‘आज समाज’ अखबार में भीषण सेलरी संकट, मीडियाकर्मियों ने काम करने से किया इनकार

यशवंत भाई, आज की रात नेता जी का अखबार बड़ी मुश्किल से छप पाया। पत्रकारों व अन्य कर्मचारियों के पैरों में सर देकर मुश्किल से आज मंगलवार की रात नेता जी का अखबार छपा। नेता जी यानी हरियाणा कांग्रेस के बहुत प्रभावशाली राजनीतिज्ञ व बड़े उद्योगपति विनोद शर्मा जिनके सुपुत्र मनु शर्मा पिछले कई साल से मॉडल जेसिका लाल की हत्या करने के जुर्म में तिहाड़ जेल में सजा काट रहे हैं। इनका अखबार आज समाज है, जो हरियाणा में अंबाला से प्रकाशित होता है। सुपुत्र के जेल जाने के बाद आबरू बचाने के लिए अखबार शुरू किया था। लेकिन पिछले कई महीने से अखबार में तनख्वाह का संकट बना हुआ था। कईयों ने तो नौकरियां छोड़ दी थी, काफी दिन पहले।

जब करार के मुताबिक आज तनख्वाह न मिली तो पत्रकारों व अन्य कर्मचारियों ने एकजुट होकर सामूहिक रूप से इस्तीफा लिखा और भेज दिया मालिकों को। ये पता चलते ही अखबार का काम संभाल रहे नेता जी के छोटे बेटे कार्तिक परेशान हो गए। देर शाम करीब साढ़े आठ बजे तक जब सब एडिटरों की खाली पड़ी कुर्सियां और खबर एडिट करने वाला कोई नहीं का दृश्य कार्तिक तक पहुंचा तो वो बेचैन हो उठे। प्रिंटिंग मशीन पर बैठे इक्का दुक्का लोग। बस ये बात तो एसी बंगलों में बैठे नेता जी और उनके परिवार को पसीने ला रही थी।

काफी सोच विचारकर प्रबंधन ने वाइस प्रेजिडेन्ट संजय सिंघल को भेजा कर्मचारियों के पास। गुस्साए कर्मचारी तो पहले से ही संजय सिंघल को झूठे वायदों का पुलिंदा कहते थे। बेचारा सिंघल तो शर्मा परिवार द्वारा कर्मचारियों को मिट्ठी गोली देने के लिए बलि का बकरा बनाया जाता था। आज तो नौबत ये आ गई थी कि सिंघल को आता देख कई कर्मचारी उसे मारने ही दौड़ पड़े थे। सिंघल तो कार में बैठ भाग खड़ा हुआ। ऐसे में पिक्चर का सीन बदलता है और एंट्री होती है एक्जिक्यूटिव डायरेक्टर राकेश शर्मा का जिन्होंने वायदा किया कि सूर्य इधर से उधर हो जाए, लेकिन परसों यानी 17 अक्टूबर को सभी को तन वाह मिल जाएगी।

शर्मा के काफी मिन्नतें करने के बाद सभी पत्रकार व अन्य कर्मचारी काम को लौटे। आज तो फील्ड में रिपोर्टरों ने भी काम नहीं किया। जैसे तैसे नेता जी अखबार छपवा तो गए, लेकिन कल का एडिशन बड़ा मरा हुआ होगा। लेकिन लाख टके का सवाल क्या परसों तनख्वाह मिलेगी? अगर मिली तो क्या पिछले सभी महीनों का बकाया मिलेगा? अगर नहीं मिला तो क्या फिर गुस्साए कर्मचारियों को नेता जी मना पाएंगे?

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.


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