इस यूपी में तुम्ही आओ केजरीवाल, हमसे कुछ न हो सका

Sheetal P Singh : सुल्तानपुर ज़िला मुख्यालय से चालीस मील दूर गाँव में हूँ। बिजली धोखे से आती है, कभी आधी रात कभी एकदम भोर कभी दोपहर और कभी नदारद। एक बार में ३-४ घंटे और कुल ७-८ घंटे। किसान छापेमारी की मुद्रा में बिजली स्तेमाल करते हैं। दिल्ली से आया हूँ और हैरान हूँ।

सूचना प्रौद्योगिकी ने miracle किया है कि यहाँ भी जे़रे बहस "आप" है। मोदी की लहर 'है' से 'थी' की ओर हो सकती है, अगर केजरीवाल निकल पड़ा! सबसे बड़ा कौतूहल है केजरीवाल। सब मुझसे उसकी शख़्सियत उगलवा लेना चाहते हैं। उम्र, पृष्ठभूमि और….इमानदारी। इमान बेईमान पर इस बेल्ट में भी भारी है जहाँ मनरेगा को प्रधान मज़दूर सिगरेटरी तहसीलदार और DM CM तक बाँट ले रहे हैं।

समूची आबादी योजनाओं को धरातल पर आने से पहले ही माँडवाली करने में मुब्तिला है और सूबे का बजट सैफई और देश का अमेठी में तरक़्क़ी का माडल गढ़ने में दशकों से लगा है और तरक़्क़ी बाबा जी का ….. हुई पड़ी है। सड़कें सिर्फ NH की बनती हैं, सूबे की बँटती हैं। जनप्रतिनिधि करोड़पति से अरबपति की ओर हैं सारे संसाधनों को स्वयं में सन्निहित करते हुए। ठेकेदार, ट्रांसपोर्टर, मोटर ट्रैक्टर पेट्रोल पंप के डीलर, सारे कालेजों के मालिक और बंदूक़ गिरोहों के सरगना सब जनप्रतिनिधि हैं। आओ तुम्ही आओ केजरीवाल। हमसे कुछ न हो सका।

वरिष्ठ पत्रकार और उद्यमी शीतल पी. सिंह के फेसबुक वॉल से.


भड़ास तक अपनी बात bhadas4media@gmail.com पर मेल करके पहुंचा सकते हैं.

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