ईमानदार नेता बनने का मादा होता तो आप कमांडेंट को नहीं सीएम को सस्‍पेंड करते राहुल

सुनीता भास्कर : राहुल गांधी के न्याय का भी कोई जवाब नहीं….उत्तराखंड के दौरे से लौटते ही उन्होंने एनडीआरऍफ़ के कमान्डेंट को हटाकर उनके मूल विभाग आईटीबीपी में भेज दिया.. हवाला रेस्क्यू में देरी का…गोकि देरी का सारा जिम्मा एकमात्र एनडीआरऍफ़ का हो..एनडीआरफ़ दूसरे दिन से ही वायुसेना के साथ कदम से कदम मिला के जी जान से रेस्क्यू में जुटा है..हेलीकॉप्‍टर क्रेश में उसने अपने नौ जवान खोये हैं. वैसे ही जवानों का मोरल डाउन है.

केंद्र सरकार की इस हरकत के बाद उन जवानों पर भी क्या बीतेगी. जिन्हें प्रोत्साहन की जगह सस्पेंसन लेटर मिल रहा….राहुल जी जरा आँख कान खोलो अपने..मुख्यमंत्री से लेकर अपनी ही सरकार के दर्जनों मंत्रियों पर नजर दौडाओ जिन्हें हेलीकॉप्‍टर में अपने साथ आपदा पीड़ितों का भरा जान अपनी शान में गुस्ताखी ही लग रहा..हेलिपैडों पर जहाँ सारा दिन परिजन अपनों के उतरने का इन्तजार कर रहे तब एक एक कर उन हेलीकॉप्‍टरों से यह आपके मंत्री उतर रहे हैं..एक को पूरा एक हेलीकॉप्‍टर चाहिए….आपको अपनी सरकार में कोई खामी नजर नहीं आई जब शुरू के दो दिन तक वह वायुसेना व एनडीआरऍफ़ से कोइ तालमेल नहीं कर पायी, वरना हजारों भूख से मरते लोगों को बचाया जा सकता था.

मुख्यमंत्री से लेकर तहसील तक का पूरा सरकारी अमला पहले दूसरे दिन तो छोडिये आज बारह दिन बाद भी कितना मुस्तैद है यह आपदा पीड़ितों की जुबानी भी सुना जा सकता है….आपके चहेते मुख्यमंत्री के सु(पुत्र) के आर्डर से कल सारा दिन रेस्क्यू किये लोगों को मीडिया से नहीं मिलने दिया गया…क्यूंकि वह पूरे बारह दिन की आपबीती से आपकी सरकार के पूरे सिस्टम को तार तार व बेपर्दा कर रहे थे…क्या ऐसे अब आप अपने माथे पर लगे बदइन्तजामी के दाग को हटाओगे…..तुम में एक ईमानदार नेता बनने का माद्दा होता तो तुम दिल्ली पहुंचकर आपदा कमान्डेंट को नहीं अपने मुख्यमंत्री को सस्पेंड करते राहुल.

पत्रकार सुनीता भास्‍कर के एफबी वॉल से साभार.

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