इस पूरे ड्रामे में पीएम-मनमोहन-राहुल की सहमति है यानि भारत सरकार की सहमति है

Nadim S. Akhter : तथाकथित महाखजाने की खुदाई पर हो रहे प्रपंच में सबसे अहम बात. क्या आप केंद्रीय मंत्री चरण दास महंत को जानते-पहचानते हैं?? अगर नहीं तो पहचान लीजिए. नाम नोट कर लीजिए उनका. खुदाई के सारे ड्रामे के सूत्रधार वहीं हैं. तथाकथित साधु शोभन सरकार के हनुमान हैं वो. टीवी कैमरों के सामने उछल-उछल कर दावा कर रहे थे कि शोभन सरकार के खजाने की भविष्यवाणी के बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री, सोनिया गांधी और राहुल गांधी तक से बात की है. यानी सबकुछ उनके कान में डाल दिया है. फिर एएसआई और जीएसआई से बात की, उनको तैयार किया. दो-तीन राउंड की मीटिंग की शोभन सरकार के साथ.

यानी जो कुछ हो रहा है वह सब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी और राहुल गांधी की स्वीकृति के बाद हो रहा है. जब चरणदास महंत ये बताते हैं कि महाखजाने की खुदाई के बारे में पीएम-सोनिया से बात की और अब खुदाई हो रही है, तो इसका मतलब है कि इस पूरे ड्रामे पर पीएम-मनमोहन-राहुल की सहमति है. भारत सरकार की सहमति है.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मनमोहन-सोनिया-राहुल भी अंधविश्वास की इस बचैन-लीला के नायकों में से हैं. क्या विज्ञान के इस युग में वे लोग भी ऐसे बेहूदा सपने और खुदाई को अपनी सहमित दे रहे हैं. अगर नहीं तो मनमोहन सरकार को फौरन जाग जाना चाहिए और अंधविश्वास फैलाने के लिए अपने मंत्री चरण दास महंत को तत्काल इस्तीफा देने के लिए कहना चाहिए. साथ ही एएसआई जो इस खुदाई के लिए तैयार हुई है, उस बारे में भी सफाई देनी चाहिए.

वैसे कांग्रेस में नेहरू-गांधी परिवार का ट्रैक रिकॉर्ड इस मामले में अच्छा नहीं है. किला-खजाना-अंधविश्वास और खुदाई का यह परिवार पोषक रहा है, ऐसा लगता है. अभी एक चैनल पर यह खबर देख रहा था कि इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री रहते उनके सुपुत्र संजय गांधी ने राजस्थान में अकबर के सेनापति मानसिंह का किला खुदवा दिया था. हीरे-जवाहरात की तलाश में. रिपोर्ट में बताया जा रहा था कि यह खुदाई छह महीने तक चली और फिर ट्रकों का एक काफिला वहां से निकला. इन ट्रकों में क्या था, ये आज तक एक रहस्य है.

खैर, बात-बात में ज्ञान झाड़ने वाले बीजेपी के पीएम इन वेटिंग नरेंद्र मोदी भी ताजा मामले पर रहस्यमय ढंग से चुप हैं.

नदीम एस. अख्तर
नदीम एस. अख्तर
वरना कांग्रेस पर वार करने का वह कौन सा मौका चूकते हैं. शायद मामला साधू-संस्कृति से जुड़ा हुआ है, तभी वह मौन हैं. लेकिन सवाल यही है कि ज्ञान-विज्ञान और मॉडर्न सोच की दुहाई देने वाले मोदी देश में चल रहे इतने बड़े नाटक पर मौन क्यों है? उनकी चुप्पी भी बहुत कुछ कह जाती है. चोर-चोर मौसेरे भाई और क्या!!!

लेखक नदीम एस. अख्तर युवा और तेजतर्रार पत्रकार हैं. कई अखबारों और न्यूज चैनलों में वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं. नदीम से संपर्क 085 05 843431 के जरिए किया जा सकता है.


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