आ गया ‘रंगदार’!

68 दिन तक डासना जेल में बंद रहने के बाद वापस दिल्ली लौटा तो कुछ भी ठिकाने पर न मिला. कहीं लैपटाप व कंप्यूटर से हार्ड डिस्क लापता तो कहीं नेट का कनेक्शन ठप. मोबाइल, आफिस, कंप्यूटर, आर्थिक हालत…. सब कुछ इधर-उधर और खस्ताहाल. जोड़-गांठ कर अब जाकर लिखने-पढ़ने लायक कामचलाउ सिस्टम फिर से तैयार कर पाया हूं.

और, ये जो कामचलाउ सिस्टम है, जिसे कोई भी एक पढ़ा-लिखा आदमी अकेले दम पर तैयार कर लेता है, अपनी बात कह लेता है, मीडिया व सत्ता के भ्रष्टाचारियों के लिए आतंक-मुसीबत का पर्याय बन चुका है. जो लोग खबरों, सत्ता, सिस्टम के ठेकेदार बने बैठे हैं, न्यू मीडिया के आने के बाद उनकी पोल खुलने लगी है, इसलिए उन्हें दर्द हो रहा है, वे तरह तरह से रिएक्ट कर रहे हैं, तरह तरह की बातें-आरोप कह बोल रहे हैं. पर इन नौटंकियों-धमकियों-प्रताड़ना के कारण सच कहने का सिलसिला रुकने वाला नहीं बल्कि और ज्यादा तेज होने वाला है क्योंकि अब जन जन के हाथ में यह कामचलाउ लेकिन धारधार सिस्टम है जिसके जरिए सच बात सामने हर हाल में आ ही जाती है.

जो चीज सबसे पहले कहना चाहूंगा वो ये कि दैनिक जागरण के संजय गुप्ता व निशिकांत ठाकुर और इंडिया टीवी के रजत शर्मा व विनोद कापड़ी का मैं दिल से आभारी हूं. इन लोगों के कारण एक अनजाने व अदने से यशवंत को पूरे देश के लोग जानने लगे और इस यशवंत के साथ-साथ भड़ास4मीडिया की ख्याति-कुख्याति में जबर्दस्त इजाफा हुआ है. सड़क छाप यशवंत देखते ही देखते हीरो बन बैठा, न्यू मीडिया का नायक बन बैठा, यह उपलब्धि दिलाने वालों के प्रति अगर दिल से आभार न जताऊं तो मैं स्वार्थी कहलाऊंगा. एक सच्ची कहानी बताना चाहूंगा.

अमर उजाला के कर्ताधर्ता रहे स्व. अतुल माहेश्वरी जब जिंदा थे तो एक बार मैंने उनको फोन किया. बड़ी मुश्किल से महीनों-सालों बाद उनका नंबर मिला था. तब सीबीआई व सीएलबी रिश्वत प्रकरण के कारण अमर उजाला व अतुल माहेश्वरी भड़ास की सुर्खियों में बने हुए थे. उनका नंबर मिलने के बाद मैंने उनका पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया तो उन्होंने बड़े प्यार से कहा कि यशवंत, आपने अबसे पहले तो पक्ष नहीं लिया, जबकि मेरे खिलाफ दर्जनों खबरें प्रकाशित की तो आज ऐसा क्या हो गया जो आप पक्ष लेने के लिए फोन कर बैठे.

मैंने विनम्रता से कहा कि सर, आपका नंबर था नहीं मेरे पास, आज मिला तो आज फोन कर पाया, बाकी अगर आपको लगता है कि पहले प्रकाशित खबरों में कोई तथ्य गलत है तो मैं उसे तुरंत ठीक करने को तैयार हूं. इस पर अतुल जी हंसे और बोले, यार यशवंत, मैं कतई बुरा नहीं मान रहा. आपने बिना कुछ लिए दिए हम लोगों की ब्रांडिंग की है, यह तो मेरे लिए अच्छी व फायदे की बात है. और, आजकल निगेटिव ब्रांडिंग का ही दौर है, इसलिए मैं तो इसे ठीक मानता हूं. आप करो, उससे मुझे नुकसान नहीं बल्कि लाभ हो रहा है.

