आपदा पीड़ित उत्तराखंड में ‘बूंद’ टीम को लीड कर रहे पत्रकार मयंक सक्सेना की एक रिपोर्ट

Mayank Saxena : पिछले 25 दिन में उत्तराखंड के अगस्त्यमुनि इलाके में सैकड़ों परिवारों और हज़ारों लोगों से मिलना हुआ…आपदा पीड़ित भी और भरे पूरे भी…ऐसे 100 से अधिक परिवार जिनका कोई न कोई परिजन आपदा में लापता या मृत है…लापता भी ऐसे कि लौटने की क्या उम्मीद की जाए… गांवों में लोगों के घर की छत भी ऐसी कि हर बरसात में किसी और के घर या स्कूल में सोना पड़ता है…हरिजन बस्ती बताती है कि दरअसल जीडीपी के आंकड़ों में सरकार आगे ऋण (माइनस) – का चिह्न लगाना भूल जाती है…

कंडारा गांव की माधुरी कक्षा 11 में है…10वीं में फर्स्ट डिवीज़न थी…दलित परिवार से है…पिता केदारनाथ में खच्चर चलाते थे…लौट कर न आ पाए…रोती है लेकिन हमसे उम्मीद की बूंद भी ले जाती है…कहते हुए कि खूब पढ़ूंगी… भटवारी सुनार गांव के हर्षपाल के भाई और पिता भी केदारनाथ में बह गए…हरिजन ही है… जलई नाम के गांव में 7 परिवारों के 8 बेटे केदारनाथ से न लौट पाए…हरीश लाल की मां रो कर मुझसे लिपट जाती है और कहती है कि तुम भी मेरे बेटे हो न…अपने भाई को ढूंढ लाओ… गौतम और सुनील दोनों खच्चर चलाते थे…पिता और मां दोनों इंतज़ार में हैं कि दोनों लौटेंगे…नाम पूछते ही फफक कर रो पड़ते हैं…साथ में मैं और Amit Dharmendra Sharma भी…

हम यहां उम्मीद की कुछ बूंदें दे कर फिलहाल यहां से GuptKashi , Rudrapryag के लिए निकल रहे हैं…हम जानते हैं कि हम न कुछ कर पाए हैं और न कुछ बदल पाएंगे…सिर्फ ये कि पैदा करने वालों के अलावा अपने एक और बहुत बड़े परिवार को कम से कम भरोसा दिला पाएंगे कि दुनिया एक रोज़ ज़रूर बदलेगी…पंछी और बादल की तरह हम भी शायद बन पाएं ख़ुदा के डाकिए…शायद कही कोई ख़ुदा हो जो इंसानों और कुछ इंसानों में भेदभाव न करता हो… आप सब अब हमारा परिवार है…हम फिर लौटेंगे…फिर मिलेंगे…उम्मीदें कायम रहेंगी…बूंदें बनाती रहेंगी…झरने…झील…नदी और सागर… सरकार से कुछ नहीं कहेंगे…हमको भी शर्म आती है… ज़िंदाबाद…

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बूंद की गूंज : बूंद Boond के मिशन उम्मीद उत्तराखंड में कुछ लोगों ने हमको इस कदर सहयोग किया कि हम कभी सोच भी नहीं सकते थे…ऐसा ही एक संगठन है GOONJ …. गूंज एक चिर परिचित संगठन है…और अंशु गुप्ता को विशेष धन्यवाद जिन्होंने न केवल बूंद की टीम को लगातार राशन, दवाएं और ज़रूरत के सामान मुहैया कराए जिसे हमारे वालंटियर्स आपदा प्रभावित इलाकों में घर घर तक पहुंचाते रहे…बल्कि शेओजी और अंशु गुप्ता से हमको लगातार नैतिक और मानसिक समर्थन भी मिलता रहा… गूंज की मदद और भरोसे के बिना शायद हम जितना काम कर पाए हैं…न कर पाते… गूंज की पूरी टीम को बूंद के पूरे परिवार की ओर से आभार…

पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.

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