनों ही ग़लत हैं.

        Ashish Awasthi Very good information …. n useful too … thanks Waheed saheb !!!!!!
 
        Rajeev Mittal आपको अपने बीच पाकर बहुत अच्छा लगा……अब आप जल्दी से फेसबुक मित्र बानिये और मेरे नोट्स का लुत्फ़ उठाइये
 
        Akhilesh Sharma वैसे तो दोनों ही सही हैं। ये जनसत्ता और नवभारत टाइम्स का विवाद था। जिसमें जीत जनसत्ता की हुई। अब रेलवे स्टेशन को छोड़कर कहीं भी नयी दिल्ली नहीं दिखता। नई दिल्ली ही चल निकला है।
    
        Qamar Waheed Naqvi अखिलेश जी, भला दोनों कैसे सही हो सकते हैं? सही तो कोई एक ही हो सकता है और सही "नयी" ही है. और ये विवाद जनसत्ता और नवभारत टाइम्स का नहीं था. जो वर्तनी मैं बता रहा हूँ, वह अज्ञेय जी ने आगे बढ़ाई थी और तब जनसत्ता का कहीं दूर- दूर कोई पता नहीं था. बाद में जब राजेंद्र माथुर जी नवभारत टाइम्स के सम्पादक बने तो उन्होंने "नई", "गई" चलाया, बाद में सरकारी तंत्र ने इसे अपना लिया. लेकिन सरकारी हिंदी की रचना किस मानसिकता के लोगों ने की और किस तरह से उसको जड़ बना दिया, ये हम सब जानते हैं. इसी का नतीजा है की सरकारी हिंदी में लिखी विज्ञप्तियों को समझना टेढ़ी खीर बन गया है. देवनागरी बहुत वैज्ञानिक लिपि है और इसके साथ पिछले बीस-पच्चीस सालों में काफी अतार्किक छेड़छाड़ की गयी, जिस पर मैं आगे भी लिखूंगा. आज के सोशल मीडिया के ज़माने में पुरानी ग़लतियों को सुधार सकने की उम्मीद दिख रही है.
      
        Akhilesh Sharma धन्यवाद दादा। अपनी अज्ञानता के लिए क्षमा चाहता हूँ। मैं तो अब भी चँद्र बिंदु का प्रयोग करना चाहता हूँ लेकिन कोई अनुमति नहीं देता। आपसे फिर सीखने का अवसर मिल रहा है ये मेरे जैसे लोगों के लिए सौभाग्य का विषय है।
       
        Akhilesh Sharma आप फेसबुक पर फ्रेंड बनने का भी अवसर दें। पेज पर बातचीत ज़रा मुश्किल होती है।
        
        Vijay Rana Great Naqvi Saheb, Hindi journalists really like this kind of guidance. I think everyone who works in Hindi must join this page.
         
        Vijay Rana Akhilesh and Alok pl send this page to as many people as possible.
         
        Alok Joshi ‎Vijay Bhai you can also share this on your wall and spread the message.
         
        Vijay Rana Surely Alok, I will.
         
        Hemant Joshi नकवी जी..कृपया इसका स्वनिम शास्त्रीय तर्क भी समझा दें…
         
        Sandeep Kumar इसका मतलब मेरा प्रिय अखबार रहा 'नई दुनिया' अपना नाम ही गलत लिखता रहा है शुरू से
         
        Swati Arjun बहुत शुक्रिया…काफी ज्ञानवर्धक जानकारी है ये….आपको फॉलो करती रहूंगी..
         
        Qamar Waheed Naqvi हेमंत जी, मैंने वह तर्क अपने पोस्ट में दिया है. जो शब्द "या" पर समाप्त होते हैं, जैसे नया, गया, किया, लिया, गाया, जाया (मैं अकसर वहां जाया करता हूँ), वे सभी "यी" और "ये" पर आकर ठहरेंगे, जैसे: नयी, गयी, किये, लिये, गायी, जाये, जायेगा इत्यादि.
        जो शब्द "आ" पर ख़त्म होते हैं, वे "ई" और "ए' पर आकर रुकेंगे जैसे: हुआ से हुई और हुए बनेगा.
        अंग्रेजी के FOR को "लिए" और TAKE को "लिये" लिखा जाना चाहिए.

        हेमंत जी, मैंने वह तर्क अपने पोस्ट में दिया है. जो शब्द "या" पर समाप्त होते हैं, जैसे नया, गया, किया, लिया, गाया, जाया (मैं अकसर वहां जाया करता हूँ), वे सभी "यी" और "ये" पर आकर ठहरेंगे, जैसे: नयी, गयी, किये, लिये, गायी, जाये, जायेगा इत्यादि.
        जो शब्द "आ" पर ख़त्म होते हैं, वे "ई" और "ए' पर आकर रुकेंगे जैसे: हुआ से हुई और हुए बनेगा.

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Qamar Waheed Naqvi : संसार की हर भाषा उन सभी भाषाओं से शब्द लेती है, जो उसके संपर्क में आती हैं. और जो भाषाएँ अपने दरवाज़े बंद रखती हैं और किसी दूसरी भाषा के शब्दों को अन्दर नहीं आने देती हैं, वह धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं. अपने विकास क्रम में भाषाएँ कई प्रकार से पनपती, बिगड़ती, बदलती, एक-दूसरे से घुलती- मिलती, एक- दूसरे के शब्दों को ग्रहण करती हुई आगे बढती हैं. उदाहरण के तौर पर हिन्दी में तुर्की भाषा के करीब सात हज़ार से ज्यादा शब्द हैं. अरबी- फ़ारसी के भी हज़ारों शब्द हैं. अंग्रेजी शब्द तो ख़ैर बहुत ही ज्यादा हैं और नित नये-नये शब्द जुड़ते जा रहे हैं. इस प्रक्रिया में भाषा समृद्ध होती है और भाषा के विकास की यह एक स्वाभाविक, महत्वपूर्ण और आवश्यक प्रकिया है. उदाहरण के तौर पर किताब तुर्की भाषा का शब्द है, अचार फ़ारसी का और अबीर अरबी भाषा का. इसी तरह अंग्रेजी में GURU जैसे शब्द हिन्दी से गये हैं.

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Qamar Waheed Naqvi : ताज़ा हमेशा "ताज़ा" ही रहेगा. कई बार लोगों को लिखते देखा है: ताज़ी सब्जियां. "ताज़ा" का स्त्रीलिंग नहीं बनता. उसे हमेशा "ताज़ा" ही लिखा जाएगा, चाहे उसे किसी भी शब्द से जोड़ा जाये. "ताज़ी" शब्द का मतलब है : अरबी भाषा, अरब का घोड़ा, शिकारी कुत्ता, अरब का रहनेवाला.

        Nitin Pradhan शुक्रिया सर, मैंने ताजा को ताजी तो कभी नहीं किया, लेकिन ताजी का यह अर्थ भी नहीं पता था।
 
        Rajiva Joshi दरअसल, ताजा तुर्की भाषा से लिया गया शब्द है और यहाँ आज भी प्रयुक्त होता है| यहाँ ताजा सब्जी को "taze sebze" कहते हैं|

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