और, अतुल माहेश्वरी वाली वही बात मैं दैनिक जागरण व इंडिया टीवी के मैनेजमेंट से कहना चाहूंगा कि आप लोगों ने जो मुफ्त में किया है, उससे मुझे बड़ा लाभ मिला है. बड़ा नाम हुआ है. जारी रखिए इसे. आप लोगों ने मुझे बदनाम करके महान बना दिया है. पूरे देश से मेरे पास फोन आ रहे हैं और लोग मेरी हिम्मत की तारीफ कर रहे हैं. मैं उनसे यही कह रहा कि इसमें ''मैंने कोई हिम्मत किया'', ऐसी कोई बात नहीं, हिम्मत तो दैनिक जागरण और इंडिया टीवी ने किया है मुझे सुर्खियों में लाने का फैसला लेकर. और, इस बहाने उन्होंने मुझे अमर कर दिया है.

लिखने पढ़ने वाले इस पेशे में एक मीडियाकर्मी दूसरे से कलम की बजाय पुलिस, कोर्ट, कचहरी, जेल की भाषा में बात कर रहा है तो वह पत्रकार नहीं, मीडिया कलाकार है जो सच्चाई नहीं बल्कि कपोल-कल्पना व क्रिएशन बताता-दिखा कर सभी को भ्रमित कर रहा है. भूत प्रेत बाबा नाग नागिन को गढ़ मढ़ कर खबरों की शक्ल देने वाले मीडिया कलाकार जब उधारी को रंगदारी बताते हैं, नानसेंस शब्द को अश्लील बताते हैं तो इसमें असहज व गलत कुछ नहीं. क्योंकि वह ऐसा क्रिएशन अपने मीडिया माध्यम के लिए करते आये हैं और सो, उसे यह सब क्रिएट करने में कोई दिक्कत नहीं. चूंकि वह कलम के जरिए अपनी बात कह पाने में असमर्थ है इसलिए वह गैर-पत्रकारीय साधनों का इस्तेमाल करता है. हम जैसा भुक्खड़, गरीब, मांग-मांग कर जीने खाने वाला पत्रकार इन गैर-पत्रकारीय साधनों का मुकाबला भला कैसा कर सकता है, सो हमारी नियति जेल व थाने में पीड़ित उत्पीड़ित होने की है.

भड़ास शुरू करते समय ही मुझे पता था धमकी, मुकदमों का सिलसिला जेल तक पहुंचेगा और हम लोग फिर भी नहीं माने तो हम लोगों का दिमाग ठिकाने लगाने के लिए गैर-कानूनी रास्ते भी वे लोग आगे अपना सकते हैं. इसलिए अपन लोग अंजाम से अनजान नहीं हैं. इसी कारण भय से भय नहीं खाते क्योंकि डर डर कर रोज मुर्दा की तरह जिंदा रहने से अच्छा है जिंदगी को उत्सव के साथ बेखौफ होकर जिया जाय और सिर्फ एक बार तब मरा जाए जब मौत आ जाए या दे दी जाए. और, जब आप डर से डरना बंद कर देते हैं तो फिर मौत की भी हिम्मत आसपास फटकने की नहीं पड़ती.

मैं अपने पक्ष में कोई सफाई नहीं देने वाला. मैंने जो किया ठीक किया या गलत किया, आप सभी जैसे भी ग्रहण कर रहे हों, ग्रहण करिए. आरोपों, मुकदमों से पहले भी नहीं डरा, आगे भी नहीं डरुंगा. लेकिन इस प्रकरण से संबंधित कुछ चीजें मैं स्पष्ट करना चाहता हूं. पहली तो ये कि पत्रकार, डाक्टर और पुलिस, इन पेशों में फोन आने और जाने का कोई वक्त नहीं होता. कभी भी खबर आ सकती है, कभी भी जानकारी ली जा सकती है, कभी भी मरीज आ सकता है, कभी भी घटना हो सकती है तो मौके पर जाना पड़ सकता है. इसलिए यह कहना कि रात में फोन करना गलत है, बिलकुल गलत आरोप है. रही बात रंगदारी की तो यह स्पष्ट हो चुका है कि उधार शब्द को रंगदारी में बदला गया है. कापड़ी जी ने ऐसा इसलिए किया होगा क्योंकि उनकी पत्नी को मेरे द्वारा कहा गया नानसेंस शब्द बुरा लग गया और सबक सिखाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा कर एक जोरदार फिल्मी सेट, स्क्रिप्ट व कलाकार तैयार कर दिए. निगेटिव रोल का किरदार मुझे दिया गया लेकिन फिल्म खत्म होते होते दर्शक मेरे में हीरो देखने लगे तो इसमें दोष मुझ कलाकार का नहीं बल्कि निर्माता निर्देशक का है.

हम गरीब पत्रकार कहां से जिंदगी जिएं व पोर्टल चलाएं. चंदा, डोनेशन, थोड़ा बहुत विज्ञापन आदि के बाद अगर पैसे की जरूरत पड़ती है तो आदमी उधार ही मांगेंगा, और उन्हीं से मांगेगा जो समर्थ हैं. ये और बात है कि समर्थ लोग नहीं देंगे तो गरीब आदमी यह कहते हुए वापस चला जाएगा कि ''उनसे पहले वो मुएं जिन मुख निकसत नाहिं''. कापड़ी जी से कई बार बात होती रही है. एक बार एक गरीब पत्रकार के जेल में बंद भाई के लिए मैंने उनसे दस हजार रुपये की सहायता मांगी थी लेकिन उनसे लेने की नौबत नहीं आई क्योंकि मेरे पास कहीं और से पैसे आ गए तो मैंने उस पत्रकार को दे दिए. इस बात की गवाही श्रवण कुमार शुक्ला देंगे, जिनके भाई की मदद के लिए मैंने कई संपादकों समेत विनोद कापड़ी को भी फोन किया था.

और, रही साक्षी जी की बात तो उनका कभी दर्शन मैंने नहीं किया. उनसे फोन पर उनसे संबंधित सूचनाओं-खबरों-आवाजाही-गासिप आदि के लिए उनका पक्ष जानने की खातिर कई बार बात हुई है. और, विनोद कापड़ी – साक्षी जोशी से मेरे विवाद की गर्माहट में दैनिक जागरण को मौका दिख गया. उसने भड़ास पर जागरण के अंदर घपलों-घोटालों-छंटनी-उत्पीड़न आदि को लेकर छपी खबरों का बदला निकालने के लिए फर्जी मुकदमा ठोंक दिया और जेल में रखकर सड़ाने की पूरी योजना बना डाली. मैं तो जेल में था ही, भड़ास के कंटेंट एडिटर अनिल सिंह को उठवाकर जागरण वालों ने जेल भिजवा दिया. भड़ास बंद हो जाए, इसलिए लैपटाप व कंप्यूटर के हार्ड डिस्क पुलिसवालों के जरिए निकलवा लिया. जमानत न हो पाए, इस खातिर सारे घोड़े दौड़ा लिए गए. संभव है, कुछ दिनों बाद फिर से कोई फर्जी केस लगाकर हम लोगों को जेल भेज दिया जाए. तो देश का नंबर वन अखबार बताना वाला समूह अपने खिलाफ प्रकाशित खबरों से इतना खार खाया है कि वह लिखना पढ़ना भूलकर सबक सिखाने के लिए सारे हथकंडे आजमा रहा है. आजमा लो भाई. आखिर गरीबों को सताने का सिलसिला कोई नया तो है नहीं. हर जमाने में अगर कोई कामन मैन सच्ची व कड़वी बात साहस के साथ कह देता है तो उसे उसका खामियाजा तरह तरह से भुगतना पड़ता रहा है. कुछ भी नया नहीं है. ऐसे में कुछ भी अलग और नया कहने जैसा कुछ नहीं है. आज के समय का हर आदमी जानता है कि चोर कौन हैं और पीड़ित कौन हैं. चलिए, आप लोग जुल्मो-सितम करते रहिए, हम लोग हैं न आपका निशाना बनने के लिए. पर ध्यान रखिएगा, समय हमेशा एक सा नहीं रहता. पहिया घूमता है. बड़े से बड़े तुर्रम खां एक वक्त जमींदोज हुए दिखते हैं. इसलिए गुरुर, घमंड, सत्ता मद से जितना देर बच सकें, उतना ही अच्छा.

