इंडिया टीवी के रिपोर्टर का घटिया सवाल

Mayank Saxena : गुड़गांव में एक बच्ची बोरवेल में गिर गई है…घर पर कुछ चैनल्स स्वैप कर रहा था…4 साल की बच्ची अपने जन्मदिन की दावत के दौरान बोरवेल में गिर जाए…ये वाकई मार्मिक खबर है…रेस्क्यू चल रहा है…तमाम चैनल्स उसी खबर पर हैं…लेकिन इंडिया टीवी से गुज़रते वक्त बच्ची की मां को बोलते देखा…वहां रुका…आप को जान कर गुस्सा आएगा…कि संवाददाता जो शायद कोई नया लड़का था…उसने बच्ची की मां से पूछा…कि कल घर पर जन्मदिन की पार्टी थी…कौन कौन आया था…कैसा माहौल था…क्या गिफ्ट मांगा था माही ने आप से…आप सोच सकते हैं…कि किस कदर निर्मम सवाल था ये एक मां से जिसकी 4 साल की बच्ची रात से बोरवेल में फंसी है…इंडिया टीवी सिर्फ एक उदाहरण है, ये पूरी एक लॉबी है…जो इसी ढर्रे पर काम करती है…मैनेजमेंट को कंटेंट का सी नहीं पता…और चम्पादकों की मंडली कंटेंट को यहां ले आई है…चम्पादक जी, आप खुद तो पाप कर ही रहे हैं…आपने सीनियर रिपोर्टरों की एक पूरी जमात को पापी बना दिया है…और साथ साथ नए लड़कों को भी उसी रास्ते पर धकेल रहे हैं…

 Bimal Raturi agree…… our india tv ka is me sab se bura haal hai

 Mayank Saxena और हां, इसके पर कोई सीनियर कितनी भी बहस कर ले…ये शर्मनाक है…जिन पत्रकार साथियों को लगता है कि इस सोच के साथ मैं इस पेशे के लिए फिट नहीं हूं…उनको सीधा जवाब ये है कि साहब मैं न तो दलाली सोच कर यहां आया हूं…न ही सिर्फ आजीविका चलाने के लिए…मैं हर खबर में खुद को रख कर देखता हूं
      
Mayank Saxena बिमल भाई ऐसा नहीं है…सब शामिल हैं इसमें…केवल इंडिया टीवी नहीं…इंडिया टीवी कई बार शानदार काम भी करता है…हाल ही में गोबर से अनाज बीनने वाली स्टोरी अद्वितीय थी…स्क्रिप्ट पैकेजिंग हर मामले में
        
Bimal Raturi hmmmm sir….
       
Mayank Saxena दरअसल ये सिर्फ दिमागी मेहनत बचाने का खेल है…शारीरिक श्रम तो नीचे के लोग कर ही रहे हैं…दिमागी श्रम से कंटेंट को बेहतर बनाना इनके बस का खेल नहीं है…सो सस्ता आईडिया एप्लाई करवाओ…क्रोमा…ग्राफिक्स और वाहियात स्लग-टॉपबैंड लिखने का काम नीचे वालों पर छोड़ दो…दरअसल नीचता पूर्ण आईडियाज़ सोचना आसान होता है…
       
Ajay Kumar yesh naya channel scam hai,…..bevkoofo ki zamat hai yeh
         
Niky Shrimali Media dictionary me aur word added chanpadak ji. :p
      
Mayank Saxena इस शब्द का श्रेय मैं लेना चाहूंगा…इसको निर्मल बाबा वाली प्रपंचतंत्र लिखते वक्त खोजा था मैंने….
        चम्पादक = वो सम्पादक जो मालिक का बिल्कुल चम्पू हो…या मालिक की चम्पी करने वाले सम्पादक….
       
Ajay Kumar Reporter k ;iye bhi invent kariye mayank ji
        
Mayank Saxena Reporter ….. वो बेचारा तो मजबूर है…क्या करेगा…5 लाख थोड़े ही पाता है…चम्पादक के कहने पर ही चलेगा न
       
Ajay Kumar yahi asal dard hai
        
Mayank Saxena रिपोर्टर को चीपोर्टर बना दिया….Cheaporter
        
Niky Shrimali Bilkul ess word ki khoj ka pura shreey apko jata hai..Malik ke chamach se lekhe gay lekhan ko Champadak kaha jay to bhi galat nahi hoga..
        
Ajay Kumar when editor become चम्पादक bechara reporter cheporter to apne aap hi ho gaya
        
Raghvendra Awasthi sahi

मयंक सक्‍सेना के फेसबुक वाल से साभार.

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