इसी हौसले के साथ आज दो बजे मिलते हैं

Vijai Pratap : हम जानते हैं कि जिसके लिए हम लड़ने जा रहे हैं वो पूरी तरह से हमारे साथ नहीं खड़े हैं, लेकिन ये तर्क हमारे बच कर निकलने के लिए नहीं हो सकता हमें अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी होगी। जो तटस्थता के लिए तर्क गढते हैं वो दरअसल लड़ाई से बचना चाहते हैं। हम उन्हें भी अपने साथ ही मानकर चलते हैं क्योंकि आज नहीं तो कल जब मालिक उनके पैरों तले भाड़े की जमीन खींच लेगा तो वो ऐसे ही किसी आईबीएन-7 के सामने या जंतर-मंतर पर गिरेंगे।  कब तक बचेंगे। ……हो सकता है कि इस लड़ाई से बहुत कुछ हासिल ना हो लेकिन बिना लड़े भी कुछ नहीं मिलता। BITV (बिजनेस इंडिया टेलीविजन) के कर्मचारियों का दसियों साल से चल रहा संघर्ष हमें हौसला देगा। इसी हौसले के साथ आज 2 बजे मिलते हैं…

Brijesh Singh : सभी साथियों से अनुरोध है कि वे दो बजे तक सीएनएन-आईबीएन के ऑफ़िस के सामने पहुँच जाएँ। अगर आप मेट्रो से आ रहे हैं तो नोएडा सेक्टर-16 के मेट्रो स्टेशन पर उतर जाएँ। वहाँ से सीएनएन का ऑफ़िस नज़दीक ही है। पता पूछते समय 'आज तक' के ऑफ़िस के बारे में पूछना बेहतर रहेगा क्योंकि अधिकतर लोग इस ऑफ़िस का पता जानते हैं। सीएनएन की बिल्डिंग 'आज तक' के ऑफ़िस के बिल्कुल पास है। आपकी मदद के लिए वहाँ कुछ साथी मौजूद रहेंगे। आप विकास (9015186098), सरोज (9899549366), दिलीप (9555045077) या आशीष (9968802332) से संपर्क कर सकते हैं।

Ankit Muttrija : जरूर आइएगा.. ये शुरूआत ज़ाया न जाए इसके लिए आना होगा | दोस्तों,मेरे जैसे आप भी कई युवा साथी पत्रकारिता से जुड़ कर समाज बदलने की ख्वाहिश रखकर यहां आए होंगे|मोहल्ले में मालूम होगा कि आप पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे हैं तो जरूर मोहल्ले के लड़के पूछते होंगे कि टीवी पर कब दिखेगा/दिखेगी ?पत्रकारिता को महज़ एंकर,रिपोर्टर तक सीमित रखने वालें नहीं जानते कि चैनल का रक्त बनकर कई कर्मचारी हर समय उसके शरीर में असाईंनमेंट से लेकर आऊटपुर,पीसीआर-एमसीआर वगैरह में दौड़तें रहते हैं|एक रिपोर्टर भी अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए कहां-कहां की धूल नहीं खाता और आपके आगे रिपोर्ट को अच्छे से मेक-अप करके प्रस्तुत करती हैं पूरी टीम|इन सब उम्मीदों,बदलावों वक़्त-वक्त़ पर पैदा होने वाली त्वरित क्रांतियों के बीच इन पत्रकारों का दर्द कहीं चैनल की चीख-पुकार वाली दुनिया में अनसुना रह जाता हैं|ये लोग दुनिया के जख़्मों पर मरहम लगाते हैं पर अपने जख़्म जो नासूर बन चुके हैं उसका कोई ईलाज नहीं करते| हाल में सीएनएन-आईबीएन से एक साथ 300 लोगों को निकाल दिया गया|आप सोच रहें होंगे निकाल दिया…

विजय, ब्रिजेश और अंकित के फेसबुक वॉल से.

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