कुछ चीजें सबको पता हैं, जैसे ये कि…

-देश भर को ब्लैकमेल करने वाले अखबारों-चैनलों को कोई पत्रकार पैसे के लिए ब्लैकमेल नहीं कर सकता और न रंगदारी मांग सकता है क्योंकि उसे पता है कि जो खुद ब्लैकमेलिंग व रंगदारी मांगने में उस्ताद होते हैं उन्हें उनकी ही स्टाइल में नहीं हराया, धमकाया जा सकता. इसी कारण मीडिया की बाल की खाल निकालने का काम शुरू करते वक्त ही हम लोगों ने नियम बना लिया कि पैसे के मामले में बेहद ट्रांसपैरेंट रहेंगे.

-सच्चाई बयान करने  के कारण न्यू मीडिया के लोगों के उत्पीड़न का सिलसिला पूरे देश में चल रहा है. रांची में पायनियर अखबार ने एक पोर्टल संचालक पर ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाकर उसे पुलिस के जरिए उठवा लिया और हवालात में डलवा दिया. ऐसी घटनाएं बताती हैं कि अगर आप ब्लाग व पोर्टल को हथियार बनाकर सच कहने का जोखिम उठा रहे हैं तो आप पर किसी भी किस्म का आरोप लगाकर आपका मनोबल तोड़ने के लिए आपको थाने-जेल में डाला जा सकता है.

– ऐसा नहीं है कि मैं जमानत पर बाहर आ गया हूं तो अब सब निरापद है. सत्ता-पुलिस-कोर्ट के साथ साजिशें जारी हैं. मैं फिर कब किस थाने और जेल में होऊं, कुछ पता नहीं. क्योंकि जब भ्रष्ट मीडिया, भ्रष्ट सिस्टम, भ्रष्ट अफसर आदि में किसी के खिलाफ एका हो जाता है तो इनके उत्पीड़न का असर देर तक और दूर तक पहुंचता है. इसलिए यह कह सकता हूं कि भड़ास और यशवंत के भयंकर उत्पीड़न की अभी तो शुरुआत है. आगे आगे देखिए, और होता है क्या क्या.

और, आप लोगों को एक जानकारी दे दूं कि डासना जेल से निकलते ही डासना पुलिस चौकी के बगल में ठेके से वोदका का एक पव्वा लिया और ड्यू कोल्डड्रिंक में मिलाकर पीते हुए लौटा. मतलब, जिंदगी अपन अपनी ही स्टाइल से जियेंगे, किसी के कहने धमकाने परेशान करने दबाव डालने से नहीं बदलेंगे. आप भले ही हम लोगों को बेहया, थेथर, जूताखोर कह लें, पर अपन इसे जीवन को उत्सवधर्मिता के साथ जीना मानते हैं. मैंने कभी खुद को शरीफ और छुई मुई नहीं बताया और न ही ऐसा होने की इच्छा है. जेल में रहा तो वहां न पीने का जश्न मनाया, सामूहिकता के उल्लास को जिया, बाहर निकला तो वोदका पीते गाना गाते बतियाते पहले जैसा हो गया. यही अंतर्विरोध ही जीवन है और ऐसे अंतर्विरोध ही विकास के रास्ते हैं जिससे चलकर आप अंतर्विरोधों के आगे निकल जाते हैं और सब कुछ से मुक्त हो जाते हैं, फिर न अंतर रहता है और न विरोध. सब कुछ मस्त, बिंदास और शफ्फाफ.

मैंने जेल से छूटने के तत्काल बाद मोबाइल के जरिए फेसबुक पर एक लाइन लिखा कि ''जेल टूर करके आ गया रंगदार''. उस पर ढेर सारे साथियों ने कमेंट किया है, उन सारे कमेंट्स का आनंद लीजिए. कमेंट करने वाले सभी दोस्तों, शुभचिंतकों को मैं थैंक्यू कहता हूं.

Yashwant Singh : Jail tour se laut aaya ''Rangdaar''!

Gaurav Gupta sir pranaam…. Kitna Kast ke din Bitaye Hai Aapne…Per Aapke Jajbe Ko salaam. Aapne Kaha Tha ki, Media ek Sangharsh Hai Aur aaramdeh Pesa Nahi, Aur ise Humne Khud se Chuna Hai, Lekin Sir is line me beimaan Ek sath Hai ….
Per hum Bahut Khus Hai Ki Hamare Bde Bhai Bapas aa gaye,,, ab Na jane kitno ki Neend ud Gayi hogi.

 CR Banzarey Aapke aagman par aapka swagat hai. Hamein bahut khushi huyi. Luteri, bhrasht aur damanakari karporati media ke khilaf phir se awaz uthayi jayegi.

Sumit Chauhan aapke aane ki hardik khushi hai bhaiya

Unnati Times Daily Dear Yashvant Ji, AApke Baare me padkar pada. Ess Desh me Sach ko Dabane me corporate media sabse aage hai. Apne niheet reasons ke karan, sach ko dakne me mafia n corrupt logon ke saath hai.

Amrit Kumar Singh Aapko lambe samay se miss kiya…ab bhadash niklegi…

Shravan Kumar Shukla koshish hain jari..!

Ashok Sahil अपने कमाल, अपने हुनर, अपने फन से ऊब जाए

कुछ जर्रे चाहते हैं कि सूरज ही डूब जाए

मेरा तो काम ये है बता दूं सडक का हाल

फिर भी उधर ही जाता है कोई तो खूब जाए

Mayank Saxena आ ही गए….राहत….आहहहहहह …अभी ही पता चला….

Sandeep Verma अरे , आज तो मेरे मिठाई बाटने का दिन था ,मुझे ही पता नहीं चला . हम सब आज बेहद खुश है यशवंत .

Vikas Yadav Welcome back to "RANG-DAR" Social Media Me Nai Kranti Ka Agaz karne wale Purodha Yashwant Ji Ka Ek Bar Fir Hum Log Swagat Karte Hai.Ab Dekhna Hai Ki Chichodi Media Ka Kaise Aap Band Bajate ho..

Amit Kumar Singh वापसी पर स्वागत है यशवंत भाई. उम्मीद है पहले से ज्यदा जोश खरोश से मैदान में उतरेंगे.

Vinod Bhardwaj सच ही है "जितना कठिन संघर्ष होगा , जीत उतनी ही शानदार होगी"…………बधाई एवं शुभकामनायें Yashwant Singh

Sharad Tripathi Yashwant Singh welcome back…

     Shekhar Patil वेलकम यशवंतभाई…
 
        Sharma Sonu aarop lganey se koi rangdar nhi ho jata. jnab dil chota na kijiye jeet saty ki hi hogi. yha nhi to bhagvan ki adalat me
 
        Siddharth Kalhans welcome sir ji
   
        Sanjay Singh welcome sir
    
        Hemant Shukla Bada achcha laga, afsosh ki hum sab kuchch jyada nahi kr paye is kukritya ki bhartsna ke .. Swasth va surakshit rahen.
     
        Ayush Kumar welcome back,ye shubh samachar sun bahut- bahut khushi mili sir..
        Yesterday at 03:50 via Mobile · Like
        Manish Kumar Welcome Back Yashwant Jii
      
        Arvind Vidrohi welcome
         
        Rahul Pandey शुक्र है साथी, अभी हमारे सपने जिन्दा है…भले ही उन उदास रातो के ही चलते, भले ही उस लोहे की बदौलत जो तुमने पिया, उतारा और सवारा. अब वक्त है उन्हे जीने का…हमारी वाहियात दुनिया मे स्वागत है.
         
        Vineet Kumar welcome back
 
        Shekhar Patil शाख से तुट जाए वो पत्ते नही है हम

        आंधीयो से कहो की अपनी औकात मे रहे
 
        Harishankar Shahi ढोल बजाओ बाबा तीर्थ से वापस लौटे हैं नए नए ज्ञान के चक्षु लिए. अब जल्द ही प्रवचन सुनने को मिलें. वैसे यह आपकी नई प्रोफाइल है क्या?
 
        Shailendra Singh स्वागत है आपका इस भ्रष्ट सज्जनों की दुनिया में…..
   
        Anuj Chauhan स्वागत है आपका इस भ्रष्ट सज्जनों की दुनिया में…..
    
        Bikash Prasad welcome back in land of curroption…….
     
        Nitin Thakur ‎'शरीफों' की दुनिया में स्वागत!!
      
        Nagmani Pandey यशवंत जी आप का स्वागत है लेकिन इतना जरुर कहूँगा भ्रष्टाचार के दुनिया में कम से कम चलो एक कोई "रंगदार " तो है | और आप की जेल टूर के बारे में थोड़ी अनुभव हमें भी शेयर करिए ताकि हमें भी थोड़ी जानकारी हो जाये और आप के सहयोगी साहब का क्या हाल है उनका जमानत हुआ की नही
       
        Vivek Vajpayee badhai ho..
        
        Rudra Singh Aap ab hai ranjhor ke rathor ………..
         
        Abhay Tripathi बधाई हो भईया…
         
        Atul Chaurasia mubarak ho
        Yesterday at 05:14 · Like
        Tarunmitra Hindi Daily sher pinjade se bahar aa gaya
         
        Dheerendra V. Gopal welcome
      
        Sanjay Shekhar Phir se Rangdaari Shuru kare.
      
        Tarun Kumar Tarun आज़ादी मुबारक हो यशवंत भाई ! आपके विचार को कोई गुलाम नहीं बना सकता, यह आपने साबित कर दिखाया है .
      
        Anil Kumar Singh Aap jail gaye hi kab, aap to hamare dilon men hain, Aao phir se rang jama den.
       
        Vivek Choudhary Welcome BACK ….Long live Our Democracy…
        
        Roaming Journalist welcome back
         
        Shivam Bhardwaj Welcome……
         
        Sharad Tripathi welcome…
         
        Brahmaveer Singh socho or war karo
         
        Mahesh Bihari Sharma well come sir………stymve jyte
         
        Vikash Rishi Welcome back yashwant bhai we r with u and its commen in journalilm profession… Keep writing all the best
         
        Ravi Shekhar संघर्ष जारी रहे ……..
         
        Ravindra Pathak Rajan ha.. ha.. ha.. breaking….
         
        Abhishek Cartoonist jindgi men bahut kuchh hotaa rahtaa hai …. welcome back
         
        Anurag Shukla Yashwant Jii Welcome Back
         
        Harsh Vardhan welcome
         
        Rita Das JIYO…AUR JAMAKAR BHADAS NIKALO…
         
        Priyabhanshu Ranjan Welcome Back sir…
        Yesterday at 10:25 · Like
        Harsh Kumar Swagat hai, phir utha lijiye hathiyar
         
        Rahul Tripathi स्वागत ………….है …….
         
        Meghal Verma welcome
         
        Amit Kumar Bajpai मुबारक हो भाई जान…
         
        Amit Kumar Bajpai अब छ्च्क्के छुड़ा देना सबके…
         
        Arsh Vats kha the sir we miss u
         
        Binod Singh swagat swagat…
         
        Anchal Sinha badhaaii
         
        Sanjaya Kumar Singh मैं तो एक शानदार जेल वृतांत का इंतजार कर रहा था। अनुमान नहीं था कि दौरा इतना लंबा होगा। इतने पर तो श्रृंखला चलनी चाहिए।
     
        Shravan Kumar Shukla welcome back sir ji
   
        Sunit Nigam rangdar nahi rangbaaj
    
        Ishant Singh welcome back/./… sir..
     
        Mahesh Jaiswal jail se jaroor kuch khas laaye hoge to Bhadas4jail ya bhadas4media.swagat hai aapka
      
        Dhruv Rautela bahut approach kiya aap se baat nahi ho payi..dada date rehna hum sab bhai apke sath hai apni puri team k sath…luv u bro.
       
        Roshan Premyogi mujhse rangdaari n maangna, jeb khali hai bhai
        
        Amit Kumar welcome
         
        Sanjeev Sharma Please Yashwant Bhaiya Rangdaar Shabd Na Ladayain Aopne Naam ke Sath…..Taqleef Hoti Hai
         
        Vyas Muni Tiwari achha hua chhor diya , varna na jane kaun -2 se dharaye hai jisame roka ja sakata tha.
         
        Kumar Sauvir तुम वापस जेल कब लौटोगे अतिथि-रंगदार
         
        Shravan Kumar Shukla Aise atithi se Jail wale bhi darte hain sir ji..

    Charan Devesh badahi comrade… lage raho hum tumhare saath hie
 
    Sanjeet Mishra Welcome from wasseypur 1 & 2
 
    Pankaj Praveen मजा नहीं आया ..आरोप भी लगा तो छिछोरा टाइप ,अरे भाई ब्रांड वैलू नाम की भी कोई चीज होती है..
   
    Praveen Raj Singh bhai sahan welcome back now you are more tougher than past
    
    Anjum Khan swagat
     
    Ganesh Dubey Sher Mand se bahar aa gaya hai
     
    Fahad Mahmood Welcome Back…..
     
    Anshuman Shukla Welcome back sir ji Swagat hai aapka khuli hawa main
     
    Anil Dubey Welcome back.
     
    Harishankar Shahi अब रंग फैला भी दीजिए, सबके रंग रंगीले हो जाने का समय है.
     
    Ritesh Mishra Welcome………
     
    Anil Dwivedi Badhayi ho bhaiya,
     
    Jai Prakash congrts………………….
     
    Govind Goyal badhai..shubhkamna
     
    Ravi Rathi welcome sir
     
    Sanjeet Tripathi Welcome back
     
    Santosh Pandey ‎''RANGDAAR''! Aate-Aate bahut der kar di….Na jane kitne Imandaar Aaj Maatam mana rahe honge……..
     
    Nalini Verma Chalo aj drshan to ho gye apke avinash..
     
    Satrughan Pandit Welcome sir
     
    Anil Sharma sir most welcome and god bless you
    
    Dinesh Juyal badhai bhai sorry milne nahi aa paya
     
    Vineet Singh नर हो न निराश करो मन को … जेल तो संघर्षकरने वालों का दूसरा घर है ….


            लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के संस्थापक और संपादक हैं. बारह साल तक दैनिक जागरण और अमर उजाला में ट्रेनी से लेकर एडिटर पद तक की यात्रा करने के बाद पिछले चार वर्षों से ''भड़ास'' निकाल रहे हैं जिसके कारण उन्हें कई सम्मानों-अपमानों से दो-चार होना पड़ा. उनसे संपर्क 09999330099 के जरिए किया जा सकता है. yashwant@bhadas4media.com पर मेल भेजकर आप अपनी बात यशवंत तक पहुंचा सकते हैं.

संबंधित खबरों के लिए यहां जाएं—

यशवंत जेल प्रकरण

सात तालों में चैन की नींद

जेल में सड़ाने की साजिश

रंगदारी कथा

कारपोरेट मीडिया का काला चेहरा

भड़ास के लिए दयानंद की दहाड़


इसे भी पढ़ें…

Yashwant Singh Jail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *