आशीष व्यास के खिलाफ भड़ास पर खबर किसी चोर ने प्लांट कराई है

: समर्पण और ईमानदारी की मिसाल हैं आशीष व्यास : भारत में प्राचीन काल से ही परंपरा रही है, कि पंच जिस बात को कह देते हैं उसे पूरा समाज स्वीकार करता है, लेकिन भारत का यह भी सौभाग्य रहा है, कि न्याय की कसौटी पर खरा उतरने के कारण पंचों को परमेश्वर की उपाधि से नवाज़ा जाता था। उसी भारत में आज पंचों की तो बात ही छोड़िए, निन्यानवे चोर मिलकर एक ईमानदार को ठग, चोर, लापरवाह और भी न जाने क्या-क्या सिद्ध कर देते हैं, और इससे भी बड़े दुर्भाग्य की बात यह है, कि समाज उन निन्यानवे चोरों की बात संख्या बल के आधार पर स्वीकार कर लेता है।

इस भूमिका के पीछे भड़ास पर प्रकाशित एक खबर ‘हिंदुस्तान, बरेली की लुटिया डुबो दी आशीष व्यास ने, सर्कुलेशन हुआ आधा’ है। यह खबर निन्यानवे में से ही किसी एक चोर ने प्लांट कारवाई है, क्योंकि आशीष व्यास जैसा संपादक होना तो बहुत बड़ी बात है, उन जैसा इंसान ही होना काफी है। पत्रकारिता अथवा समाज में व्यक्ति के लिए अगर कोई मानक होते होंगे तो वह समस्त मानकों पर अक्षरशः खरा उतरने वाले इंसान हैं। उनकी ईमानदारी, व्यावहारिकता, कर्तव्यपरायणता, निष्ठा, समर्पण आदि की चोरों को छोड़कर हर इंसान प्रशंसा करता है। वह रिपोर्टरों से कमीशन नहीं लेते, ब्यूरोचीफ़ पैसे लेकर नहीं बनाते, यही बात इन चोरों को परेशान किए हुए है। वह बहुत ही उदार व्यक्ति हैं तभी सभी चोरों को बेरोजगार नहीं कर पा रहे हैं।

सिटी इंचार्ज संजीव द्विवेदी को भी वह पानी सिर से ऊपर न जाता तो नहीं निकाल पाते, पर उनके कुकृत्य जब आम चर्चा का विषय हो गए तो उनकी संजीव द्विवेदी को हटाने की मजबूरी ही हो गयी थी और इस संजीव द्विवेदी को हटाने की समूचे रूहेलखण्ड क्षेत्र में व्यापक प्रशंसा हुई थी। रही सर्कुलेशन आधा होने की बात, तो अखबार की दुनिया में विज्ञापन, प्रसार, संपादकीय, तीनों विभाग अलग-अलग काम करते हैं। हिंदुस्तान अखबार में इस विभाजन का और भी अधिक कड़ाई से पालन होता है। संपादक सर्कुलेशन के आदमी से बात तक नहीं करता। ऐसे में वह सीधे और एकमात्र दोषी कैसे हो सकते हैं? यशवंत जी, आशीष व्यास जैसे व्यक्ति या संपादक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराने के बाद अंगुलियों पर गिनने लायक ही मिलेंगे, ऐसे में उनकी बेवजह निंदा करना पत्रकारिता के साथ-साथ समूचे समाज को नुकसान पहुंचाना ही है, पर मुझे आशा है, कि भड़ास चोरों के मंसूबे कभी भी पूरे नहीं होने देगा।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *