आशंकाओं के ‘कुहासे’ में सीएम का आगमन, पर चमाचम होने लगा शहीद बाबूलाल का गांव

इलाहाबाद। शहीद के गांव शिवलाल का पूरा में मुख्यमंत्री का आगमन आशंकाओं के ‘कुहासे’ में घिर गया है। उन्हें शहीद के घर आकर परिजनों से मुलाकात करने में दो दिन बाकी रह गए हैं। 25 जनवरी को सुबह साढ़े नौ बजे मुख्यमंत्री अखिलेश के यहां आने का समय निर्धारित किया गया है, पर बेईमान मौसम ने ‘दगा’ देने की शुरुआत कर दी है। दो दिनों से अचानक मौसम खराब हो गया है। दोपहर के दो तीन घंटे को छोड़कर ज्यादातर समय घना कोहरा है। ऐसे में कयास इस बात के भी लगाए जा रहे हैं कि घने कोहरे के बीच मुख्यमंत्री का शहीद के घर आने का प्रोग्राम कहीं कैंसिल न हो जाए।

बहरहाल, मुख्यमंत्री के गांव आने की घोषणा ने सरकारी अमले को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया है। शहीद के गांव शिवलाल का पूरा की तकदीर और तस्वीर दोनों ही चमकने लगी है। सड़क, पुलिया, गली-कूंचे से लेकर नापदान तक दुरूस्त किए जा रहे हैं। महीनेभर गायब रहने वाले गांव के एक सफाईकर्मी को कौन कहे, बीस से भी ज्यादा सफाईकर्मी गांव में सफाई करने में दिनरात डटे हुए हैं। पांच-छह लेखपाल, बीडीओ, तहसीलदार से लेकर इलाके का थानेदार भी हाथ बांधे गांव वालों की सेवा में हाजिर। शिवलाल का पूरा में इन दिनों लोकतंत्र और सरकार का बेहतर समन्वय देखने को मिल रहा है।

कल तक एक चपरासी और होमगार्ड को ‘साहेब’ कहने के आदी आजकल डीएम, पुलिस कप्तान के भाई साहब व दादाजी, दादीजी का संबोधन सुन पहले तो चौंककर अपने अगल-बगल देखते हैं कि इतनी आत्मीयता भरा संबोधन किसी और के लिए होगा, पर दुबारा अपनी तरफ इशारा देख प्यारभरा संबोधन इन अदने से गंवई लोगों को अहसास करा देता है कि वो ही देश के असली मालिक हैं और सरकारी अफसर उनके सेवक हैं। बुधवार को दोपहर शिवलाल का पूरा गांव का कुछ ऐसे ही नजारा देखने को मिला। गांव को चमकाने में सरकारी अमला जुटा हुआ है। उसकी तेजी देखते ही बन रही है। गांव के उत्तर तीन सौ मीटर दूर लखनऊ-इलाहाबाद राजमार्ग के किनारे हैलीपैड बनाया जा रहा है। यहां मुख्यमंत्री का उड़नखटोला उतरेगा। शहीद के घर तक आरसीसी रोड बनवाई जा रही है। दरवाजे पर इलाकाई सांसद ने सोलर लाइट लगवा दी, वह जलने भी लगी है। स्मारक स्थल के लिए ढाई सौ वर्ग मीटर और खेती के लिए चौबीस सौ सत्तर वर्गमीटर जमीन का पट्टा दे दिया गया है।

लोहिया समग्र ग्राम का भी मिल सकता है दर्जा : कौड़िहार ब्लाक की ग्रामपंचायत मलाक बलऊ का छोटा सा मजरा है शहीद का गांव शिवलाल का पूरा। विकास योजनाओं और अफसरों के झूठे सरकारी आंकड़ों को मुंह चिढ़ाते इस गांव में विकास योजनाओं की असली तस्वीर देखने को मिल रही है। बारह दिन पहले शहीद की लाश उसके घर की उस डेहरी तक भी नहीं पहुंच सकी, जिस डेहरी पर शहीद बाबूलाल पला, बढ़ा और जवान हुआ। वजह, शहीद के दरवाजे तक जाने के लिए रास्ता नहीं था। आजादी के पैंसठ साल बीत गए पर यहां के लोग लालटेन युग में जीवन बिताने को मजबूर हैं। वजह, इस गांव में बिजली तक नहीं है। इलाके के बीडीओ अरूण कुमार से बातचीत के दौरान चौंकाने वाले तथ्य मिले। शहीद के घर से दस कदम दूर कुर्सी पर बैठे धूप सेंकने वाले बीडीओ को पता ही नहीं है कि इस गांव का विद्युतीकरण हुआ भी है कि नहीं। गांव वाले खुश हैं कि मुख्यमंत्री आएं या न आएं पर इतना तो है कि इसी बहाने गांव चमाचम हो जा रहा है।

शहीद के गांव से लौटकर शिवाशंकर पांडेय की रिपोर्ट.

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