आलोचना का आदर और सवालों का सम्मान करने से संवाद की गुंजाइश बची रहती है : राणा यशवंत

Rana Yashwant : मेरी राय में आप जब किसी जिम्मेदार-जवाबदेह ओहदे पर होते हैं तो आपसे सवाल होंगे। आपकी आलोचलना होगी। आलोचना का आदर और सवालों का सम्मान करने से संवाद की गुंजाइश बची रहती है। फेसबुक पर मेरे एक पोस्ट के बाद मेरे कुछ दोस्तों ने सवाल किए । मीडिया खबर के पुष्कर भी उनमें से हैं – बाकियों से मैं परिचित नहीं हूं। यह बात है सही है कि जब मैं महुआ का ग्रुप एडिटर था तो कंपनी ने यूपी का चैनल बंद किया ।

हालात ऐसे थे कि जिन साथियों के बीच मैंने काम किया उनमें से कुछ के शक का शिकार हो गया। लेकिन मैनेजमेंट के साथ मैं इस बात पर अड़ा रहा कि विदाई अगर होनी है तो सम्मानजनक तरीके से हो और हुई भी। इसके बाद मैं उन्हीं लोगों की नौकरी के लिये अलग अलग चैनलों में सबसे ऊपर के ओहदे पर बैठे अपने मित्रों से आग्रह करता रहा । थोड़े दिनों में ज्यादातर की नौकरी लग गई और जिनके लिये मैं कुछ नहीं कर पाया उनका साथ किस्मत ने दिय़ा।

मैं आज जहां काम कर रहा हूं वहां महुआ न्यूज के दस लोग हैं – ये मेरे वही काबिल दोस्त हैं जिनका साथ मुझे हालात की वजह से छोड़ना पड़ा था। मेरी डायरी में आज भी कुछ नाम बच गये हैं जिनकी नौकरी नहीं लग सकी है । उनका ऊंच नीच देखता-पूछता रहता हूं। मैं ईश्वर नहीं, सवालों से परे नहीं, आलोचनाओं से अलग नहीं लेकिन इतना जानता हूं कि मैंने आजतक जितने लोगों के साथ काम किया उनमें से 90 फीसदी के साथ निजी रिश्तों में जीता हूं । फैसले पूर्वाग्रह पर नहीं काबिलियत या फिर गलती के आधार पर लिए।

जब आजतक में आउटपुट हेड था तो एक साथी को निकालने की नौबत आ गई। मैंने उससे कहा कि देखो अनुशासन कह रहा है कि मैं तुम्हें कहूं कि तुम यहां से अब चले जाओ। मगर कल शाम तुम वहां जाकर बात कर लेना। एक बड़े चैनल में सम्मानजनक ओहदे पर उसकी नौकरी लग गई और आज भी वो मेरा मित्र है। हां ये सही है कि दसेक फीसदी लोग टीवी न्यूज में हैं जिनको मैंने पसंद नहीं किया और वो सिर्फ इसलिए कि वो वाकई इस पेशे के लिए नहीं है। मुगालता उन्हें इतना ज्यादा रहता है कि आप उनके मुंह लगकर अपने बारे में अपनी राय बिगाड़ेंगे । मैंने उनके मरने जीने के बारे में कभी नहीं सोचा और ना सोचूंगा।

Chitra Tripathi Achchhi soch hai aapki Sir………..

Amit Bhardwaj ye kin chakkaro me fans gaye rana ….

Atul Agrawaal बिलकुल सही. मैं इन तर्कों का गवाह भी हूं. व्यक्तिगत तौर पर पिछले 10 वर्षों से ज्यादा वक्त से आपके साथ हूं, भले ही साथ काम ना किया हो मगर सोच से बखूबी परिचित हूं.

Shailendra Jha Rana sir being the junior employee jisne aapke sath kaam kiya,sare junior employees ke man ki baat apko btata hun,is ghatna ke baad aapka kad aur saboki nazar me badh gya hai,aap in sab baton par dhyan na dijiye,apko koi justification nhi dena aur kam se kam usko sawal poochne ka katai haq nhi hai aapse jo sarafaraz saifi ko idhar udhar sammanit krta chalta ho

Chandan Pratap Singh इसमें कोई शक़ नहीं कि मेरे मित्र राणा यशवंत की सोच हमेशा सही रही है। नाम लेना सही नहीं होगा लेकिन मैं जानता हूं कि राणा ने अपने मित्रों की भलाई के लिए किस हद तक जाकर कई बार काम किया है। जो राणा को नहीं जानते हैं, वो आलोचना कर सकते हैं। लेकिन मैं हमेशा अपने इस मित्र का दिल से सम्मान करता रहूंगा।

Aditi Sethi i agree sir….and respect your thoughts….

Amita Nandal Sb kismat ka khel h…kbhi kisi ko mukammal jahan nhi milta.. bt jo hona h..use b koi nhi taal skta..jitne muh utni baatein..

Mohammad Irfan Sheikh The Holy Gita explains everything,we simply work fruit not in our hand….

Udit Goyal Achchhi Soch hai. Boss.

Anuranjan Jha Rana Yashwant जिन्हें कोई गलतफहमी या मुगालता हो उन्हें अपने हाल पर छोड़ देना चाहिए…कुछ लोग ऐसे हैं इस इंडस्ट्री में जिनके अचकन में यह दोनों है। आपको इऩ सबसे परेशान नहीं होना चाहिए .. आप ऐसे ही आगे बढ़ते रहिए… आमीन

M Raj Singh राणा मुझे भी व्यक्तिगत तौर पर शायद ना जानते हों, लेकिन मैं मानता हूं और जानता हूं कि उन्हें रिश्ते निभाना बखूबी आता है और महुआ के साथियों के लिए वो आज भी साथी हैं।See Translation

Manoj Bhawuk Samundar hai …kuchh moti bhi milenge..kuchh ghonghe bhi. kahin bhi, kabhi bhi, koi bhi …sabko khush ya santusht nahin kar sakta.

Tanseem Haider aap sa boss kahan milega sir

Manu Bhatt me aapko apne career ke shuruwaat se hi janta hun…zee me bhi aapke saath kaam karne ka mauka mila aur aaj aapke saath shayad 12 saal baad kaam kar raha hun lekin is beech bhi aapse baat hoti thi aur aap pahchanne se kabhi mana nai karte the. aapne hamesha madad ki he…me aapka shukraguzar hun personal taur par aap sambhandh rakhte he isse me puri tarah sahmat hun…

Basant Nigam vyaktigat risthon mey tto aapsey kabhi kisi ko shikaayat ho hi nahi sakti

Deepak Sharma Ranaji aapko safaai dene kee zaroorat nhi .. Aap ne hamesha zaroortmndo ka sath diya jo bas me tha vo kiya… Agar emotional na hote to likhte kyun.. Kayi bde patrakar to react bhi nhi kar rhe

Ashish Jain mujhe yaad hai raanja ji aap ke saath aajtak ke wo din ..7 mahine intern,aur naukri ki tnshn ..aapse bahut sikha …aur aapko virtul world m bahut pada aur samjha …ajit sir ke baad rana ji ki sabse jyaada taarif suni h …khbaro ko samjhe aur khehne m bada fark hai …aapka yh mantr mujhe aaj bhi yaad hai …….yh sach hai ki aapne vyawastha badalne ki kosish ki h ..aapka abhinandan

वरिष्ठ टीवी जर्नलिस्ट राणा यशवंत के फेसबुक वॉल से.

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