आजमगढ़ में शराब पीकर मरने वालों की संख्या छिपा रही है सरकार

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर और आदित्य ठाकुर ने आज आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर तहसील में शराब पीने से हुई मौत के मामलों में आदमपुर गाँव में जा कर यह पाया कि इस गाँव में घूरे (70), शास्त्री (40) पुत्र घूरे, संजय (35) पुत्र घूरे, गोपाल (38), प्यारे (35) पुत्र विश्वनाथ, मोती (60) तथा सुकरे अर्थात सात लोगों की मौतें हुईं जबकि पुलिस और चिकित्सा विभाग के लोगों ने इनमे मात्र प्यारे, संजय और घूरे यानी केवल तीन लोगों का पोस्टमोर्टम किया. प्यारे का भी पोस्टमोर्टम तब हुआ जब गाँव वालों ने इसके लिए पुलिस पर दवाब बनाया. मोती के मामले में पुलिस की मौजुदगी में ही बिना पोस्टमोर्टम के लाश घरवालों को दे दी गयी.

डॉ नूतन और श्री आदित्य ने इन तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर इस पूरे इलाके में निष्पक्ष माध्यम से मरने वालों की संख्या ज्ञात कराये जाने की मांग की है और मृतकों का बिना पोस्टमोर्टम किये अंतिम संस्कार करवाने वाले प्रशासनिक, पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग की है. साथ ही चूँकि ये मृतक अत्यंत ही गरीब परिवारों से हैं और इनमे कईयों के छोटे-छोटे बच्चे हैं, अतः उन्होंने समानता के अधिकार के आधार पर इन मरने वालों को तत्काल राजकोष से प्रतापगढ़ के कुंडा में नन्हे प्रधान के परिवार को दिए गए मुआवज़े की तरह मुआवजा दिए जाने की मांग की है.

मुख्यमंत्री को भेजा पत्र—-

सेवा में,
श्री अखिलेश यादव,
मुख्यमंत्री,
उत्तर प्रदेश शासन,
लखनऊ  
विषय:- आजमगढ़ जिले में शराब से हुई मौतों विषयक
महोदय,

मैं डॉ. नूतन ठाकुर निवासी 5/426, विराम खंड, गोमती नगर, लखनऊ एक सामाजिक कार्यकर्ता हूँ और मुख्यतः मानवाधिकार व प्रशासन में पारदर्शिता व उत्तरदायित्व से जुड़े मुद्दों पर कार्य करती हूँ. आज मैंने और सामाजिक रूप से सक्रीय मेरे पुत्र श्री आदित्य ठाकुर ने आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर तहसील में शराब पीने से हुई मौत के मामलों में आदमपुर गाँव में जा कर यह पाया कि इस गाँव में घूरे (70), शास्त्री(40) पुत्र घूरे, संजय (35) पुत्र घूरे, गोपाल (38), प्यारे (35) पुत्र विश्वनाथ, मोती (60) तथा सुकरे अर्थात सात लोगों की मौतें हुईं जबकि पुलिस और चिकित्सा विभाग के लोगों ने इनमे मात्र प्यारे, संजय और घूरे यानी केवल तीन लोगों का पोस्टमोर्टम किया. प्यारे का भी पोस्टमोर्टम तब हुआ जब गाँव वालों ने इसके लिए पुलिस पर दवाब बनाया. मोती के मामले में पुलिस की मौजुदगी में ही बिना पोस्टमोर्टम के लाश घरवालों को दे दी गयी.

यदि आदमपुर गाँव की यह स्थिति है तो निश्चित रूप से इस इलाके के अन्य गाँवों की भी यही स्थिति होगी. इन तथ्यों के आधार पर हम इस पूरे इलाके में निष्पक्ष माध्यम से शासन के वरिष्ठ स्तर पर मरने वालों की संख्या ज्ञात कराये जाने की मांग करते हैं. साथ ही मृतकों का बिना पोस्टमोर्टम किये अंतिम संस्कार करवाने वाले प्रशासनिक, पुलिस और चिकित्सा अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही किये जाने की मांग करते हैं कि इस सम्बन्ध में शासन के वरिष्ठ अधिकारियों से जांच कराई जाए और तदनुसार आवश्यक कार्यवाही कराई जाये. साथ ही चूँकि ये मृतक अत्यंत ही गरीब परिवारों से हैं और इनमे कईयों के छोटे-छोटे बच्चे हैं, अतः समानता के अधिकार के आधार पर इन मरने वालों को तत्काल राजकोष से प्रतापगढ़ के कुंडा में स्वर्गीय श्री नन्हे प्रधान के परिवार को दिए गए मुआवज़े की तरह मुआवजा दिए जाने की मांग भी करते हैं क्योंकि ये सभी लोग प्रशासनिक लापरवाही से मारे गए हैं और इस रूप में यह शासन की जिम्मेदारी है कि वह इन मौतों का जिम्मा स्वीकार करते हुए इन गरीब लोगों की नियमानुसार आवश्यक मदद करे क्योंकि वर्तमान में इन लोगों को ऐसी सहायता की नितांत जरूरत है.  

नूतन ठाकुर
लखनऊ
094155-34525Lt.no- NT/AZM/Mub/01
Dt. – 20/10/2013

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