इस नगर सेवक के खिलाफ मुंह क्‍यों नहीं खोलता है मीडिया?

नवी मुंबई की मीडिया में ऐसे लोगों की लगातार कमी हो रही है जो खबरों को पूरी हिम्मत और शिद्दत से परोसने का दम खम रखते हों. इसका सबसे ताजा उदाहरण यह है कि नवी मुंबई मनपा की स्थायी समिति में नये कार्यकाल के लिये सभापति का चुनाव होना है, लेकिन इस पद के लिये एक ऐसे नगरसेवक का नाम सामने आ रहा है जिसने ना तो कभी अपने वार्ड की समस्या के लिये महासभा में मुंह खोला है और ना ही इससे पहले स्थायी समिति में सदस्य रहते हुये उनकी जुबान कभी खुली.

जिस नगरसेवक का नाम सभापति के रूप में सबसे ज्यादा चर्चा में वह हैं सुरेश कुलकर्णी. इनका वार्ड नवी मुंबई के सबसे पिछड़े वार्ड में आता है. लेकिन इन्होंने शायद ही कभी अपने वार्ड की समस्यायें सदन में उठाई हों. अब दिक्कत यह है कि यह बात नवी मुंबई मीडिया को भलीभांति पता है कि उनके चयन की संभावना सबसे ज्यादा है, लेकिन उसके बावजूद अबतक एक भी रिपोर्ट ऐसी सामने नहीं आयी है, जिससे यह पता चल सके कि ऐसे पद के लिये उनकी योग्यता, उनका अपने में रहना नुकसान पहुंचा सकता है.

दरअसल इसके पीछे की असली हकीकत यह है कि इस नगरसेवक ने कुछ पत्रकारों को काफी समय से अपने पक्ष में कर रखा है. एक पत्रकार के बारे में तो यहां तक कहां जाता है कि वह जब लोकल न्यूज चैनल में थे तो सुरेश कुलकर्णी का ही न्यूज लगाने के लिये बेताब रहते थे. अब ऐसे में कैसे उम्मीद की जा सकती है कि सभापति जैसे पद के लिये एक नाकाबिल उम्मीदरवार के खिलाफ पत्रकार  अपनी कलम चलायेंगे. सवाल उठ रहा है कि सुरेश कुलकर्णी को अगर स्थायी समिति का सभापति बना दिया जाता है तो आखिर वह करेंगे क्या. वह कैसे 16 नगरसेवकों, अधिकारियों के बीच स्थायी समिति का कामकाज ठीक से संचालित कर पायेंगे.

राकेश श्रीवास्तव

नवी मुंबई

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