आरटीआई के दायरे में आता है सहारा समूह?

मुंबई। सहारा ग्रुप की दो कंपनियों द्वारा गलत तरीके अपना कर फंड जुटाए जाने के लंबे समय से चल रहे मामलों के मद्देनजर लोग सेबी से इस ग्रुप के बारे में तरह-तरह के सवाल पूछने लगे हैं। सेबी से सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत इसी तरह का एक सवाल किया गया है कि क्या लखनऊ का यह ग्रुप आरटीआई के दायरे में आता है?

इस मामले में आरटीआई के तहत किए गए आवेदन को जब सेबी ने खारिज कर दिया, तो ऐप्लिकेंट ने एपेलेट अथॉरिटी से संपर्क किया। हालांकि, वहां भी यह ऐप्लिकेशन खारिज हो गई। मार्केट रेग्युलेटर सेबी, सहारा ग्रुप के साथ उसकी दो कंपनियों द्वारा जुटाई गई 24,000 करोड़ रुपए की राशि को निवेशकों को वापस कराने के मामले में लंबे समय से उलझा हुआ है।

सेबी फिलहाल असल इन्वेस्टर्स की पुष्टि कर उन्हें फंड वापस करने में जुटा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक, सहारा द्वारा रीपेमेंट के लिए सेबी के पास जमा कराए गए 5,120 करोड़ रुपए के फंड से अभी असल निवेशकों को पैसा लौटाने का काम चल रहा है। इधर, सहारा ने दावा किया है कि वह इन दो कंपनियों के बॉन्ड होल्डर्स को 20,000 करोड़ रुपए से अधिक का फंड लौटा चुका है। उसका दावा है कि अब उसकी बाकी देनदारी उसके द्वारा जमा कराई गई कुल 5,120 करोड़ रुपए के फंड से कम ही बैठती है।

इस बीच, सेबी को 14 मार्च को किसी शख्स ने आरटीआई ऐप्लिकेशन भेजी। इसमें पूछा गया था कि क्या सहारा इंडिया परिवार आरटीआई ऐक्ट के तहत आता है या नहीं? हालांकि, मार्केट रेग्युलेटर सेबी ने 5 अप्रैल को अपने जवाब में कहा कि सेबी के पास भेजी गई ऐप्लिकेशन में दिए गए सवाल के बारे में कोई इंफर्मेशन नहीं है। इसके बाद सवाल करने वाले ने इस महीने की शुरुआत में सेबी के एपेलेट अथॉरिटी के यहां याचिका दाखिल की। इसमें भी यही जानकारी मांगी गई थी। (भाषा)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *