इंदौर से प्रकाशित वीकली अखबार ‘वीकेंड पोस्ट’ की संक्षिप्त यात्रा पर कुछ बातें

5 अक्टूबर 2013 से इंदौर से एक साप्ताहिक अखबार 'वीकेंड पोस्ट' का प्रकाशन प्रारंभ हुआ, जिसने थोड़े वक्त में ही अपनी पहचान बनाने में सफलता पाई है। 'वीकेंड पोस्ट' चिकने पेपर पर छपता है। टेबुलाइड आकार के 16 संपूर्ण रंगीन पेजों के साथ इसने अपना सफर शुरू किया, जो अभी तक बरकरार है। इसके तेवर बाकायदा साप्ताहिक अखबारों वाले ही हैं। इसमें इंदौर से जुड़ी जो खबरें अभी तक आई हैं, उन मुद्दों पर बेशक दैनिक अखबारों में खबरें छपती रही हैं, लेकिन इसका प्रस्तुतिकरण बेहद अलग और आक्रामक रहा है।

म.प्र. विधानसभा चुनाव में वीकेंड पोस्ट की खबरें सबसे अलग तो रही हीं, वे सही भी सबसे ज्यादा साबित हुई। यह अकेला अखबार है, जिसने लिखा था कि इंदौर जिले में भाजपा 9-0 से जीतेगी और वह जीती 8-1 से। शिवराज, रमनसिंह और वसुंधरा राजे की सरकारें बनने की खबरें इसने चुनाव के शुरुआती दौर में ही छाप दी थी। व्यापमं घोटाले के भी कुछ तथ्य जो छापे वे दैनिक अखबारों से अलग रहे। इसी ने लिखा था कि अभी तक किसी छात्रा के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? और 15 दिन बाद ही एक दोषी छात्रा पर भी एसटीएफ ने प्रकरण दर्ज किया।

वीकेंड पोस्ट में दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखड़े, हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार प्रकाश हिंदुस्तानी, कॉर्पोरेट पत्रकार प्रकाश बियाणी और लखनऊ के पत्रकार संजय शर्मा नियमित स्तंभ लिखते हैं। साथ ही इंदौर-भोपाल के वरिष्ठ रिपोर्टर रोहित तिवारी, विनोद उपाध्याय, हरीश मिश्रा स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं तो शहर के अनेक दैनिक अखबारों के प्रमुख पत्रकार खबरों के रूप में अपना योगदान देते हैं। रमण रावल इसके संपादक हैं, जिन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत साप्ताहिक अखबारों से ही की और बाद में भास्कर, नईदुनिया, चौथा संसार, पीपुल्स समाचार  में संपादक आदि पद की जिम्मेदारी निभाई। वीकेंड पोस्ट की प्रगति और शहर, समाज के बीच इसकी उपस्थिति देखकर यह कहा जा सकता है कि यह साप्ताहिक अखबारों के महत्व को एक बार फिर स्थापित करेगा।

जितेंद्र दुबे

इंदौर


भड़ास तक सूचनाएं bhadas4media@gmail.com के जरिए पहुंचा सकते हैं.

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