उत्तराखंड में पुलिसकर्मियों ने पूर्व सैनिक से की मारपीट, पत्रकारों से बदसलूकी

कोटद्वार में हफ्ता देने से इनकार करने वाले वाहन चालाक पूर्व सैनिक पर जानलेवा हमला करने वाले पुलिसकर्मियों और उन्हें संरक्षण देने वाले अधिकारीयों के खिलाफ जनांदोलन होने के बावजूद घटना के एक हफ्ते बाद भी उत्तराखण्ड सरकार निर्णय नहीं ले पायी है। निर्दोष को सजा और दोषी को मजा… शायद यही है कलियुग – धन्य हो सरकार। दुगड्डा चौकी के पुलिसकर्मियों ने जिस पूर्व सैनिक वाहन चालक को निर्दयतापूर्वक पीटकर गंभीर रूप से घायल किया, उसे गुप्तकाशी से आपदा राहत कार्य कर वापस घर आये महज एक दिन ही हुआ था और घर आने की वजह भी उसका स्वास्थ्य ख़राब होना था। 
 
इस घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पत्रकार जब समाचार संकलन के लिए कोतवाली गए तो घटना छुपाने प्रयास कर रहे पुलिस अधिकारीयों ने मीडियाकर्मियों से भी बदसुलूकी की। मीडियाकर्मियों की सक्रियता और दबाव के चलते दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुक़दमा तो दर्ज कर दिया गया लेकिन पत्रकारों के साथ अभद्रता करने व बर्बरता के दोषियों को संरक्षण देने वाले कोतवाल और पुलिस क्षेत्राधिकारी के खिलाफ कोई कारवाई नहीं की गयी। सीमा पर अपने जीवन के स्वर्णिम समय को न्योछावर कर देने वाले पूर्व सैनिक भगवन सिंह की पिटाई सिर्फ इसलिए कर दी गयी क्योंकि उसने अवैध ढंग से संचालित बैरियर पर रिश्वत देने से मना कर दिया था। 
 
जब उत्तराखण्ड की मित्र पुलिस के सिपाही पूर्व सैनिक से हिंसात्मक मित्रता निभा रहे थे तभी एक व्यक्ति ने पुलिस क्षेत्राधिकारी अरुणा भारती को फोन कर अमानवीय घटना रोकने की गुहार लगाई। घर में आराम फरमा रहीं इन कर्तव्यपरायण पुलिस अधिकारी ने जवाब दिया कि वे मामले को शाम को अपने कार्यालय में आकर देखेंगी। अब बात करें कोतवाल यानी लेडी दबंग अंशु चौधरी की तो इन मोहतरमा के सामने ही दुगड्डा पुलिस पीड़ित भगवान सिंह को कोटद्वार थाने लाई जहाँ इन्होंने भी उन पर जमकर अपनी बहुचर्चित अश्लील गालियों की भड़ास निकाली। पीड़ित भगवान सिंह आज भी कोटद्वार के राजकीय संयुक्त चिकित्लसाय में भर्ती है और उपचार करवा रहा है। 

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