इटावा में ही कानून-व्‍यवस्‍था को चुनौती, सिपाही की गोली मारकर हत्‍या

: पुलिस एसोसिएशन के अध्‍यक्ष ने प्रमुख सचिव को लिखा पत्र : इटावा। जिले में खाकी का इकबाल पूरी तरह खत्म हो चुका है। जनता की रक्षा करने वाली खाकी स्वयं ही सुरक्षित नहीं है पिछले दिनों कई स्थानों पर खाकी बेइज्जत हुई और रात एक सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से पूरे जिले में सनसनी फैल गई। खाकी स्वयं भय के बीच जी रही है, तो आम जनता की क्या बिसात।

जानकारी के अनुसार जिले के इकदिल थाना क्षेत्र के नहर बम्बा पर नगला पढुआ के सामने रात एक सिपाही की गोली मारकर हत्या कर दी गई। सिपाही का शरीर गोलियों से छलनी हो गया। उसके शरीर में हमलावरों ने आठ गोलियां उतार दी। सिपाही गौरव रावत पुत्र दानवीर सिंह (उम्र करीब 21 वर्ष) ने घटना स्थल पर ही दम तोड़ दिया। सिपाही हत्या की जानकारी सुबह तब हुई जब लोग दिशा-मैदान को निकले। घटना की खबर सुनते ही पूरे जिले की पुलिस को जैसे सांप सूंघ गया। पुलिस बल में पूरी तरीके से भय और दहशत का माहौल बताया जाता है। मृतक सिपाही गौरव रावत भीमापुर, खुर्जा, जिला हाथरस का निवासी था। मृतक सिपाही की नियुक्ति 2011 में हुई थी।

हमलावरों ने सिपाही गौरव रावत को बेहद नृशंसता पूर्ण ढंग से मारा। उसके चेहरे व छाती को बुरी तरह छलनी कर दिया। इससे ऐसा आभास होता है कि मृतक सिपाही व हत्यारों के बीच कोई गहरी कटुता रही है। पुलिस के आला अफसरों ने घटना की सूचना पाते ही घटना स्थल का दौरा किया। मृतक सिपाही मुख्यालय स्थित तकिया चौकी पर तैनात था। पुलिस सूत्रों का कहना है कि मृतक सिपाही ने रात अपने हमराह वालों को बताया कि उसे उसके चचेरे भाई ने फोन कर बुलाया है। हालांकि दोपहर शनिवार यहां पहुंचे उसके चाचा ने बताया कि उसका कोई भाई यहां आया ही नहीं है। वह मेरठ में यूनीनॉर मोबाइल कम्पनी में नौकरी करता है। इससे आशंका गहराती है कि सिपाही को धोखा देकर बुलाया गया और इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। मृतक सिपाही गौरव रावत के शरीर में करीब आठ गोलियां धंसी हैं।

पुलिस सिपाही की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी है। शाम देर तक वह किसी निष्‍कर्श पर नहीं पहुंच पायी। पुलिस विभाग में सिपाही की हत्या को लेकर हड़कम्प मचा हुआ है। हड़कम्प इस बात का है कि इटावा जिला प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव का गृह जनपद है। नये मुख्यमंत्री ने कानून व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता पर  रखा है। उनके गृह जिले में कानून व्यवस्था का आलम ये है कि पुलिस वाले आये दिन पिटते है। नवीन मंडी के सामने नवीन के चौकी प्रभारी की पिटाई, ऊसराहार में पुलिस वाले के परिवार के अभद्रता, मुख्यालय पर रेलवे क्रासिंग पर सिपाही से मारपीट और महेवा में पुलिस वाले की पिटाई तो एक बानगी भर है। रात हुई सिपाही की हत्या ने विभाग को झकझोर कर रख दिया है। अब ये चर्चा चारों तरफ है कि क्या यही पुलिस का इकबाल है और नई सरकार की कानून व्यवस्था। सिपाही गौरव रावत का पोस्टमार्टम करने के बाद उसका शव उसके परिवारी जनों को सौंप दिया है। यहां पहुंचे कुछ परिवारीजन गौरव के शव पर रोते-बिलखते रहे।

दूसरी तरफ एक सिपाही की हत्‍या की निंदा करते हुए उत्‍तर प्रदेश पुलिस एसोसिएशन के अध्‍यक्ष सुबोध यादव ने प्रमुख सचिव को पत्र लिखा है तथा अपराधियों की जल्‍द से जल्‍द गिरफ्तारी की मांग की है। उन्‍होंने कहा कि इस घटना की जांच में एसटीएफ की सहायता ली जाए क्‍योंकि उन्‍हें इटावा पुलिस पर विश्‍वास नहीं है। उन्‍होंने आरोप लगाया है कि अधिकारी जमीनी आंकड़े दिखाकर अपराध रोकते हैं जबकि सच्‍चाई इसके इतर है।

इटावा से सुभाष त्रिपाठी की रिपोर्ट.

 

 
 

 

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