आलोक तोमर के कर्जदार डा. जेके जैन को सुप्रिया ने चेताया

डा. जेके जैन को मीडिया वाले अच्छी तरह जानते होंगे. जैन टीवी के मालिक हैं. डाक्टर भी हैं. नेता टाइप चीज भी हैं. टिकट पाने, चुनाव लड़ने और मंत्री बनने की अदम्य इच्छा लिए इधर उधर नेताओं के यहां मुंह मारते घूमते फिरते रहने वाला यह डाक्टर कई मामलों में बहुत बदनाम है. जैसे, अपने चैनल में काम करने वालों को पैसे न देना. ठगी कर करके भारी मात्रा में पैसे बनाते जाना. दो नंबर का काम करके पैसे इकट्ठे करते जाना. चैनल के नाम पर दाएं बाएं से पैसे उगाहते जाना.

इस तरह के कारनामों के कारण डा. जैके जैन को गरियाने वाले भारी मात्रा में पैदा हो चुके हैं. जैन के पीड़ितों में आलोक तोमर भी थे. आलोक जी जब तक जीवित रहे, डा. जैन को पानी पी पी कर गरियाते रहे क्योंकि उन्हें जैन से इसलिए घृणा थी कि उस आदमी ने उनसे अपने चैनल में तीन महीने तक सवा लाख रुपये महीने के हिसाब से सेवाएं ली, और दिया एक धेला भी नहीं. इसी कारण आलोक तोमर ने डा. जैन की न सिर्फ एक बार पब्लिकली पिटाई की थी, बल्कि मौका मिलने पर जैन के कारनामों की पोल भी खोलते रहते थे. यही जैन कल स्वर्गीय आलोक तोमर की धर्मपत्नी और वरिष्ठ पत्रकार सुप्रिया राय से एक आयोजन में टकरा गए.

टकराए नहीं बल्कि सुप्रिया ने दौड़ाकर इन्हें पकड़ा. गीत-संगीत के एक आयोजन में जैन जब मंच से भाषणनुमा कुछ वक्तव्य दे रहे थे तो नीचे बैठीं सुप्रिया ने अपने आस पड़ोस के लोगों से वक्ता के बारे में जानना चाहा तो उन्हें जेके जैन नाम बताया गया. सुप्रिया ने जब यह पता कर लिया कि यह वही जेके जैन जैन टीवी का मालिक है, जिसने आलोक को कई महीने की सेलरी नहीं दी थी और आलोक ने कसम खाया था कि इस जैन को बर्बाद करके दम लूंगा तो अचानक सुप्रिया का पारा गरम होना शुरू हुआ. वक्तव्य खत्म कर जैन कुछ देर नीचे अपनी सीट पर बैठे और फिर चल दिए. सुप्रिया ने जैन को जाते देखकर पीछे से उन्हें दौड़ाया और गेट पर पकड़ लिया.

सुप्रिया ने अपना परिचय दिया. आलोक तोमर का नाम सुनते ही जेके जैन ने आलोक के गुजरने पर अफसोस जताते हुए शादी के वक्त समारोह में शामिल होने जैसी कुछ बातें कहीं. जेके जैन जब विदा लेकर जाने को हुए तो सुप्रिया ने अपना मौन तोड़ा और कहा- मिस्टर जैन, आप आलोक के कर्जदार हैं, मुझे आपसे बस इतना कहना है. यह सुनते ही जैन के चेहरे का रंग उजड़ गया. वे बोले- आप आइए, मिलिएगा, हम लोग बात करेंगे. तब सुप्रिया ने कहा- जैन साहब, क्यों आउंगी, और क्यों मिलूंगी, आपको बस ये बताना था कि आपने आलोक के साथ ठीक नहीं किया. आपसे मैं पहली बार मुखातिब हूं. आलोक नहीं हैं, इसलिए मुझे लगा कि मैं उनकी बात आप तक पहुंचा दूं. वे होते तो शायद आप यहां से सलामत न जा पाते. कुछ ऐसी बातें बोलती रहीं सुप्रिया. डा. जैन अच्छा अच्छा जैसे बोलते हुए तेजी से वहां से भाग लिए. उनके साथ खड़े दो तीन डाक्टर परे वाकये को देखकर भौचक थे.

अपने मोबाइल पर भड़ास की खबरें पाएं. इसके लिए Telegram एप्प इंस्टाल कर यहां क्लिक करें : https://t.me/BhadasMedia

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *