इस कदर मिर्च-मसाला लगाकर खबरें क्यों छापता है दैनिक भास्कर?

चंडीगढ से लड़की का अपहरण कर गैंगरेप के मामले में दैनिक भास्‍कर के बठिंडा एडिशन की खूब छीछालेदर हो रही है। विरोधी अखबारों से खुद को अव्‍वल साबित करने के चक्‍कर में बठिंडा भास्‍कर ने गैंगरेप की कहानी रचने वाली युवती के मामले में इतनी सनसनी खड़ी कर दी कि अब वे खुद मुंह छुपाते फिर रहे हैं। किसी भी छोटे मामले को बढा–चढाकर छापने में भास्कर पहले भी सवालों के कटघरे में रहा है। लेकिन अब बिल्‍कूल फर्जी कहानी को इमोशनल तरीके से अखबार बेचने के चक्‍कर में इतना सनसनीखेज बनाने पर भास्‍कर का बाजार में खूब मजाक उड़ रहा है।

सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जिस पत्रकार ने खबर प्रकाशित की है, वह तो क्राइम रिपोर्टिंग में उतना परिपक्‍व नहीं लेकिन सिटी इंचार्ज से लेकर डीएनई और संपादक ने भी आसानी से सनसनी क्रिएट करने की परमिशन कैसे दे दी। बताया जा रहा है कि दूसरे अखबारों को कमतर साबित करने के चक्‍कर में अखबार ने इसे दिल्‍ली में हुई गैंगरेप की घटना से जोडकर इतना सनसनी बना दिया। इससे बडी बेवकूफाना हरकत क्‍या होगी कि जिसे अखबार चश्‍मदीद छाप रहा है वह लडकी से शारीरिक संबंध बनाने वाला और इस साजिश में बराबर का साथी है। बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद दूसरे पञकार भी भास्‍कर का खूब मजाक उडा रहे हैं। वह खूब चटकारे ले रहे हैं कि जिस लडकी ने अपनी मर्जी से अपना रेप करवाया वह एक इंजेक्‍शन से कैसे डर सकती है।

सवाल उठ रहा है कि  क्या हो गया है आज की पत्रकारिता को..कहने को बडे़-बडे़ अक्षरों में लिख रहे है इनवेस्टीगेट रिपोटिर्ग और छाप रहे है झूठी और सनसनीखेज खबरें.. अब सुनो दैनिक भास्कर की तरफ से बलात्कार को लेकर छापी एक खबर की सच्चाई। खबर में पत्रकार महोदय ने अपनी जांच पड़ताल के सभी घोड़े दौड़ाने और देर रात तक कवरेज करने का दावा जताया है। अब खबर भी बड़ी तान कर लगी है। दैनिक भास्कर में 21 जनवरी को छपी खबर की हेडिंग है- अस्पताल में इंजेक्शन देख चीखती थी दुष्कर्म पीड़िता….

इस खबर को पढ़कर लगता है जैसे पत्रकार महोदय के सामने सब कुछ घटित हुआ हो..खबर को दिल्ली रेप कांड की तरह सनसनीखेज बनाने के लिए दिल्ली कांड के कुछ सीन भी इस खबर के लिए जबरदस्ती चोरी कर जोड़ दिए गए है। पत्रकार की खबर को मिर्च मसाला से भरपूर करने के लिए पत्रकार के साथ उसके वरिष्ठ लोगों ने भी खासी मेहनत की है। अस्पताल के स्टाफ का जाली बयान, लड़की की आंखों में झठे आंसू को असली आंसू बनाकर पेश करने के साथ कई ऐसे संवाद किए गए जो बेवजह खबर को सनसनीखेज बनाने के लिए डाले गए लगते है। इस खबर पर शायद पाठक भी पहले की तरह विशवास कर लेते लेकिन सोमवार को आईजी ने पत्रकारों के सामने इस कहानी से परदा हटाकर झूठ और सच्च को अलग कर दिया।

अखबार ने जिस रोहताश कुमार को चश्मदीद गवाह बनाकर पेश किया है वही तथाकथित रेपकांड का मास्टर माइंड निकला है। यह पूरी कहानी अवैध संबंधों से जुडी थी जिसमें लड़की ने पहले किए अपराध को छुपाने के लिए पूरी साजिश अपने दोस्तो के साथ रची थी। इसमें जिन लोगों को आरोपी बता रही थी उन्होंने ही उसके खिलाफ 307 के मामले में केस दायर करवाया था।

फिलहाल इस घटना में जो भी घटा उस पर हम नहीं जाते लेकिन इसमें दैनिक भास्कर जैसा अखबार लीड बनाने के चक्कर में इस तरह की सनसनी फैलाकर गैरजिममेवारा व्यवहार करता है तो यह चिंता का विषय है। देश में बलात्कार जैसे संवेदनशील मामले को लेकर जहां हर तरफ बहस चल रही है वही मीडिया के एक हिस्से में बिना जांच पड़ताल के खबरों को सनसनी बनाकर पेश करने की होड़ लगी है जो समाज के साथ पाठकों के लिए चिंता का विषय बन रहा है। इसमें पत्रकार के साथ वरिष्ठ लोगों को भी चिंतन की जरुरत है जो पत्रकार के कहने मात्र में विश्वास कर इस तरह की खबरों में मिर्च मशाला डालकर पेश कर देते हैं।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर किसी को उपरोक्त तथ्यों-बातों-आरोपों पर कोई आपत्ति हो तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए अपनी बात रख सकता है.

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