आम बोलचाल में भी लोगों की भाषा द्विअर्थी और अश्लील हो गई है

Sanjaya Kumar Singh : पत्रकारिता और जनसंचार में अनुसंधान कर रहे आशीष कुमार ने रेडियो जॉकियों की भाषा पर एक टिप्पणी लिखी है। उनके मुताबिक रेडियो की भाषा पर अश्लीललता का लेप चढ़ा दिया गया है। एक शो में उद्घोषक साहब कुछ महिलाओं और बच्चों की प्रशंसा करते हुए कह रहे थे – “देखो इन्होंने अपराधियों की कैसे कह कर ली।” इन शब्दों के साथ वह उनकी पीठ थपथपा रहे थे। एक अन्य मामले में कहा गया – “कुछ किया तो डंडा हो जाएगा।” ऐसी भाषा बोलने वालों में महिलाएं भी हैं।

मैंने भी इसे महसूस किया है और देखता हूं कि कभी-कभी तो द्वीअर्थी संवाद बोलने के बाद श्रोताओं को दूसरा वाला अर्थ समझने के लिए भिन्न तरह से पर्याप्त संकेत भी दिए जाते हैं। वैसे, मेरा मानना है कि ऐसा सिर्फ रेडियो पर नहीं हो रहा है, आम बोलचाल में भी लोगों की भाषा ऐसी ही हो गई है। एक हास्य कलाकार ने टीवी कार्यक्रम में दीया मिर्जा से नाम पूछा। उसने कहा, दीया। राजू ने पलट कर पूछा – किसको? टीवी – रेडियो पर तो इस तरह की भाषा का मकसद हो सकता है पर लोग जाने-अनजाने बगैर हिचक ऐसी भाषा बोलते हैं उसका क्या किया जाए। लड़कियां और बच्चे भी अब यह कहते सुने जा सकते हैं, "उसकी तो फटती है या फट गई। उसकी ले ली आदि।" मेरे एक परिचित का मामला और दिलचस्प है। "डंडा कर दिया" उनका तकिया कलाम है। इतना कि लोग उन्हें भी डंडा कर देते हैं और वो सगर्व बताते हैं। नतीजा यह है कि वर्षों से उनके साथ रहने वाली उनकी बीवी भी डंडा करने लगी हैं। और कोई ताज्जुब नहीं कि उनके बच्चे भी ऐसा ही बोलें।

वरिष्ठ पत्रकार संजय कुमार सिंह के फेसबुक वॉल से.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *