आसाराम भी पत्रकारों को लप्पड़-झापड़-तमाचा-घूंसे मारने का उस्ताद था…

Yashwant Singh :  इस निरीह पत्रकार का चेहरा बार-बार मेरी आंखों में घूम रहा है… कितने शराफत से बस केवल यह ही बोल पाया था कि… ''स्वामी जी, अगर मोदी प्रधानमंत्री बन गए तो…'' … और स्वामी जी ने खींच के मारा चटाक… ओह.. 91 साल के इस बुजुर्ग शंकराचार्य के स्खलन पर मुझे अफसोस तनिक न हुआ क्योंकि ये प्रोफेशनल साधु-संत अपने ओरीजनल खाल में हम सामान्य मनुष्यों से भी गए गुजरे हुए हैं… आसाराम, स्वरूपानंद, रामदेव… इनकी कामनाएं, इनकी आकांक्षाएं, इनकी महत्वाकांक्षाएं, इनकी लिप्साएं, इनके भोग, इनके धत्कर्म अनंत हैं…

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आसाराम भी पत्रकारों को लप्पड़-झापड़-तमाचा-घूंसे मारने का उस्ताद था… गाजियाबाद से लेकर भदोही तक दर्जनों जगह उसने यह हरकत की… आज वह भोग रहा है… यह शंकराचार्य स्वरूपानंद भी भोगेगा.. एक स्ट्रिंगर, रिपोर्टर, जर्नलिस्ट अपनी ड्यूटी कर रहा होता है, जब वह किसी बड़े आदमी से कोई सवाल पूछ रहा होता है तो… उसे किस हैसियत से आप मार सकते हो? अगर आप गरीब निरीह मीडिया वालों पर हाथ उठा रहे हो तो समझा जा सकता है कि आपके अंतःखाने में बड़ा गड़बड़झाला चल रहा है, तभी आप खुद को सबका बाप समझ बैठे हो… ऐसे अहंकारियों को समय खुद ब खुद सबक सिखाता है… इनके किले, हवेली, महल, राजपाठ, मठ, मंदिर, धंधा, नौटंकी जब सब धूल में मिल जाते हैं, समाप्त हो जाते हैं तब इन्हें अहसास होना शुरू होता है कि उनने क्या क्या भूल-गल्तियां की हैं… शेम शेम शंकराचार्य स्वरूपानंद…

मूल खबर…

91 साल का कांग्रेसी शंकराचार्य स्वरूपानंद क्रोध पर न पा सका काबू, पत्रकार को थप्पड़ मारा
http://bhadas4media.com/article-comment/17401-2014-01-23-08-28-34.html

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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